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साल में दूसरी बार लाल किले से नरेंद्र मोदी ने फहराया तिरंगा, बोले- दुश्मनों को दोगुनी ताकत से देंगे जवाब

पीएम ने कहा- ये भी दुखद है कि एक परिवार को बड़ा बताने के लिए, देश के अनेक सपूतों, वो चाहें सरदार पटेल हों, बाबा साहेब आंबेडकर हों, उन्हीं की तरह ही, नेताजी के योगदान को भी भुलाने का प्रयास किया गया।

पीएम मोदी ने लाल किले से भाषण भी दिया। (फोटो सोर्स : ANI)

सुभाष चंद्र बोस के नेतृत्व वाली ‘आजाद हिंद सरकार’ की 75वीं जयंती के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज (21 अक्टूबर) लाल किले पर तिरंगा फहराया। परम्परा तोड़ते हुए पीएम मोदी ने लाल किले से भाषण भी दिया। अब तक केवल 15 अगस्त को ही देश के प्रधानमंत्रियों द्वारा लाल किले पर झंडारोहण किया जाता रहा है। उन्होंने कहा कि देश को चुनौती देने वालों को हम दोगुनी ताकत के साथ जवाब देंगे।

पीएम मोदी ने कहा, आज मैं उन माता पिता को नमन करता हूं जिन्होंने नेता जी सुभाष चंद्र बोस जैसा सपूत देश को दिया। मैं नतमस्तक हूं उस सैनिकों और परिवारों के आगे जिन्होंने स्वतंत्रता की लड़ाई में खुद को न्योछावर कर दिया।

उन्होंने कहा, आजाद हिन्द सरकार सिर्फ नाम नहीं था, बल्कि नेताजी के नेतृत्व में इस सरकार द्वारा हर क्षेत्र से जुड़ी योजनाएं बनाई गई थीं। इस सरकार का अपना बैंक था, अपनी मुद्रा थी, अपना डाक टिकट था, अपना गुप्तचर तंत्र था।

लाल किले से पीएम मोदी ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा, ये भी दुखद है कि एक परिवार को बड़ा बताने के लिए, देश के अनेक सपूतों, वो चाहें सरदार पटेल हों, बाबा साहेब आंबेडकर हों, उन्हीं की तरह ही, नेताजी के योगदान को भी भुलाने का प्रयास किया गया। देश का संतुलित विकास, समाज के प्रत्येक स्तर पर, प्रत्येक व्यक्ति को राष्ट्र निर्माण का अवसर, राष्ट्र की प्रगति में उसकी भूमिका, नेताजी के वृहद विजन का हिस्सा थी। आजादी की लड़ाई में जो समर्पित हुए वो उनका सौभाग्य था, हम जैसे लोग जिन्हें ये अवसर नहीं मिला, हमारे पास देश के लिए जीने का, विकास के लिए समर्पित होने का मौका है।

लाल किले पर झंडा फहराते पीएम मोदी

नेताजी के बारे में प्रधानमंत्री ने कहा, कैम्ब्रिज के अपने दिनों को याद करते हुए सुभाष बाबू ने लिखा था कि हमारी आदत यूरोप को इंग्लैंड के चश्मे से देखने की हो गई है। क्योंकि हम भारतीयों को ये सिखाया जाता है कि यूरोप, ग्रेट ब्रिटेन का ही बड़ा स्वरूप है। आज मैं निश्चित तौर पर कह सकता हूं कि आजादी के बाद अगर देश को सुभाष बाबू, सरदार पटेल जैसे व्यक्तित्वों का मार्गदर्शन मिला होता तो भारत को देखने के लिए वो विदेशी चश्मा नहीं होता।

इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को ही नए कलेवर वाले राष्ट्रीय पुलिस स्मारक और नवनिर्मित पुलिस संग्रहालय का उद्घाटन किया। इसे मोदी ने राष्ट्र को सर्मिपत किया। मध्य दिल्ली के चाणक्यपुरी इलाके में 6.12 एकड़ जमीन पर निर्मित पुलिस स्मारक पहुंचने पर मोदी को रस्मी सलामी दी गई। कार्यक्रम स्थल पर केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने उनका स्वागत किया।

राष्ट्रीय पुलिस स्मृति दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने शहीद पुलिसर्किमयों के सम्मान में बनाई गई 30 फुट ऊंची और 238 टन की काले ग्रेनाइट की मूर्ति के साथ एक संग्रहालय और 34,800 से ज्यादा शहीद पुलिसर्किमयों के नाम लिखे एक पट्ट का अनावरण किया।

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