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भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय के अफसर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया सस्पेंड

19 जनवरी को केंद्र सरकार ने वरिष्ठ आईएएस अधिकारी के. नरसिंह को कथित तौर पर कर्तव्य में लापरवाही के चलते ‘‘जनहित’’ में बर्खास्त कर दिया था।

पीएम नरेंद्र मोदी ने नौकरशाह को समन भेजकर उससे भ्रष्टाचार के आरोपों के बारे में सवाल किए थे।

भ्रष्टाचार के आरोप के बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय के एक अफसर को प्रधानमंत्री नरेंद्र ने पद से हटा दिया है और मामले की जांच के लिए जांच कमिटी का गठन किया गया है। हफ्गिंटन पोस्ट के मुताबिक यह नौकरशाह 1985 बैच का आईएएस अफसर है और उससे संपर्क करने की कई कोशिशें नाकाम रहीं। मंत्रालय के एक शीर्ष सूत्र ने हफ्गिंटन पोस्ट को बताया कि पीएम नरेंद्र मोदी ने नौकरशाह को समन भेजकर उससे भ्रष्टाचार के आरोपों के बारे में सवाल किए थे। यह अफसर पुलिस आधुनिकीकरण, आईपीएस अधिकारियों की पोस्टिंग, संघ शासित प्रदेशों के प्रशासन से संबंधित काम में शामिल था। राज्य पुलिस संगठनों के आधुनिकीकरण के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय काफी धनराशि खर्च करता है। हालांकि उस पर भ्रष्टाचार के किस तरह के आरोप लगे हैं, यह तो साफ नहीं हैं और इस पर मंत्रालय के अधिकारियों ने कुछ कहने से भी इनकार कर दिया है।

सरकार ने अधिकारी को पद से हटाकर उसे दो महीने की छुट्टी पर भेजा गया है। इसके अलावा अधिकारी से जांच में सहयोग करने को भी कहा गया है। बता दें कि पहले भी केंद्रीय गृह मंत्रालय के वरिष्ठ नौकरशाह भ्रष्टाचार और गलत कामों में शामिल रहे हैं, जिससे मंत्रालय की बदनामी भी हुई है। एनजीओ को विदेश से मिलने वाले डोनेशन पर नजर रखने वाली सरकार की फॉरेन विंग में तैनात एक अफसर को सस्पेंड कर दिया गया था।

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19 जनवरी को केंद्र सरकार ने वरिष्ठ आईएएस अधिकारी के. नरसिंह को कथित तौर पर कर्तव्य में लापरवाही के चलते ‘‘जनहित’’ में बर्खास्त कर दिया था। नरसिंह 1991 बैच के अरुणाचल प्रदेश, गोवा, मिजोरम और केंद्र शासित (एजीएमयूटी) कैडर के आईएएस अधिकारी थे। आधिकारिक सूत्रों ने बताया था कि उन्हें काम में कथित तौर पर लापरवाही बरतने के लिए बर्खास्त किया गया था और उनके खिलाफ भ्रष्टाचार के भी आरोप थे। उन्होंने कहा कि विभाग की समीक्षा में अधिकारी की सेवा को कथित तौर पर अयोग्य पाया गया था।

वहीं 29 मार्च को केंद्र सरकार ने महाराष्ट्र कैडर के ट्रेनी आईपीएस अफसर सालुंखे दीपक आत्माराम को केंद्र सरकार ने इसलिए बर्खास्त कर दिया था, क्योंकि उनका वजन ज्यादा था। 2010 बैच के आईपीएस अफसर अनिवार्य फिजिकल फिटनेस टेस्ट और बेसिक ट्रेनिंग कोर्स पूरा नहीं कर पाए थे।

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