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राष्ट्रपति चुनाव: यूपीए ने भी उतारा दलित उम्मीदवार, जानिए कौन हैं मीरा कुमार

मीरा कुमार बिहार की बड़ी दलित नेता और भूतपूर्व रक्षा मंत्री जगजीवन राम की बेटी हैं।

राष्ट्रपति चुनाव 2017 में यूपीए की तरफ से उम्मीदवार बनाई गईं मीरा कुमार। (फाइल फोटो)

राष्ट्रपति चुनाव में एनडीए उम्मीदवार रामनाथ कोविंद के खिलाफ यूपीए ने पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार को उम्मीदवार बनाया है। मीरा कुमार भी दलित समुदाय से आती हैं। इस तरह राष्ट्रपति चुनाव दलित बनाम दलित हो गया है। नई दिल्ली में सभी विपक्षी दलों की बैठक में कांग्रेस नेता मीरा कुमार को सर्वसम्मति से उम्मीदवार बनाए जाने का फैसला किया गया। इस बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार, राजद चीफ लालू यादव समेत कई नेता मौजूद थे। मीरा 27 जून को पर्चा भरेंगी। बैठक में शरद पवार ने उनके नाम का प्रस्ताव रखा जबकि मायावती ने उसका समर्थन किया।

मीरा कुमार बड़े दलित नेता और भूतपूर्व रक्षा मंत्री जगजीवन राम की बेटी हैं। वो विदेश सेवा की अधिकारी भी रह चुकी हैं। बिहार के सासाराम से जीतने वालीं मीरा कुमार 15वीं लोकसभा की अध्यक्ष रह चुकी हैं। उन्हें देश की पहली महिला स्पीकर होने का गौरव हासिल है। उनका जन्म बिहार के भोजपुर जिले में हुआ है। मीरा कॉन्वेन्ट एडुकेटेड हैं। उनकी शिक्षा देहरादून, जयपुर और दिल्ली में हुई है। उन्होंने दिल्ली के इंद्रप्रस्थ कॉलेज और मिरांडा हाउस से एमए और एलएलबी किया है। साल 1970 में उनका चयन भारतीय विदेश सेवा के लिए हुआ। इसके बाद उन्होंने कई देशों में अपनी सेवाएं दी। वो यूपीए-1 की मनमोहन सिंह सरकार में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री रह चुकी हैं। वो 8वीं, 11वीं, 12वीं, 14वीं और 15वीं लोकसभा की सदस्य रह चुकी हैं।

मीरा कुमार ने 1985 में पॉलिटिक्स में एंट्री ली थी। उस साल उन्होंने लोकसभा चुनाव में यूपी के बिजनौर सीट से चुनाव जीता था। उनकी जीत बड़ी सुर्खियां बनी थी क्योंकि तब उन्होंने प्रमुख दलित नेता और आज के केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान और बसपा सुप्रीमो मायावती को करारी शिकस्त दी थी। इसके बाद वो 8वीं, 11वीं और 12वीं लोकसभा में दिल्ली के करोलबाग संसदीय सीट से सांसद चुनी गईं। 1999 के लोकस भा चुनाव में उन्हें करोलबाग सीट से हार का सामना करना पड़ा था। इसके बाद उन्होंने अपने पिता की पारंपरिक सीट बिहार के सासाराम की ओर रुख किया, जहां से उन्होंने साल 2004 और 2009 का लोकसभा चुनाव जीता। हालांकि, 2014 के चुनाव में उन्हें वहां से भी हार का सामना करना पड़ा। उन्हें भाजपा के छेदी पासवान ने 63 हजार से ज्यादा वोटों से हराया।

नए राष्ट्रपति के नाम पर विपक्षी दल एकमत बनाने के लिए लामबंद होते दिख रहे हैं। इधर, केंद्र सरकार भी अपनी पार्टी और सहयोगियों में नए राष्ट्रपति के चुनाव के लिए सलाह-मशविरा कर रही है। चुनाव के लिए कुछ ऐसा नज़र आ रहा है वोटों का गणित।

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