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पीएम नरेंद्र मोदी ने खोला राज- ईदगाह से आया था उज्‍ज्वला योजना का आइडिया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उज्‍ज्‍वला योजना के लाभार्थियों को संबोधित किया। उन्‍होंने बताया कि मुंशी प्रेमचंद की कहानी ईदागाह से उन्‍हें इस योजना को अमल में लाने की प्रेरणा मिली थी, ताकि हर घर को एलपीजी कनेक्‍शन से जोड़ा जा सके।

Author नई दिल्‍ली | May 28, 2018 6:50 PM
उज्‍ज्‍वला योजना के लाभार्थियों को संबोधित करते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार (28 मई) को उज्‍ज्‍वला योजना के लाभार्थियों को संबोधित किया। इस दौरान उन्‍होंने इस योजना को अमल में लाने के पीछे की प्रेरणा के बारे में दिलचस्‍प खुलासा किया। पीएम मोदी ने कहा कि ग्रामीण महिलाओं तक कूकिंग गैस पहुंचाने की प्रेरणा उन्‍हें प्रेमचंद की अमर कहानी ‘ईदगाह’ से मिली थी। उन्‍होंने कहा, ‘ईदगाह में हामिद नाम के एक बच्‍चे का चरित्र था। वह मेले में मिठाई खरीद कर खाने के बजाय अपनी दादी के लिए चिमटा खरीद कर लाया था, ताकि इसकी मदद से उसकी दादी खाना पका सकें और उनका हाथ न जले। मुंशी प्रेमचंद की यह कहानी मुझे आज भी प्रेरित करती है। मेेेेरा मानना है कि यदि एक हामिद ऐसा कुछ कर सकता है तो देश का प्रधानमंत्री ऐसा क्‍यों नहीं कर सकता?’ पीएम मोदी ने ट्वीट कर भी इसका जिक्र किया। उन्‍होंने लिखा, ‘मैं प्रेमचंद की कहानी ईदगाह को कभी नहीं भूल सकूंगा। यह कहानी हामिद नाम के बच्‍चे की है। ईदगाह बहुत ही भावुक कहानी है।’

प्रधानमंत्री ने इस मौके पर विपक्षियों पर निशाना साधना भी नहीं भूले। कार्यक्रम में बोलते हुए उन्‍होंने कहा, ‘मैं इस बात से दुखी हूं कि भारत की स्‍वतंत्रता के बाद सत्‍ता में आई सरकारों ने वर्षों पुरानी इस सामाजिक समस्‍या की ओर पर्याप्‍त ध्‍यान नहीं दिया। गैस कनेक्‍शन देना उनकी प्राथमिकताओं में कभी रहा ही नहीं। यही वजह है कि आजादी के बाद से वर्ष 2014 तक भारत में सिर्फ 13 करोड़ एलपीजी कनेक्‍शन ही दिए गए थे।’ बता दें कि प्रधानमंत्री उज्‍ज्‍वला योजना को तकरीबन दो साल पहले शुरू किया गया था। इस योजना के जरिये वर्ष 2019 तक 10 करोड़ लोगों को एलपीजी कनेक्‍शन से जोड़ने की योजना है। उज्‍ज्‍वला योजना को लेकर नेशनल ज्‍योग्राफिक चैनल एक डॉक्‍यूमेंट्री भी बना चुका है। इसमें चार महिलाओं की मदद से इस योजना के महत्‍व और प्रभाव को बताने का प्रयास किया गया है। बता दें कि भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में खाना बनाने के लिए आमतौर पर पारंपरिक ईंधन का ही इस्‍तेमाल किया जाता है। लकड़ी और उपला का धड़ल्‍ले से इस्‍तेमाल किया जाता है। इसे वातावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। वायु प्रदूषण भी होता है। सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में इस प्रवृत्ति को बदलने और उन तक स्‍वच्‍छ ईंधन की पहुंच सुनिश्चित कराने के लिए उज्‍जवला योजना की शुरुआत की गई।

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