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बर्थडे ब्यॉय नरेंद्र मोदी के पास है एक्टिंग, डायरेक्शन का भी हुनर! लिख चुके हैं यह नाटक

PM Narendra Modi birthday special: एक्टिंग और रंगमंच के के प्रति उनके लगाव उनपर लिखी गई किताब 'The Man of the Moment: Narendra Modi by MV Kamath and Kalindi Randeri' में पढ़ा जा सकता है।

Author नई दिल्ली | Updated: September 16, 2019 4:32 PM
पीएम मोदी। (पीटीआई फोटो/फाइल)

PM Narendra Modi Birthday Special: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बीते छह सालों में देश की राजनीति में सबसे लोकप्रिय नेता बनकर उभरे हैं। 17 सितंबर को उनका जन्मदिन है और तमाम सर्वे-पोल्स के साथ दो आम चुनाव में भी यह साबित हो चुका है कि बर्थडे ब्यॉय देश में खासा मशहूर हैं। हालांकि, गुजरात के मुख्यमंत्री रहते भी मोदी खूब सुर्खियों में रहे। फिर भी बहुत से लोग नहीं जानते कि अपने स्कूली दिनों में पीएम मोदी को एक्टिंग और नाटक में बहुत दिलचस्पी थी।

एक्टिंग और रंगमंच के के प्रति उनके लगाव उनपर लिखी गई किताब ‘The Man of the Moment: Narendra Modi by MV Kamath and Kalindi Randeri’ में पढ़ा जा सकता है। साल 2013 में यह किताब उस वक्त प्रकाशित हुई जब वह देश के निर्विवाद राजनीतिक नेता के रूप में उभरकर सामने आए। एग्जाम वॉरियर में पीएम मोदी ने खुद इस बात को लिखा भी कि स्कूली दिनों में उन्हें एक्टिंग और रंगमंच से कितना लगाव रहा।

एग्जाम वॉरियर के एक चैप्टर में उन्होंने अपने स्कूली दिनों की पुरानी याद को ताजा करते हुए बताया, ‘मुझे एक स्पेशल डायलॉग देना था मगर किसी कारण मैं इसके लिए संघर्ष कर रहा था। नाटक के निर्देशक बेताब हो उठे। उन्होंने कहा कि अगर मैं उस तरह से संवाद कहता रहा तो वो मुझे निर्देशित नहीं कर पाएंगे।’ हालांकि मोदी को लगा कि वो संवाद पूरी तरह से दे रहे हैं।

पीएम मोदी ने अपनी किताब में आगे लिखा, ‘इसलिए मुझे यह देखकर बुरा लगा कि निर्देशक मेरे बारे में यही कहेंगे। अगले दिन मैंने उनसे अपनी तरह काम करके दिखाने को कहा कि मैं क्या गलत कर रहा हूं। बाद में जब निर्देशक ने वही सीन करके दिखाया तो कुछ ही सेकंड में मुझे एहसास हुआ कि मैं कहां गलत था।’ बता दें कि पीएम मोदी का आज जन्मदिन है। 17 सितंबर 1950 को गुजरात के वडनगर में जन्मे मोदी आज 69 साल के हो गए।

इसी तरह 13 या 14 साल की उम्र में उनके द्वारा लिखित और मंचित नाटक ‘पीलू फूल’ की भी यादें हैं। यह नाटक छुआछूत के भेदभाव पर केंद्रित था। बता दें कि गुजराती भाषा में पीलू फूल का मतलब होता है कि पीले फूल।

मोदी पर लिखी किताब की सह-लेखक कालिंदी रणदेरी ने कहा कि अपने एक साक्षात्कार में जब उन्होंने किताब के लिए ग्राउंड रिसर्च के लिए वडनगर का दौरा किया, तो कई लोगों ने इस नाटक को याद करते हुए कहा कि यह एक अच्छा लिखा गया और अच्छे से किया गया प्ले था।

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