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नियमों को दरकिनार कर कोरोना संदिग्धों की लिस्ट कर दी सार्वजनिक, 722 लोगों के पासपोर्ट डिटेल, पता और मोबाइल नंबर सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे

देशभर में अब तक कोरोनावायरस के 900 से ज्यादा मामले सामने आए हैं, साथ ही विदेश से लौटे हजारों लोगों को एहतियात के तौर पर नाम छिपा कर 14 दिन के क्वारैंटाइन में रखा गया है।

सोशल मीडिया पर एक लिस्ट वायरल हो रही है, जिसमें क्वारैंटाइन में रखे गए कोरोना संदिग्धों की जानकारी होने का दावा किया गया है। (फाइल)

देशभर में अब तक कोरोनावायरस संक्रमण से प्रभावित 900 से ज्यादा लोगों की पहचान हो चुकी है। 21 दिन के लॉकडाउन के अंदर संक्रमण की चेन तोड़ने के लिए स्वास्थ्यकर्मियों की कोशिश है कि पीड़ितों को कम से कम 14 दिन क्वारैंटाइन यानी बाकियों से अलग-थलग रखा जाए। इसके लिए केंद्र और राज्य सरकारों ने अपने-अपने स्तर पर तैयारी भी की है। पीड़ितों के लिए रहने के लिए अलग जगह देने से लेकर उनकी पहचान छिपाने तक के लिए सरकारों ने काफी मशक्कत की। हालांकि, इसके बावजूद सोशल मीडिया पर 722 नामों की एक लिस्ट वायरल हो रही है। दावा किया जा रहा है कि इस लिस्ट में जो नाम हैं, वो कोरोनावायरस से संक्रमितों के हैं, जिन्हें अपने घरों पर क्वारैंटाइन किया गया है, ताकि कोई उनके संपर्क में न आ सके।

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क्वारैंटाइन में रखे गए लोगों की जो जानकारी इस लिस्ट में है उसमें पासपोर्ट नंबर, मोबाइल नंबर, संदिग्धों के घर के पते और उनकी ट्रैवल हिस्ट्री यानी यात्राओं का विवरण शामिल है। अभी तक यह साफ नहीं है कि यह लिस्ट कहां से आई या इसका सूत्र क्या है। लेकिन कुछ राज्य सरकारों ने आधिकारिक तौर पर क्वारैंटाइन में रखे गए लोगों का डेटा सार्वजनिक किया था। कोरोनावायरस के बढ़ते प्रकोप के बीच इस तरह के खुलासों ने सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं और डॉक्टर-मरीज के बीच रखे जाने वाले गुप्त व्यवहार पर सवाल उठा दिए हैं। साथ ही इससे संदिग्धों के निजता के अधिकार का भी उल्लंघन माना जा रहा है।

संदिग्धों के नाम सार्वजनिक करने और उनकी निजता बनाए रखने पर अब भी कोई कानून या राष्ट्रीय स्तर पर प्रोटोकॉल नहीं है। ऐसे में राज्य सरकारें भी ऐसे डेटा को सार्वजनिक रखने पर बंटी नजर आ रही हैं। जहां कुछ राज्यों ने नागरिकों को ज्यादा बेहतर तरीके से सूचना देने के लिए क्वारैंटाइन में रखे गए लोगों की जानकारी सार्वजनिक करने का फैसला किया है, वहीं कुछ राज्य लोगों में डर कम करने और संदिग्धों की निजता की सुरक्षा करने में जुटे हैं।

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