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कोरोना के इलाज के लिए निजी अस्पतालों ने जमकर लिए पैसे, स्थायी संसदीय समिति की रिपोर्ट में खुलासा

स्वास्थ्य संबंधी स्थायी संसदीय समिति के अध्यक्ष राम गोपाल यादव ने राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू को कोविड-19 महामारी का प्रकोप और इसका प्रबंधन पर रिपोर्ट सौंपी। सरकार द्वारा कोविड-19 महामारी से निपटने के संबंध में यह किसी भी संसदीय समिति की पहली रिपोर्ट है।

Author नई दिल्ली | November 22, 2020 8:01 AM
कोविड-19 का महंगा इलाज कराने में लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।

एक संसदीय समिति ने शनिवार को कहा कि कोविड-19 के बढ़ते मामलों के बीच सरकारी अस्पतालों में बिस्तरों की कमी और इस महामारी के इलाज के लिए विशिष्ट दिशानिर्देशों के अभाव में निजी अस्पतालों ने काफी बढ़ा-चढ़ाकर पैसे लिए। इसके साथ ही समिति ने जोर दिया कि स्थायी मूल्य निर्धारण प्रक्रिया से कई मौतों को टाला जा सकता था।

स्वास्थ्य संबंधी स्थायी संसदीय समिति के अध्यक्ष राम गोपाल यादव ने राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू को कोविड-19 महामारी का प्रकोप और इसका प्रबंधन पर रिपोर्ट सौंपी। सरकार द्वारा कोविड-19 महामारी से निपटने के संबंध में यह किसी भी संसदीय समिति की पहली रिपोर्ट है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि निजी अस्पतालों में कोविड के इलाज के लिए विशिष्ट दिशानिर्देशों के अभाव के कारण मरीजों को अत्यधिक शुल्क देना पड़ा। समिति ने जोर दिया कि सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी और महामारी के मद्देनजर सरकारी और निजी अस्पतालों के बीच बेहतर साझेदारी की जरूरत है।

समिति ने कहा कि जिन डॉक्टरों ने महामारी के खिलाफ लड़ाई में अपनी जान दे दी, उन्हें शहीद के रूप में मान्यता दी जानी चाहिए और उनके परिवार को पर्याप्त मुआवजा दिया जाना चाहिए। समिति ने कहा कि 1.3 अरब की आबादी वाले देश में स्वास्थ्य पर खर्च बेहद कम है और भारतीय स्वास्थ्य व्यवस्था की नाजुकता के कारण महामारी से प्रभावी तरीके से मुकाबला करने में एक बड़ी बाधा आई।

रिपोर्ट में कहा गया है कि इसलिए समिति सरकार से सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली में अपने निवेश को बढ़ाने की अनुशंसा करती है। समिति ने सरकार से कहा कि दो साल के भीतर सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 2.5 फीसद तक के खर्च के राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए निरंतर प्रयास करें क्योंकि वर्ष 2025 के निर्धारित समय अभी दूर हैं और उस समय तक सार्वजनिक स्वास्थ्य को जोखिम में नहीं रखा जा सकता है।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 में 2025 तक जीडीपी का 2.5 फीसद स्वास्थ्य सेवा पर सरकारी खर्च का लक्ष्य रखा गया है जो 2017 में 1.15 फीसद था। समिति ने कहा कि यह महसूस किया गया कि देश के सरकारी अस्पतालों में बेड की संख्या कोविड और गैर-कोविड मरीजों की बढ़ती संख्या के लिहाज से पर्याप्त नहीं थी।

संक्रमित प्रशिक्षु लोकसेवकों की संख्या 57 हुई
मसूरी स्थित लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासनिक अकादमी (एलबीएसएनएए) में कोरोना संक्रमित सिविल सेवा के प्रशिक्षु अधिकारियों की संख्या 57 हो गई है। इसके बाद अकादमी में सभी गैर-आवश्यक विभागों को वहां बंद कर दिया गया है। कार्मिक मंत्रालय ने शनिवार को एक बयान में कहा कि अकादमी कोविड-19 संक्रमण के प्रसार की श्रृंखला तोड़ने के लिए देहरादून जिला प्रशासन और गृह मंत्रालय के दिशानिर्देशों के अनुसार हरसंभव उपाय कर रही है। सभी संक्रमितप्रशिक्षु अधिकारियों को कोविड देखभाल केंद्र में पृथकवास में रखा गया है।

इसमें कहा गया है कि 20 नवंबर, 2020 से एलबीएसएनएए में 57 अधिकारी प्रशिक्षुओं के संक्रमित होने की पुष्टि हुई है। फिलहाल अकादमी में 95वें फाउंडेशन पाठ्यक्रम के लिए 428 प्रशिक्षु अधिकारी हैं।

कोविड से मुक्त होने वालों की संख्या 84.78 लाख
देश में कोरोना विषाणु से संक्रमित मरीजों की संख्या 90.50 लाख हो गई है जबकि संक्रमण मुक्त होने वाले लोगों की संख्या बढ़ कर 84.78 लाख पहुंच गई है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से शनिवार सुबह आठ बजे जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार, देश में चौबीस घंटे में 46,232 नए मामले सामने आए हैं, जिसके बाद संक्रमितों की कुल संख्या बढ़ कर 90,50,597 हो गई है।

मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, विषाणु के कारण चौबीस घंटे में 564 और लोगों की मौत हो गई है, जिससे मरने वालों की संख्या बढ़ कर 1,32,726 तक पहुंच गई है। आंकड़ों के अनुसार, शनिवार को लगातार 11वें दिन देश में उपचाराधीन मामलों की संख्या पांच लाख से कम है। देश में 4,39,747 रोगी उपचाराधीन हैं, जो संक्रमित मरीजों की कुल संख्या का 4.86 फीसद है।

आंकड़ों में कहा गया है कि सफल उपचार के बाद देश में संक्रमण मुक्त होने वाले लोगों की संख्या 84,78,124 पर पहुंच गई है। रोगियों के संक्रमणमुक्त होने की राष्ट्रीय दर 93.67 फीसद हो गई है, जबकि मृत्यु दर 1.47 फीसद है। भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद के अनुसार, 20 नवंबर तक 13.06 करोड़ नमूनों की जांच की जा चुकी है।

आंकड़ों के अनुसार, 564 मौतों में से सबसे अधिक महाराष्ट्र में 155 लोगों की मृत्यु हुई है। इसके बाद राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में 118, पश्चिम बंगाल में 50, केरल में 28, हरियाणा में 25 तथा उत्तर प्रदेश में 20 लोगों की मौत हुई है। इसमें कहा गया है कि देश में हुई कुल 1,32,726 लोगों की मौत में से महाराष्ट्र में 46,511, कर्नाटक में 11,621, तमिलनाडु में 11,568, दिल्ली में 8,159, बंगाल में 7,923, उत्तर प्रदेश में 7,500, आंध्र प्रदेश में 6,920, पंजाब में 4,572, और गुजरात में 3,837 लोगों की मौत शामिल है।

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