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पीएम मोदी की हाई-लेवल बैठक, फिलहाल 10% कटौती, धीरे-धीरे खत्म होगी ईरानी तेल पर निर्भरता

चार नवंबर को प्रतिबंध लागू होने की समय सीमा के बाद ईरान को रुपए में भुगतान करने पर सहमति बनी है। अमेरिका और वेनेजुएला के बीच तनाव बढ़ने के कारण अमेरिका ने ईरान के तेल निर्यात पर रोक लगा दी है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। (फोटोः रॉयटर्स)

अमेरिकी प्रतिबंधों के मद्देनजर ईरान से तेल के आयात को लेकर पैदा हुई स्थिति पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को एक उच्चस्तरीय बैठक की, जिसमें पेट्रोलियम मंत्रालय, विदेश मंत्रालय और वित्त मंत्रालय के आला अधिकारियों ने हिस्सा लिया। इस बैठक में तय किया गया कि ईरान से कच्चे तेल के आयात में 10 फीसद की कटौती की जाएगी। इस कटौती का लक्ष्य हासिल करने के तौरतरीकों के बारे में चर्चा की गई। भारत अपनी जरूरत का 83 फीसद कच्चा तेल आयात करता है। भारत ने 2017-18 की अवधि में 220.4 मिलियन मीट्रिक टन तेल का आयात किया था। इसका 9.4 फीसद तेल ईरान से मंगाया गया था।

बैठक में शामिल विदेश मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक, भारत सरकार ईरान से तेल मंगाना बंद नहींकरेगी। लेकिन ईरान से आयात में कटौती करते हुए यह सुनिश्चित किया जाएगा कि ईरानी तेल पर निर्भरता खत्म हो। चार नवंबर को प्रतिबंध लागू होने की समय सीमा के बाद ईरान को रुपए में भुगतान करने पर सहमति बनी है। अमेरिका और वेनेजुएला के बीच तनाव बढ़ने के कारण अमेरिका ने ईरान के तेल निर्यात पर रोक लगा दी है। इस बैठक में कच्चे तेल के वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों के उत्पादन को लेकर चर्चा की गई। सरकार ने खोज व उत्पादन नीति में बदलाव किया है और उसे निवेशकों के लिए लचीला बनाया गया है। खोज व उत्पादन कंपनियां अब कानूनी रूप से उन फील्ड से शेल गैस व कोयले से मीथेन गैस निकालने जैसे गैर-परंपरागत संसाधनों का उपयोग कर सकती हैं, जो उन्हें परंपरागत तेल व गैस उत्पादन के लिए दिया गया है। इन उपायों से तेल व गैस उत्पादन बढ़ेगा लेकिन इसमें कुछ साल लगेंगे। सरकार चाहती है कि घरेलू उत्पादन बढ़ाया जाए और एथनॉल जैसे जैव-र्इंधन का उपयोग बढ़ाया जाए।

ओएनजीसी बंगाल की खाड़ी स्थित ब्लाक केजी-डीडब्लूएन-98/2 या केजी डी-5 में खोजे गए तेल कुओं से उत्पादन के लिए 5.07 अरब डालर का निवेश कर रही है। वहां से गैस उत्पादन दिसंबर 2019 और तेल मार्च 2021 तक शुरू होने की उम्मीद है। तेल व प्राकृतिक गैस आयोग (ओएनजीसी) के चेयरमैन व प्रबंध निदेशक शशि शंकर और आयल इंडिया के चेयरमैन व प्रबंध निदेशक उत्पल बोरा ने अपनी-अपनी कंपनियों के अगले पांच साल में तेल व गैस उत्पादन के बारे में जानकारी दी। बैठक में पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और पेट्रोलियम सचिव एमएम कुट्टी भी मौजूद थे। पेट्रोलियम कंपनियों ने कच्चे तेल के घरेलू उत्पादन में हल्की वृद्धि का अनुमान जताया है। वहीं प्राकृतिक गैस उत्पादन 24 अरब घन मीटर प्रतिदिन से बढ़कर 42 अरब घन मीटर प्रतिदिन पहुंच जाने का अनुमान है। इसका मुख्य कारण ओएनजीसी के केजी बेसिन गैस फील्ड से उत्पादन शुरू होने की उम्मीद है। देश का कच्चे तेल का उत्पादन 2016-17 में 3.6 करोड़ टन से घटकर 2017-18 में 3.57 करोड़ टन रहा।

ईरान के मुद्दे पर अमेरिकी वार्ताकार ब्रायन हुक और अमेरिका के ऊर्जा विभाग में सहायक सचिव फ्रांसिस आर फेनन ने शुक्रवार को दिल्ली पहुंचकर भारतीय अधिकारियों से बातचीत की। ईरान पर प्रतिबंध की समय सीमा 4 नवंबर करीब आने के मद्देनजर हुक और उनके सहयोगी को भारत और उन यूरोपीय देशों से वार्ता करने के लिए भेजा गया है, जो ईरान से तेल आयात करते हैं। भारतीय अधिकारियों से 2+2 वार्ता के मसौदे के अनुरूप रास्ता निकालने पर बातचीत हुई है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, इस बीच ओपेक के भारतीय अधिकारियों ने महासचिव मोहम्मद बरकिंदों के संदेश पर यहां चर्चा की। ओपेक ने भरोसा दिया है कि भारत को तेल आपूर्ति में कमी नहीं आएगी। ओपेक और भारत के अधिकारियों के बीच तेल की कीमतों को लेकर निर्णायक बातचीत 17 अक्तूबर को लंदन में होगी। संभावना है कि तेल की कीमतों में बढ़ोतरी रोकने के लिए ओपेक देश उत्पादन बढ़ाएंगे। वेनेजुएला और सऊदी अरब ने भी उत्पादन बढ़ाने का भरोसा दिया है।

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