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मशहूर इतिहासकार ने कहा- फ़ारसी मूल का है अमित शाह का नाम, बीजेपी पहले उसे बदले

प्रोफेसर हबीब ने कहा,''यहां तक कि गुजरात शब्द का उद्भव फारसी भाषा से हुआ है। पहले इसे 'गुर्जरात्र' कहा जाता था। उन्हें इसे भी बदलना चाहिए।''

Author Updated: November 11, 2018 4:17 PM
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के प्रोफेसर इरफान हबीब। Express Photo by Subham Dutta.

विभिन्न राज्यों में भाजपा की सरकारों के द्वारा नाम बदलने की कवायद पर जाने-माने इतिहासकार इरफान हबीब ने टिप्पणी की है। हबीब ने कहा है कि पार्टी को पहले उनके राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह का नाम बदलना चाहिए। उनका तर्क है ,”​उनका उपनाम ‘शाह’ फारसी मूल का है, ये गुजराती शब्द नहीं है।”

बदलना चाहिए गुजरात का भी नाम: टीओआई ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में प्रोफेसर 87 वर्षीय इरफान हबीब से बातचीत के बाद रिपोर्ट प्रकाशित की है। रिपोर्ट के मुताबिक, प्रोफेसर हबीब ने कहा,”यहां तक कि गुजरात शब्द का उद्भव फारसी भाषा से हुआ है। पहले इसे ‘गुर्जरात्र’ कहा जाता था। उन्हें इसे भी बदलना चाहिए।”

नाम बदलना RSS का एजेंडा: प्रोफेसर हबीब ने आरोप लगाते हुए कहा,” भाजपा का नाम बदलने का अभियान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की हिंदुत्व नीति पर आधारित है। ये बिल्कुल पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान की तरह है, जहां जो भी चीज इस्लामिक नहीं है, उसे हटा दिया जाता है। भाजपा और दक्षिणपंथी समर्थक उन चीजों को बदल देना चाहते हैं जो गैर हिंदू है और खासतौर पर इस्लामिक मूल की हैं।”

Amit Shah भाजपा सांसद और राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह। Express photo by Partha Paul.

कहां से आया ‘शाह’: वैसे बता दें कि कई भाषा विज्ञानी मानते हैं कि शाह शब्द का मूल फारसी से है जिसका ​​अर्थ राजा होता है। शाह उपनाम भारत में अधिकतर सैय्यद मुस्लिमों के द्वारा लगाया जाता है। लेकिन शाह शब्द संस्कृत भाषा के शब्द साधु से भी आता है, जिसका अर्थ भला व्यक्ति होता है। भारत में शाह उपनाम का इस्तेमाल अधिकतर कारोबारी समुदाय जैसे वैश्य समुदाय करता है। इसके अलावा शाह/साह उपनाम गुजरात, राजस्थान और यूपी में जैन और वैष्णव भी करते हैं। शाह उपनाम दिल्ली, हरियाणा, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र का जैन समुदाय भी इस्तेमाल करता है। कुछ भाषा विज्ञानी मानते हैं कि शाह शब्द का मूल हिंदी के शब्द साहूकार से आता है। साहूकार शब्द का अर्थ पैसे का लेन-देन करने वाला होता है।

भाजपा विधायक जगन प्रसाद गर्ग

आगरा का नाम बदलने की भी मांग: प्रोफेसर हबीब आगरा से भाजपा विधायक जगन प्रसाद गर्ग के उस पत्र पर प्रतिक्रिया दे रहे थे, जो उन्होंने यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को लिखा था। अपने पत्र में विधायक गर्ग ने ताजनगरी आगरा का नाम बदलकर अग्रवन करने का प्रस्ताव रखा था। विधायक का तर्क है कि ये घर अग्रवाल समुदाय का मूल स्थान है। अग्रवाल महाराजा अग्रसेन के अनुयायी माने जाते हैं।

मुगलों ने बदला शहर का नाम!: टीओआई ने विधायक जगन प्रसाद गर्ग से बातचीत के बाद कहा,”आगरा शब्द का कोई अर्थ या मतलब नहीं है। करीब 5 हजार साल पहले, ये संपूर्ण पट्टी यमुना के नजदीक होने के कारण घने जंगलों से घिरी हुई ​थी। लोग इस क्षेत्र को अग्रवन के नाम से जानते थे। इस नाम का जिक्र महाभारत में भी मिलता है। बाद में, मुगल राज के दौरान, शहर का नाम बदलकर अकबराबाद कर दिया गया।”

इसलिए भी बदलना चाहिए नाम: विधायक गर्ग ने आगे कहा,”सरकार को एक अन्य वजह से भी आगरा शहर का नाम बदलना चाहिए। आगरा शहर अग्रवाल समुदाय का सबसे बड़ा घर है। वे महाराजा अग्रसेन के अनुयायी हैं, जिन्होंने कभी अग्रवन पर शासन किया था। करीब चार लाख अग्रवाल ताजनगरी में रहते हैं।”

कोरी कल्पना हैं महाराजा अग्रसेन!: विधायक जगन प्रसाद गर्ग के प्रस्ताव पर प्रोफेसर हबीब ने कहा,”महाराजा अग्रसेन का पूरा इतिहास काल्पनिक है। ये कुछ और नहीं सिर्फ कोरी कल्पना है। दूसरी बात, अग्रवाल समुदाय अपना मूल उद्भव हरियाणा के अग्रोहा से होने का दावा करता है, आगरा से नहीं। इसलिए शहर का नाम बदलने के दोनों ही तर्कों में दम नहीं है।” प्रोफेसर हबीब मानते हैं कि आगरा शब्द सबसे पहले 15वीं शताब्दी के आसपास देखने में आता है। उस वक्त दिल्ली में सिकंदर लोदी का शासन था। उससे पहले इस पूरे इलाके को गंगा-यमुना के बीच का दोआब कहा जाता था।

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