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वानिकी से नदियों के संरक्षण के लिए परियोजना रिपोर्ट होगी तैयार

जल शक्ति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने कहा कि मंत्रालय द्वारा लिए गए निर्णय के अनुरूप आइसीएफआरई ने अपने क्षेत्रीय संस्थानों के माध्यम से समग्र दृष्टिकोण अपना कर वानिकी कार्यकलापों के जरिये नौ नदी बेसिनों से संबंधित 13 नदियों को डीपीआर तैयार करने के लिए चुना है।

Author नई दिल्ली | July 12, 2019 1:08 AM

सरकार ने गुरुवार को बताया कि पर्यावरण, वन व जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने वानिकी कार्यकलापों के माध्यम से देश की प्रमुख नदियों के संरक्षण हेतु विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने के लिए भारतीय वन अनुसंधान व शिक्षा परिषद (आइसीएफआरई) देहरादून को अध्ययन कार्य सौंपा है।
लोकसभा में जनार्दन मिश्र और रोडमल नागर के प्रश्न के लिखित उत्तर में जल शक्ति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने कहा कि मंत्रालय द्वारा लिए गए निर्णय के अनुरूप आइसीएफआरई ने अपने क्षेत्रीय संस्थानों के माध्यम से समग्र दृष्टिकोण अपना कर वानिकी कार्यकलापों के जरिये नौ नदी बेसिनों से संबंधित 13 नदियों को डीपीआर तैयार करने के लिए चुना है। इन नदियों में ब्यास, चिनाव, झेलम, रावी, सतलज, यमुना, ब्रह्मपुत्र, महानदी, कृष्णा, गोदावरी, कावेरी और लूनी हैं। इस अध्ययन का मुख्य उद्देश्य देश की प्रमुख नदी प्रणालियों को वानिकी कार्यकलापों के जरिये संरक्षित करना है।

इसका मकसद नदी बेसिन की मौजूदा स्थिति, विगत नदी प्रबंधन व निहितार्थों और अर्जित ज्ञान की समीक्षा और आकलन करना, पक्षकारों की पहचान करके उन्हें शामिल करना और रणनीति और पद्धतियां तैयार करना व विकसित करने के लिए सहमति बनाना है। वन जल ग्रहण क्षेत्र निर्मित करने, उसमें सुधार व उसका पुनरुद्धार करने के लिए क्षमता और संभावनाओं का आकलन करना, तटीय वनों की स्थिति व जीव विज्ञानीय फिल्टरों की क्षमता का आकलन करना, औषधीय पौधों की बुवाई क्षमता का आकलन और संरक्षण क्षेत्रों का पुनरुद्धार और उपयुक्त प्रजातियों और समुचित स्थानों की पहचान करना शामिल है।

मंत्री ने बताया कि जल शक्ति मंत्रालय के नमामि गंगे कार्यक्रम के अंतर्गत महत्त्वपूर्ण घटक गंगा नदी और उसकी सहायक नदियों के किनारे सघन वृक्षारोपण करना है जो गंगा बेसिन के किनारे स्थित छोटे शहरों या कस्बों में हरित कॉरिडोर के रूप में कार्य करेगा। राष्ट्रीय स्वच्छता गंगा मिशन, गंगा नदी क्षेत्र में वृक्षारोपण करने के लिए वन अनुसंधान संस्थान देहरादून द्वारा ‘गंगा के लिए वानिकी कार्यकलाप’ हेतु तैयार की गई विस्तृत परियोजना रिपोर्ट के अनुसार राज्य वन विभागों को वृक्ष लगाने के लिए सहायता प्रदान करता है।

डीपीआर के अनुसार उत्तराखंड में सभी सूक्ष्म वाटरशेडों में और उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल राज्यों में तट के किनारे या नदी मार्ग के साथ-साथ पांच किलोमीटर के बफर क्षेत्र में और चुनी गई सहायक नदियों के दोनों ओर दो किलोमीटर बफर क्षेत्र में वृक्षारोपण किया जा रहा है। शेखावत ने बताया कि इस कार्यक्रम की शुरुआत के बाद से अब तक एनएमसीजी द्वारा उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल के पांच गंगा राज्यों में 22 हजार हेक्टेयर भूमि पर वृक्षारोपण के लिए 269 करोड़ रुपए की वृक्षारोपण परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है।

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