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कभी रिलायंस के खिलाफ सख्त रुख अपना चुके हैं ‘मोदी मैन’ पीके मिश्रा! पढ़ें पीएम के प्रधान सचिव से जुड़ीं दिलचस्प बातें

90 के दशक में पीके मिश्रा जब गुजरात बिजली बोर्ड में थे तब उन्होंने रिलायंस ग्रुप पर सख्ती की थी। उन्होंने कंपनी को मिलने वाली रियायतों पर कड़ा रुख अपनाया था।

PM Modi, principal secretary, PK Mishra, modi man, Narendra modi, modi govt, UPA govt, Gujarat, disaster management, reliance, cabinet rank, agriculture secretary, india news, Hindi news, news in Hindi, latest news, today news in Hindiपीके मिश्रा यूपीए सरकार के कार्यकाल में कृषि सचिव रह चुके हैं। (फाइल फोटो)

नृपेंद्र मिश्रा के जाने के बाद गुजरात कैडर के आईएएस रहे पीके मिश्रा को प्रधानमंत्री का नया प्रधान सचिव बनाया गया है। प्रमोद कुमार मिश्रा प्रधान सचिव के रूप में भले ही नए हों लेकिन पीएम मोदी के साथ काम करने का उनका अनुभव बहुत पुराना है।

साल 2001 में जब नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री बने थे उन्होंने पीके मिश्रा को अपना प्रधान सचिव चुना था। मिश्रा ने तत्कालीन मुख्यमंत्री के साथ तीन साल तक काम किया। मुख्यमंत्री के साथ काम करने के लिए विपक्ष उन्हें ‘मोदी मैन’ कहकर निशाना बनाया था। हालांकि, उन्होंने कभी इसकी शिकायत नहीं की।

2001 में कच्छ में भूकंप के दौरान डॉ. मिश्रा प्रमुख कृषि सचिव के रूप में विभाग की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। उस समय उन्हें आपदा प्रबंधन की अतिरिक्त जिम्मेदारी दी गई थी। उन्होंने इस जिम्मेदारी को पूरी दक्षता के साथ निभाया। उन्होंने इसके बाद राहत और पुनर्वास कार्य पर एक किताब भी लिखी। राहत पुनर्वास और आपदा प्रबंध में उनके योगदान के लिए संयुक्त राष्ट्र की तरफ सम्मानित भी किया जा चुका है।

90 के दशक में पीके मिश्रा जब गुजरात बिजली बोर्ड में थे तब उन्होंने रिलायंस ग्रुप पर सख्ती की थी। उन्होंने कंपनी को मिलने वाली रियायतों पर कड़ा रुख अपनाया था। मिश्रा यूपीए-1 के कार्यकाल में कृषि सचिव थे। उन्होंने ही फसल बीमा स्कीम का सुझाव दिया था। यूपीए के बाद मोदी सरकार ने भी उनके इस सुझाव पर अमल किया। बेहद शिष्ट और मृदुभाषी पीके मिश्रा को उनके करीबो दोस्त ‘बाबू’ कहकर बुलाते हैं।

उनकी सरलता का अंदाजा इसी बात से लगाया वह अपने दोस्तों को अपने हाथ से कॉफी बनाकर पिलाते हैं। इससे पहले पीके मिश्रा को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिलने की बात उसी समय साफ हो गई थी जब अतिरिक्त प्रधान सचिव के रूप में इन्हें कैबिनेट मंत्री का दर्जा मिला था। कृषि सचिव के रूप में रिटायर होने के बाद भी मिश्रा ने गुजरात सरकार के साथ काम करना जारी रखा।

पीके मिश्रा की खासियत यह है कि वह अपनी सहजता के लिए जाने जाते हैं। वह यह आसानी से जान जाते हैं कि उनके बॉस क्या चाहते हैं। इसके अलावा वह कभी भी अपनी राय नहीं थोपते हैं। जब वह गुजरात में कृषि सचिव थे तो उस दौरान इन्होंने वर्षा आधारित खेती करने वाले किसानों की जरूरतों को बारीकी से समझा।

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