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मोदी ने की ‘स्मार्ट’ पुलिसिंग, मज़बूत सूचना तंत्र की हिमायत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘स्मार्ट’ पुलिसिंग की अवधारणा की हिमायत करते हुए आज कहा कि देश के सुरक्षा घटकों का एक महत्वपूर्ण पहलू खुफिया सूचनाएं जुटाना है। उन्होंने कहा कि शहीद पुलिस कर्मियों का सम्मान तथा पुलिस कर्मियों का कल्याण सुनिश्चित किया जाना चाहिए। उन्होंने जोर दे कर कहा कि देश की सुरक्षा हथियारों पर […]
Author November 30, 2014 15:47 pm
पुलिस महानिदेशकों (डीजीपी) के सम्मेलन को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने ये बातें कही। (फोटो:पीटीआई)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘स्मार्ट’ पुलिसिंग की अवधारणा की हिमायत करते हुए आज कहा कि देश के सुरक्षा घटकों का एक महत्वपूर्ण पहलू खुफिया सूचनाएं जुटाना है। उन्होंने कहा कि शहीद पुलिस कर्मियों का सम्मान तथा पुलिस कर्मियों का कल्याण सुनिश्चित किया जाना चाहिए। उन्होंने जोर दे कर कहा कि देश की सुरक्षा हथियारों पर नहीं बल्कि खुफिया सूचनाएं जुटाने पर निर्भर करती है।

चाणक्य को उद्धृत करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा ‘‘देश की सुरक्षा इस बात पर निर्भर नहीं करती कि कितने हथियार हैं और कितने लोग इनका उपयोग कर रहे हैं। देश की सुरक्षा खुफिया सूचनाएं जुटाने पर ज्यादा निर्भर करती है।’’

मोदी ने खुफिया ब्यूरो (आईबी) द्वारा आयोजित पुलिस महानिदेशकों के 49 वें सालाना सम्मेलन में कहा ‘‘अगर खुफिया सूचनाएं जुटाने का तंत्र हथियारों से अधिक मजबूत है तो सशस्त्र लोगों और हथियारों का उपयोग प्राथमिक नहीं होता। सुरक्षा जुटाने का तंत्र सुरक्षा संबंधी जरूरतों का सर्वाधिक महत्वपूर्ण पहलू है। वही देश मजबूत होता है जिसके पास सूचनाएं जुटाने वाला सर्वश्रेष्ठ खुफिया तंत्र है।’’

प्रधानमंत्री ने कहा कि वह ऐसा बल चाहते हैं जो कारगर तरीके से देश की कानून व्यवस्था की देखरेख कर सके। मोदी ने कहा ‘‘स्मार्ट (एसएमएआरटी) पुलिसिंग कहें तो ‘एस’ से मेरा तात्पर्य (स्ट्रिक्ट) कठोर लेकिन संवेदनशील, ‘एम’ से तात्पर्य (मॉर्डन) आधुनिक एवं सचल, ‘ए’ से तात्पर्य (अलर्ट) सतर्क और जवाबदेह, ‘आर’ से तात्पर्य (रिलायबल) विश्वसनीय एवं प्रतिक्रियावादी तथा ‘टी’ से तात्पर्य (टैक्नो सैवी) प्रौद्योगिकी का जानकार और दक्ष है।’’
प्रधानमंत्री ने कहा कि पुलिस बल को बेहतर पुलिसिंग सुनिश्चित करने के लिए इन मूल्यों को समाहित करना चाहिए, जिससे उसे नयी जागरूकता और चेतना लाने में तथा अपनी छवि और कार्य संस्कृति में सुधार लाने में मदद मिलेगी।

उन्होंने आजादी के बाद देश के लिए अपने प्राण न्यौछावर करने वाले 33,000 पुलिस कर्मियों को सम्मानित करने की जरूरत पर भी जोर दिया क्योंकि ‘‘यह छोटी मोटी संख्या नहीं है। उन्होंने देश और नागरिकों की सुरक्षा एवं शांति के लिए बलिदान दिया। इस बात को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए कि उन्होंने दायित्व निर्वाह करते हुए बलिदान दिया।’’

मोदी ने कहा ‘‘सवाल यह नहीं है कि नागरिक इन पुलिस कर्मियों के बलिदान के बारे में जानते हैं। पुलिस खुद नहीं जानती कि ये शहीद कौन हैं।’’
उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित करने के लिए एक प्रोटोकॉल होना चाहिए कि उनके (शहीदों के) पूरे सम्मान के साथ अंतिम संस्कार का जिम्मा बल ले क्योंकि उनकी मौत आम आदमी की सुरक्षा और संरक्षा के लिए दायित्व निर्वहन के दौरान हुई।

प्रधानमंत्री ने कहा ‘‘इसके अलावा, प्रत्येक राज्य में एक पुलिस अकादमी हो जहां नए रंगरूटों को प्रशिक्षण दिया जाए और उनके पाठ्यक्रम में, दायित्व निर्वाह के दौरान मारे गए पुलिस कर्मियों का जीवनवृतांत तथा उनके द्वारा दिखाया गया साहस शामिल किया जाना अनिवार्य होना चाहिए। इससे उन्हें प्रेरणा मिलेगी।’’

मोदी ने कहा ‘‘एक नयी आधिकारिक सरकारी पुस्तक होनी चाहिए जिसमें नयी पीढ़ी के पुलिस कर्मी इन शहीदों, इनके जीवन, इनके बलिदान के बारे में पढ़ सकें और हर साल इसका नया अद्यतन संस्करण लाया जाना चाहिए।’’

उन्होंने कहा कि इन शहीदों के बारे में प्रत्येक राज्य में स्थानीय भाषा तथा राष्ट्रीय भाषा में ई-बुक लाई जानी चाहिए और यह भले ही छोटी पहल लगती हो लेकिन इससे बहुत प्रेरणा मिलेगी।

मोदी ने कहा कि कई राज्य पुलिस विभाग सालाना सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करते हैं, खास कर मुंबई पुलिस-जिसमें फिल्म जगत की हस्तियां भी भाग लेती हैं। उन्होंने उनसे राज्य के, जान गंवाने वाले पुलिस कर्मियों के बलिदान तथा उनके जीवन वृतांत की एक स्मारिका बनाने को कहा। ‘‘वे शारीरिक रूप से हमारे बीच हों या न हों, उन्हें कभी मरना नहीं चाहिए।’’

पुलिस कल्याण पर जोर देते हुए मोदी ने कहा ‘‘एक पुलिसकर्मी का जीवन हमेशा तनाव से भरा होता है क्योंकि वे अपनी जान खतरे में डालते हैं। जब तक हम यह सुनिश्चित नहीं कर लेते कि उनके परिवार में शांति और स्थिरता हो, तब तक वह समाज को अपना ‘पूर्ण’ नहीं दे सकते और अपने दायित्व का समुचित तरीके से निर्वाह नहीं कर सकते।’’

उन्होंने कहा ‘‘यह सरकार की जिम्मेदारी है कि वह उनके लिए खास कर निचले स्तर वालों के लिए चिकित्सकीय जांच, उनके बच्चों की शिक्षा, आवास आदि की व्यवस्था कर उनका जीवन आसान बनाने के उद्देश्य से कल्याणकारी योजनाएं सुनिश्चित करने के लिए एक व्यवस्थित प्रणाली बनाए।’’
मोदी ने कहा ‘‘हमारी प्राथमिकता वैज्ञानिक तरीके से कल्याणकारी योजनाएं मुहैया कराना होनी चाहिए।’’

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