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उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए राष्ट्रपति ने दिए रामनाथ गोयनका पुरस्कार, कहा- फर्जी खबरें बनीं नया खतरा

राष्ट्रपति ने कहा कि ‘ब्रेकिंग न्यूज सिंड्रोम’ के शोरशराबे में संयम और जिम्मेदारी के मूलभूत सिद्धांत की अनदेखी की जा रही है।

Author नई दिल्ली | Updated: February 6, 2020 2:56 PM
नई दिल्ली में सोमवार को उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए रामनाथ गोयनका पुरस्कार समारोह के मौके पर विजेताओं के साथ एक्सप्रेस समूह के चेयरमैन विवेक गोयनका (बाएं से दूसरे), राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और एक्सप्रेस समूह के कार्यकारी निदेशक अनंत गोयनका (दाएं से दूसरे)।

RNG Awards: ब्रेकिंग न्यूज सिंड्रोम’ के शोरशराबे के मीडिया को अपनी गिरफ्त में लेने की बात करते हुए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने सोमवार को कहा कि फर्जी खबरें नए खतरे के रूप में सामने आई हैं, जिसका प्रसार करने वाले खुद को पत्रकार के रूप में पेश करते हैं और इस महान पेशे को कलंकित करते हैं। वे यहां उकृष्ट पत्रकरिता के लिए रामनाथ गोयनका पुरस्कार समारोह को संबोधित कर रहे थे।

राष्ट्रपति ने कहा कि ‘ब्रेकिंग न्यूज सिंड्रोम’ के शोरशराबे में संयम और जिम्मेदारी के मूलभूत सिद्धांत की अनदेखी की जा रही है। उन्होंने कहा कि पुराने लोग ‘फाइव डब्लू एंड एच’ व्हाट (क्या), व्हेन (कब), व्हाई (क्यों), व्हेयर(कहां), हू (कौन) और हाउ (कैसे)) के मूलभूत सिद्धांतों को याद रखते थे, जिनका जवाब देना किसी सूचना के खबर की परिभाषा में आने के लिए अनिवार्य था।

उन्होंने कहा, ‘फर्जी खबरें नए खतरे के रूप में उभरी हैं, जिनका प्रसार करने वाले खुद को पत्रकार के तौर पर पेश करते हैं और इस महान पेशे को कलंकित करते हैं।’

राष्ट्रपति ने कहा कि पत्रकारों को अपने कर्तव्य के निर्वहन के दौरान कई भूमिकाएं निभानी पड़ती हैं। लेकिन इन दिनों वे अक्सर जांचकर्ता, अभियोजक और न्यायाधीश की भूमिका निभाने लगते हैं।

कोविंद ने कहा कि सच तक पहुंचने के लिए एक समय में कई भूमिकाएं निभाने की खातिर पत्रकारों को काफी आंतरिक शक्ति और अविश्वसनीय जुनून की आवश्यकता होती है।

राष्ट्रपति ने कहा, ‘उनकी बहुमुखी प्रतिभा प्रशंसनीय है। लेकिन वह मुझे यह पूछने के लिए प्रेरित करता है कि क्या इस तरह की व्यापक शक्ति के इस्तेमाल के साथ वास्तविक जवाबदेही होती है?’

उन्होंने कहा कि सामाजिक और आर्थिक असमानताओं को उजागर करने वाली खबरों की अनदेखी की जाती है और उनका स्थान तुच्छ बातों ने ले लिया है। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक सोच को प्रोत्साहित करने में मदद के बजाय कुछ पत्रकार रेटिंग पाने और ध्यान खींचने के लिए अतार्किक तरीके से काम करते हैं।

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