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‘आधार’ मुद्दा: केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में कहा, निजता मौलिक अधिकार नहीं

केंद्र सरकार ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में सवाल उठया कि ‘क्या निजता का अधिकार मूल अधिकार माना जा सकता है?’ सरकार ने अदालत में कहा कि संविधान निजता...

Author July 23, 2015 09:40 am

केंद्र सरकार ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में सवाल उठया कि ‘क्या निजता का अधिकार मूल अधिकार माना जा सकता है?’ सरकार ने अदालत में कहा कि संविधान निजता के इस अधिकार को दर्जा नहीं देता। सरकार ने इस सिलसिले में दो दशकों में सुप्रीम कोर्ट की ओर दिए उन फैसलों पर पुनर्विचार करने को कहा जिनमें निजता के अधिकार को मूल अधिकार के तौर पर परिभाषित किया गया है।

आधार योजना पर उठी आपत्तियों को लेकर कुछ आपत्तियों पर केंद्र ने सर्वोच्च न्यायालय में कहा कि आधार योजना को लागू करने के लिए ‘पुख्ता व्यवस्था’ होगी और कल्याणकारी कार्यक्रम को निरस्त करने के लिए निजता के अधिकार का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है क्योंकि यह संविधान के अंतर्गत मौलिक अधिकार नहीं है।

न्यायमूर्ति जे चेलामेश्वर की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष अटार्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने कहा, ‘निजता का अधिकार हमारे संविधान के अंतर्गत मौलिक अधिकार नहीं है। यह अधिकार एक अन्य अधिकार से मिलता है। संविधान निर्माताओं की मंशा निजता के अधिकार को मौलिक अधिकार बनाने की नहीं थी।’

उन्होंने कहा, निजता के लिए कोई मौलिक अधिकार नहीं है, इसलिए अनुच्छेद 32 के तहत दायर याचिकाएं खारिज की जानी चाहिए। इस पर पीठ ने कहा कि वह इस मामले को संविधान पीठ के पास भेजना चाहता है। अटार्नी जनरल इन दलीलों का जवाब दे रहे थे कि आधार योजना निजी आंकड़े एकत्र करने पर आधारित है और इससे नागरिकों के निजता के अधिकार का हनन होता है। उन्होंने कहा कि इस योजना को निरस्त करने की दलील स्वीकार नहीं की जा सकती है क्योंकि हम एक पुख्ता व्यवस्था तैयार कर रहे हैं।

आधार कार्ड को वेतन, भविष्य निधि वितरण और विवाह व संपति के पंजीकरण जैसी तमाम गतिविधियों के लिए अनिवार्य बनाने के कुछ राज्यों के फैसलों के खिलाफ दायर याचिकाओं पर अदालत सुनवाई कर रही है। अटार्नी जनरल ने कहा कि इसमें किसी अधिकार के हनन का सवाल ही नहीं उठता। वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान ने अटार्नी जनरल की इन दलीलों का विरोध किया। वे गुरुवार को भी बहस करेंगे।

(भाषा)

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