कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने RSS के फाइनेंशियल और लीगल स्टेटस के खुलासे की मांग उठाई है। खड़गे ने सोमवार को कहा कि उन्होंने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत को पत्र लिखकर संगठन की कानूनी स्थिति, फाइनेंस, पदाधिकारियों और टैक्स से संबंधित जानकारी मांगी है। उन्होंने यह भी मांग उठाई कि सौ साल पुराने इस संगठन को रजिस्टर कराया जाए और इसके संचालन का खुलासा किया जाए।
13 जून को लिखे एक पत्र में, खड़गे ने उल्लेख किया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का दावा है कि भारत और विदेशों में उसकी 60,000 से अधिक शाखाएं और करोड़ों स्वयंसेवक हैं। उन्होंने कहा, “इसी विशालता, प्रभाव और पहुंच के कारण आरएसएस को पारदर्शिता, जवाबदेही और संवैधानिक अनुपालन के मानकों का पालन करना होगा।”
कर्नाटक के मंत्री ने अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा (ABPS) की 2025-26 की वार्षिक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि आरएसएस की कर्नाटक में महत्वपूर्ण उपस्थिति है जिसमें 4127 दैनिक शाखाएं, 1389 साप्ताहिक मिलन और 60 मासिक मंडलियां शामिल हैं। खड़गे ने बताया कि संगठन ने कथित तौर पर 2194 समाजोत्सव आयोजित किए हैं जिनमें लगभग 19.6 लाख प्रतिभागियों ने भाग लिया और राज्य भर में 562 रूट मार्च आयोजित किए जिनमें 2.21 लाख से अधिक वर्दीधारी स्वयंसेवकों ने भाग लिया।
खड़गे बोले- इतनी व्यापक संगठनात्मक उपस्थिति अनौपचारिक व्यवस्था नहीं
प्रियांक खड़गे ने कहा, “कुल मिलाकर ये आंकड़े कर्नाटक भर में दैनिक कैडर निर्माण, साप्ताहिक और मासिक जनसंपर्क, जन आयोजनों और जुलूसों के माध्यम से संचालित एक विशाल, अनुशासित और गहराई से जुड़े नेटवर्क को दर्शाते हैं।” उन्होंने कहा, “इतनी व्यापक संगठनात्मक उपस्थिति को निजी या अनौपचारिक व्यवस्था नहीं माना जा सकता। इससे कानूनी स्थिति, जवाबदेही, वित्तीय पारदर्शिता, सार्वजनिक व्यवस्था, फंडिंग के स्रोत और भारत के संविधान और कानूनों के अनुपालन के संबंध में वैध सवाल उठते हैं।”
प्रियांक खड़गे का आरएसएस से अनुरोध
कर्नाटक के मंत्री ने आगे कहा, “हम आरएसएस से अनुरोध करते हैं कि वह अपने अधिकृत पदाधिकारियों को नियुक्त करे ताकि वे उन कानूनी आधारों की व्याख्या कर सकें जिनके आधार पर इतने बड़े संगठन का गुमनाम रूप से और लागू कानूनों के तहत औपचारिक रूप से कानूनी इकाई या व्यक्तियों के समूह के रूप में रजिस्टर हुए बिना कार्य करना जारी रखना संभव है।”
मंत्री द्वारा मांगी गई अन्य जानकारियों में इसके पदाधिकारियों और अधिकृत प्रतिनिधियों के नाम, दान और आय के स्रोत, व्यय और परिसंपत्तियों का विवरण और इस बात की जानकारी शामिल थी कि क्या लागू करों का भुगतान कानून के अनुसार किया जा रहा है।
प्रियांक की आरएसएस से अपील
प्रियांक ने कहा कि हम आरएसएस से अपील करते हैं कि वह अपनी शताब्दी के अवसर का उपयोग केवल उत्सव मनाने के लिए नहीं बल्कि संवैधानिक आत्मनिरीक्षण के लिए करे। भारत के 100वें वर्ष में आरएसएस द्वारा दी जाने वाली सर्वोत्तम श्रद्धांजलि यही होगी कि वह स्वयं को रजिस्टर करे, अपनी गतिविधियों और वित्त का खुलासा करे, सभी लागू करों का भुगतान करे और भारतीय कानून के दायरे में एक पारदर्शी और जवाबदेह संगठन के रूप में काम करे।
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