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Presidential Election 2022: तो इस डर से ममता कर रही है मुर्मू की तरफदारी, BJP ने TMC को बंगाल में ही फंसा दिया?

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शुक्रवार को कोलकाता में कहा कि अगर बीजेपी ने द्रौपदी मुर्मू के नाम की चर्चा उनके साथ की होती, तो वह विचार करतीं।

Mamata banerjee| west bengal| kolkata|
बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (फोटो- पीटीआई)

(Story By Atri Mitra)

राष्ट्रपति पद के चुनाव के लिए एनडीए ने झारखंड की पूर्व राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू को उम्मीदवार बनाया है। वहीं विपक्ष की ओर से संयुक्त रूप से पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा को उम्मीदवार बनाया गया है। पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने यशवंत सिन्हा को उम्मीदवार बनाने के लिए कई बैठकें की थीं, लेकिन अब ममता बनर्जी मान रहीं हैं कि एनडीए संख्या बल के हिसाब से मजबूत स्थिति में है।

ममता बनर्जी ने शुक्रवार को कोलकाता में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि द्रौपदी मुर्मू सर्वसम्मति से उम्मीदवार हो सकती थीं अगर भाजपा ने विपक्षी दलों के साथ उनके नामांकन पर चर्चा की होती। उन्होंने कहा कि मुर्मू के पास महाराष्ट्र के राजनीतिक घटनाक्रम के बाद राष्ट्रपति चुनाव जीतने का एक बेहतर मौका है।

उन्होंने कहा, “अगर हमें पता होता कि एनडीए एक आदिवासी महिला या अल्पसंख्यक समुदाय के सदस्य को मैदान में उतारने की योजना बना रहे हैं, तो हम इसके बारे में सोच सकते थे। आदिवासी समुदायों के लोगों और महिलाओं के लिए हमारे मन में बहुत सम्मान है।” हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि वह विपक्षी दलों के फैसले के साथ जाएंगी।

TMC का आदिवासी वोट बैंक हो सकता प्रभावित: टीएमसी प्रमुख की चौंकाने वाली टिप्पणी, 1855 के संथाल विद्रोह को चिह्नित करने वाले ‘हुल दिवस’ के एक दिन बाद आई। उन्हें शायद डर होगा कि राष्ट्रपति चुनाव में द्रौपदी मुर्मू का विरोध करने पर उनकी पार्टी का आदिवासी वोट बैंक प्रभावित हो सकता है। ‘हुल दिवस’ ​​के अवसर पर, विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी ने राज्य के जंगलमहल क्षेत्र में कई कार्यक्रमों में भाग लिया, जहां आदिवासी आबादी रहती है। सुवेंदु अधिकारी ने इन इलाकों में इस बात पर ज़ोर दिया कि उनकी पार्टी की राष्ट्रपति उम्मीदवार एक आदिवासी महिला है।

संथाली समुदाय से हैं द्रौपदी मुर्मू: बंगाल में ट्राइबल वोटर्स कुल मतदाताओं का 7-8% है। जंगलमहल क्षेत्र के चार संसदीय क्षेत्रों में बांकुरा, पुरुलिया, झारग्राम और पश्चिम मिदनापुर और आठ निर्वाचन क्षेत्र उत्तर बंगाल के जिलों जैसे दार्जिलिंग, कलिम्पोंग, अलीपुरद्वार, जलपाईगुड़ी, कूचबिहार, उत्तर और दक्षिण दिनाजपीर और मालदा में यह लगभग 25% तक बढ़ जाता है। संथाल बंगाल की ट्राइबल पॉपुलेशन का 80 प्रतिशत से अधिक हिस्सा हैं और एनडीए की उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू भी संथाली समुदाय से ताल्लुक रखती हैं।

पश्चिम बंगाल की 240 विधानसभा सीटों में से कुल 66 सीटें अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित हैं। इनमें भी कुल 16 सीटें अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित हैं। 2019 के लोकसभा चुनावों में भले ही बीजेपी ने अच्छा प्रदर्शन किया हो, लेकिन विधानसभा चुनावों में ममता की पार्टी ने झारग्राम और मिदनापुर में भी 13 सीटें जीतकर हुए नुकसान की भरपाई की थी। इस जीत के बाद ममता बनर्जी अब आदिवासी समुदाय को नाराज करने के मूड में नहीं हैं।

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