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राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने कहा: मानवता, बहुलवाद को किसी हालत में छोड़ना नहीं चाहिए

असहिष्णुता की बढ़ती आंधी के बीच राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने सोमवार को इस बात की गंभीर आशंका जताई कि क्या देश में सहिष्णुता और असंतोष को स्वीकार करने की प्रवृत्ति समाप्त हो रही है।

Author सूरी (पश्चिम बंगाल) | October 20, 2015 9:12 AM
सहिष्णुता और असंतोष को स्वीकार करने की प्रवृत्ति क्या खत्म हो रही है? : राष्ट्रपति ने पूछा (फोटो: भाषा)

असहिष्णुता की बढ़ती आंधी के बीच राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने सोमवार को इस बात की गंभीर आशंका जताई कि क्या देश में सहिष्णुता और असंतोष को स्वीकार करने की प्रवृत्ति समाप्त हो रही है।

मुखर्जी ने कहा कि मानवता और बहुलवाद को किसी हालत में छोड़ा नहीं जाना चाहिए। अपनाना और आत्मसात करना भारतीय समाज की विशेषता है। हमारी सामूहिक क्षमता का उपयोग समाज में बुरी ताकतों के खिलाफ संघर्ष में किया जाना चाहिए।

यहां के एक स्थानीय साप्ताहिक अखबार नया प्रजंमा द्वारा आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने आशंका जताई कि क्या सहिष्णुता और असंतोष को स्वीकार करने की क्षमता समाप्त हो रही है।

मुखर्जी ने बताया कि हाल ही में वह जार्डन, फलस्तीन और इस्राइल की यात्रा पर गए। पश्चिम एशिया जहां हर कोई जानता है कि अशांति है।

उन्होंने कहा कि मुझे जिस बात से हैरानी हुई वह यह थी कि तीनों देशों के नेताओं और इन देशों के तीन विश्वविद्यालयों के छात्रों और शिक्षकों ने मुझसे एक ही सवाल पूछा कि भारत में इतने मजबूत राष्ट्रवाद के पीछे का मंत्र क्या है, जहां धर्म, जाति, भाषा और इसी तरह की कई विविधताएं हैं।

राष्ट्रपति ने कहा कि इस बात को लेकर निश्चित नहीं हूं कि उन लोगों ने ऐसा सवाल क्यों पूछा। शायद चल रही अशांति के कारण उन्होंने ऐसा किया। उन्होंने कहा कि इस देश की राष्ट्रीय अखंडता का आधार सहिष्णुता है।

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