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Teachers’ Day: राष्ट्रपति से पुरस्कृत होने आ रहीं प्रिंसिपल ट्रेन में लुटीं

शिक्षक दिवस पर राष्ट्रपति पदक लेने दिल्ली आ रहीं एक स्कूल प्रिंसिपल को एक्सप्रेस ट्रेन में कथित तौर पर उन्हें बेहोश कर उनसे लूटपाट की गई। वारदात मथुरा के पास हुई।
Author नई दिल्ली | September 4, 2015 09:39 am
मूलचंद अस्पताल के आइसीयू में रेखा सक्सेना।

शिक्षक दिवस पर राष्ट्रपति पदक लेने दिल्ली आ रहीं एक स्कूल प्रिंसिपल को एक्सप्रेस ट्रेन में कथित तौर पर उन्हें बेहोश कर उनसे लूटपाट की गई। वारदात मथुरा के पास हुई।

ग्वालियर के केंद्रीय विद्यालय की प्रिंसिपल रेखा सक्सेना (58) अपने भाई सुरेंद्र सक्सेना के साथ समता एक्सप्रेस से दिल्ली आ रही थीं। पुलिस उपायुक्त (रेलवे) दुम्बरे मिलिंद महादेव ने घटना की पुष्टि की है। अधिकारी ने बताया कि दिल्ली के हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन पर बुधवार शाम करीब 6:30 बजे पुलिस ने सुरेंद्र सक्सेना की शिकायत के आधार पर एक प्राथमिकी दर्ज की। महादेव ने कहा कि हमने मामले को मथुरा की रेलवे पुलिस के पास भेज दिया है। पीड़ितों का आरोप है कि उन्हें बेहोश कर उनके पर्स में रखे 50 हजार रुपए और घड़ी लूट लिए। बुधवार को ही पीड़ितों को मूलचंद अस्पताल ले जाया गया क्योंकि रेखा सक्सेना बेसुध थीं और उनके भाई भी सुस्ती महसूस कर रहे थे।

मूलचंद के डॉक्टरों ने बताया कि अस्पताल लाए जाने के बाद रेखा सक्सेना को आइसीयू में रखा गया, जिसके बाद उन्हें इमरजेंसी वार्ड में भेजा गया। उनके भाई की हालत स्थिर है। अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड के डॉक्टर हरमीत सिंह ने कहा कि हम अभी तक उस रसायन का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं जिससे पीड़ितों को बेहोश किया गया था।

सुरेंद्र सक्सेना ने बताया कि ट्रेन में उनकी सीट के बगल में बैठे तीन लोगों से उनकी दोस्ताना बातचीत हुई थी। उन तीनों की उम्र 30 साल के लगभग थी और उन्होंने बताया था कि वे नागपुर से लौट रहे थे, जहां उनका कारोबार चौपट हो गया था। हम भाई-बहन नीचे की बर्थ पर थे।

कुछ समय बाद वे तीनों हमारे ऊपर की बर्थ पर चले गए। सक्सेना ने कहा, ‘ढाई बजे के लगभग हम दोपहर का खाना खाने लगे, और उन तीनों को अपने पास रखी चटनी खाने को दी। चटनी का थोड़ा हिस्सा लेकर उन्होंने लौटा दिया जिसे मेरी बहन ने खाया। लगता है कि उन्होंने चटनी में कुछ मिला दिया था क्योंकि उसके खाने के बाद ही मेरी बहन को सुस्ती आने लगी थी।

सक्सेना ने बताया कि खाने के बाद वे तीनों उन पर चाय पीने का दबाव बनाने लगे। चार बजे जब ट्रेन मथुरा से चली तो वे मेरे लिए एक कप चाय लेकर आए। मैंने उसे नहीं पिया और नीचे रख दिया। सक्सेना ने कहा कि इसके बाद उन्हें निजामुद्दीन स्टेशन पर सफाईकर्मियों ने जगाया। सक्सेना ने दावा किया, ‘उन तीनों ने मेरे ऊपर कोई रसायन छिड़का था। मैंने अपनी बहन को जगाने की कोशिश की लेकिन वह बेसुध थी। मैंने उसके चेहरे पर पानी भी छिड़का लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। फिर मैंने एक कुली की मदद से पुलिस को वारदात की सूचना दी’।

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