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पीएम मोदी ने किया हावड़ा पुल पर साउंड एंड लाइट शो का उद्घाटन, कहा- आजादी के बाद लिखे गये इतिहास में अनदेखी

यह शो वर्तमान रंगबिरंगी प्रकाश व्यवस्था की जगह लेगा। इसमें संगीत के साथ रंगबिरंगी लाइट का कार्यक्रम होगा।

Author Edited By मोहित कोलकाता | Updated: January 11, 2020 10:06 PM
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। फोटो: ANI Twitter/ScreenGrab

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को कोलकाता के गंगा के तट पर मिलेनियम पार्क से ऐतिहासिक हावड़ा पुल पर साउंड एंड लाइट शो का उद्घाटन किया। मिलेनियम पार्क पर ढाई मिनट का यह शो लगाया गया है। यह कोलकाता बंदरगाह न्यास (केओपीटी) की 150 वीं जयंती समारोह की परियोजना का हिस्सा है। यह शो वर्तमान रंगबिरंगी प्रकाश व्यवस्था की जगह लेगा। इसमें संगीत के साथ रंगबिरंगी लाइट का कार्यक्रम होगा।

पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, केंद्रीय नौवहन मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) मनसुख मंडाविया भी इस पार्क में कार्यक्रम में मौजूद थे। इसका आयोजन केओपीटी ने किया। यह पुल से दो किलोमीटर की दूरी पर है। साउंड एंड लाइट शो का उद्घाटन करने के बाद मोदी नदी मार्ग से बेलूर मठ के लिए रवाना हो गये जो रामकृष्ण मठ एवं मिशन का वैश्विक मुख्यालय है।

इससे पहले प्रधानमंत्री ने ओल्ड करेंसी बिल्डिंग में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि आजादी के बाद देश के इतिहास के बारे में जिन इतिहासकारों ने लिखा, उन्होंने विषय की गहराई में उतरे बिना उसके कई महत्वपूर्ण पहलुओं की अनदेखी की।

उन्होंने कहा कि राष्ट्र निर्माण के महत्वपूर्ण पहलुओं में एक देश की धरोहर को संजोकर रखना होता है। प्रधानमंत्री ने कहा, ‘हम दुनिया को अपने देश की धरोहर दिखाना चाहते हैं, भारत को धरोहर पर्यटन का केंद्र बनाना चाहते हैं। देश के पांच प्रतिष्ठित संग्रहालयों को अंतरराष्ट्रीय मानक के आधार पर विकसित किया जाएगा, कोलकाता में भारतीय संग्रहालय से शुरुआत होगी।’

मोदी ने शहर के चार पुर्निवकसित धरोहर भवनों-ओल्ड करेंसी बिंल्डिंग, बेल्वेदेरे हाउस, मेटकॉफ हाउस और विक्टोरिया मेमोरियल हाल को राष्ट्र को सर्मिपत किया। उन्होंने कहा, ‘‘यह बड़ा दुर्भाग्यपूर्ण है कि ब्रिटिश शासन के दौरान और आजादी के बाद भी जो इतिहास लिखा गया उनमें कई महत्वपूर्ण अध्यायों की अनदेखी की गयी।’’

प्रधानमंत्री ने कहा कि गुरूदेव रवींद्रनाथ टैगोर ने 1903 में लिखा था कि भारत का इतिहास वह नहीं है जिसे विद्यार्थी परीक्षाओं के लिए पढ़ते हैं। उन्होंने कहा, ‘कुछ लोग बाहर से आये, उन्होंने सिंहासन की खातिर अपने रिश्तेदारों, भाइयों को मार डाला…..यह हमारा इतिहास नहीं है। यह स्वयं गुरूदेव ने कहा था। उन्होंने कहा था कि इस इतिहास में इसका उल्लेख नहीं है कि देश के लोग क्या कर रहे हैं। क्या उनका कोई अस्तित्व नहीं है।’

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