पहलगाम में टूरिस्ट पर हुए हमले ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था। इस घटना से पुणे के संतोष जगदाले के परिवार पर भी दुखों का पहाड़ टूट पड़ा था। इस हमले में संतोष जगदाले की मौत हो गई थी। जिसके बाद उनके परिवार के सदस्य को नौकरी देने का वादा किया गया था। हालांकि, वह वादा अभी तक पूरा नहीं हुआ है। संतोष जगदाले की बेटी असावरी जगदाले ने केंद्र सरकार से संपर्क किया है।
असावरी जगदाले ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया, परिवार के मुख्य कमाने वाले सदस्य की पिछले साल 22 अप्रैल को आतंकवादियों द्वारा हत्या कर दिए जाने के बाद से हम आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं। मुझे अपनी मां के साथ रहने के लिए प्राइवेट सेक्टर की नौकरी छोड़नी पड़ी, जो इस समय बहुत कठिन दौर से गुजर रही हैं।”
परिवार सदमे से ऊबर नहीं पाया
आतंकी हमले और परिवार के एक सदस्य की बेरहमी से हत्या के सदमे से परिवार अभी तक उबर नहीं पाया है। असावरी ने कहा, “जले पर नमक छिड़कने वाली बात यह है कि अब हमें राज्य सरकार द्वारा आश्वासनित सरकारी नौकरी के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है।” उन्होंने कहा, “प्रशासन के इस बर्ताव से हम स्तब्ध हैं, जो हमें अपना काम करवाने के लिए मंत्रालय के चक्कर लगाने को कह रहा है। नेता हमें झूठे आश्वासन देकर समय बर्बाद कर रहे हैं कि प्रक्रिया चल रही है, लेकिन आज तक किसी ने भी प्रगति के बारे में कोई जानकारी नहीं दी है।”
असावरी ने कहा, “मुख्यमंत्री ने ही मुझे सरकारी नौकरी की घोषणा की थी, जबकि दोनों उपमुख्यमंत्रियों ने भी इस संबंध में हमें सहयोग का आश्वासन दिया था। घटना से ध्यान हटने के बाद से नौकरी के बारे में किसी ने भी लिखित में कुछ नहीं बताया है। दरअसल, तब से किसी ने भी मेरे और मेरी मां के बारे में पूछताछ तक नहीं की है।” उन्होंने दुख जाहिर करते हुए कहा, “प्राइवेट सेक्टर में नौकरी करने से तकनीकी दिक्कतें आती हैं, इसलिए मैं बीच में नौकरी छोड़ने की परेशानी से बचने के लिए वहां नौकरी नहीं कर सकती, लेकिन मेरे पास कोई सरकारी नौकरी भी नहीं है। हम अपना गुजारा सिर्फ अपनी बचत से ही चला रहे हैं। हमारी तकलीफें कोई नहीं समझ सकता।”
हमारी देखभाल करना सरकार की जिम्मेदारी- जगदाले
जगदाले ने आगे कहा, “हमारी मृत्यु तक हमारी देखभाल करना सरकार की जिम्मेदारी है, क्योंकि उन्हीं की वजह से हमारे परिवार के मुख्य कमाने वाले की मृत्यु हो गई है। मैं उन आतंकवादियों की कही बातों को नहीं भूल सकती जिन्होंने नरेंद्र मोदी का नाम लेकर धार्मिक आधार पर लोगों की हत्या की।” उन्होंने बताया कि उन्होंने वादा की गई नौकरी के बारे में स्पष्टीकरण पाने के लिए कई राजनीतिक नेताओं से मुलाकात की, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। उन्होंने कहा, “मैंने प्रधानमंत्री कार्यालय को भी पत्र लिखा, लेकिन वहां से भी कोई जवाब नहीं आया। पुणे दौरे के दौरान मुख्यमंत्री से मिलने की हमारी कोशिशें भी नाकाम रहीं, क्योंकि अधिकारियों ने उनकी व्यस्तता का हवाला देते हुए हमें मना कर दिया।”
परिवार ने आखिरकार राज्यसभा सांसद मेधा कुलकर्णी से मुलाकात की और उनसे अपना मामला उठाने का आग्रह किया। जगदाले ने कहा, “हम राज्यसभा सांसद से मिले, जहां हम रहते हैं। हमने उनसे मदद का अनुरोध किया क्योंकि बाकी सभी प्रयास विफल हो गए थे।” उन्होंने आगे बताया कि बीजेपी सांसद ने अब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के समक्ष उनका मामला उठाया है।
कुलकर्णी ने अमित शाह से मुलाकात की
कुलकर्णी ने शुक्रवार को दिल्ली में शाह से मुलाकात की और सरकार के आश्वासन को पूरा करने में हो रही लंबी देरी पर उनके हस्तक्षेप की मांग की। उन्होंने कहा कि इस देरी से पीड़ित परिवार को काफी भावनात्मक पीड़ा और आर्थिक कठिनाई का सामना करना पड़ा है। कुलकर्णी ने कहा, “संतोष जगदाले की हत्या वाले आतंकी हमले के तुरंत बाद, मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार सहित राज्य नेतृत्व ने शोक संतप्त परिवार को समर्थन का आश्वासन दिया था। यह भी बताया गया था कि आतंकी हमलों के पीड़ितों के परिवारों के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता के तहत, असावरी जगदाले को अनुकंपा के आधार पर सरकारी नौकरी दी जाएगी।”
उन्होंने बताया कि उन्हें संतोष जगदाले की पत्नी प्रगति जगदाले से एक अनुरोध प्राप्त हुआ था, जिसमें सरकार को उसके वादे की याद दिलाने में उनकी सहायता मांगी गई थी, जिसे उन्होंने शाह को बता दिया। उन्होंने कहा, “मैंने गृह मंत्री को बताया कि मैं अब इस मामले में उनके हस्तक्षेप की मांग कर रही हूं ताकि उचित और समय पर कार्रवाई की जा सके।”
असावरी शैक्षणिक तौर पर योग्य- कुलकर्णी
कुलकर्णी ने आगे बताया कि असावरी शैक्षणिक रूप से योग्य हैं। परिवार ने अनुरोध किया है कि उन्हें या तो वादा किए गए पद पर या पुणे नगर निगम या राज्य सरकार में किसी वैकल्पिक उपयुक्त पद पर नियुक्त किया जाए। कुलकर्णी ने कहा, “असावरी को रोजगार देने से न केवल आजीविका सुरक्षा सुनिश्चित होगी बल्कि राज्य के नेताओं द्वारा दिए गए आश्वासन का भी सम्मान होगा। इससे आतंकवाद के पीड़ितों के प्रति सरकार के दयालु और संवेदनशील दृष्टिकोण की भी पुष्टि होगी।”
इस बीच, पुणे नगर निगम, जिसने असवारी को नगर निगम में नौकरी की पेशकश की थी, राज्य सरकार से जवाब का इंतजार कर रहा है। एक अधिकारी ने बताया, “पुणे नगर निगम ने पिछले साल अगस्त में राज्य सरकार से असवारी को नौकरी देने की अनुमति मांगने के लिए प्रस्ताव भेजा था। हमें अभी तक कोई जवाब नहीं मिला है।” पठानकोट से पहलगाम तक- भारत के चार बड़े आतंकी हमले और जवाबी वार की पूरी इनसाइड स्टोरी
