व‍िपक्षी एकता की न‍िकली हवा, नीतीश कुमार ने दिया एनडीए उम्मीदवार को समर्थन, रामनाथ कोविंद का राष्‍ट्रपति बनना लगभग पक्‍का - Opposition Could not Stand Unite Against Narendra Modi Candidate, JDU supported BJP, Ram Nath Kovind is most likely to win President Election - Jansatta
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व‍िपक्षी एकता की न‍िकली हवा, नीतीश कुमार ने दिया एनडीए उम्मीदवार को समर्थन, रामनाथ कोविंद का राष्‍ट्रपति बनना लगभग पक्‍का

राष्ट्रपति चुनाव 17 जुलाई को होगा। चुनाव परिणाम 20 जुलाई को आएगा।

रामनाथ कोविंद भारत के 14वें राष्ट्रपति बन गए हैं। उन्होंने यूपीए की उम्मीदवार मीरा कुमार को हराकर यह चुनाव जीता है। (Source: AP Photo)

भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) द्वारा रामनाथ कोविंद को राष्ट्रपति उम्मीदवार बनाए जाने के बाद विपक्ष की एकता टूट गई है। नीतीश कुमार की पार्टी जदयू ने राष्ट्रपति चुनाव के लिए बीजेपी नीत गठबंधन एनडीए के उम्मीदवार रामनाथ कोविंद को समर्थन देने की घोषणा की है। जद (यू) विधायक रत्नेश सदा ने बुधवार को पटना में संवाददाताओं से कहा कि जद (यू) राष्ट्रपति चुनाव में रामनाथ कोविंद का समर्थन करेगा। उन्होंने दावा किया कि पार्टी के अध्यक्ष नीतीश कुमार ने भी अपनी मंशा पूर्व में ही जाहिर कर दी थी। जद (यू) के सोनबरसा से विधायक सदा ने कहा, “बिहार का कोई राज्यपाल पहली बार राष्ट्रपति बनने जा रहा है। ऐसे में यह हमारे लिए गर्व की बात है और हम रामनाथ कोविंद के साथ हैं।” तेलंगाना राष्ट्रीय समिति (टीआरएस) नेता और तेलंगाना के सीएम के चंद्रशेखर राव ने सोमवार (19 जून) को ही कोविंद को अपना समर्थन दे दिया था। नवीन पटनायक की बीजद भी कोविंद को समर्थन दे चुकी है। ऐसे में रामनाथ कोविंद का राष्ट्रपति बनना अब लगभग तय हो चुका है।

बसपा प्रमुख मायावती ने भी कहा है कि विपक्ष ने अगर दलित उम्मीदवार नहीं उतारता तो वो कोविंद को समर्थन देने को लेकर सकारात्मक हैं। दूसरी तरफ कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्ष एक ऐसा उम्मीदवार तलाश रहा है जो रामनाथ कोविंद को टक्कर दे सके। विपक्ष की कोशिशो को केवल चेहरा बचाने की कवायद के तौर पर देखा जा रहा है क्योंकि टीआरए, बीजद और जदयू के समर्थन के बाद आंकड़ों बीजेपी के पक्ष में झुक गए हैं। आइए हम आपको बताते हैं कि राष्ट्रपति चुनाव में गेंद किस तरह बीजेपी के पाले में जा चुकी है।

राष्ट्रपति चुनाव सामान्य चुनाव की तरह सीधे मतदान से नहीं होता। राष्ट्रपति चुनाव इलेक्टोरल कॉलेज के तहत होता है जिसमें सभी सांसदों और विधायकों के वोटों का प्रतिनिधिक मूल्य होता है। राष्ट्रपति चुनाव में नामित सांसदों का वोट नहीं शामिल होता है। राष्ट्रपति चुनाव में कुल 4120 विधायकों और  776 सांसदों का वोट शामिल होगा। हर सांसद के वोट का मूल्य 708 है, जबकि विधायक के वोट का मूल्य संबंधित राज्य की जनसंख्या के आधार पर तय होता है। जिस राज्य की ज्यादा जनसंख्या होती है वहां के विधायकों के वोट का मूल्य ज्यादा होता है। कुल 100 प्रतिशत वोटों में से चुनाव जीतने के लिए किसी भी प्रत्याशी को 51 प्रतिशत वोट पाने होते हैं।

बीजेपी के पास 1352 विधायकों और 337 सांसद हैं जिनका वोट कुल वोटों का करीब 40.03 प्रतिशत है। शिव सेना जिसने मंगलवार (20 जून) को बीजेपी प्रत्याशी को समर्थन देने की घोषणा की उसके पास 63 विधायक और 21 सांसद हैं जिनका वोट प्रतिशत 2.34 है। बीजेपी के अन्य दलों का वोट मिलाकर एनडीए के पास कुल 48.64 प्रतिशत वोट है। यानी बीजेपी को कोविंद को जिताने के लिए करीब ढाई प्रतिशत वोट ही और चाहिए। वहीं यूपीए के पास करीब 35.47 फीसदी वोट शेयर हैं।

टीआरएस के पास 82 विधायक और 14 सांसद हैं जिनका कुल वोट प्रतिशत 1.99 है। नवीन पटनायक की बीजद ने भी कोविंद की उम्मीदवारी का समर्थन किया है। बीजद के पास 117 विधायक और 28 सांसद हैं और उसका कुल वोट प्रतिशत 2.98 है। जदयू  के पास 73 विधायक और 12 सांसद हैं और उसका कुल वोट प्रतिशत 1.89 है। यानी एनडीए उम्मीदवार को टीआरएस, बीजद और जदयू के समर्थन से ही जीत मिल जाएगी।

बीजद, टीआरएस और जदयू के समर्थन के बाद बीजेपी को कांग्रेस नीत गठबंधन यूपीए में नहीं शामिल कुछ छोटे दलों का समर्थन भी मिल सकता है। आइए एक नजर डालते हैं उन दलों पर जो बीजेपी का साथ दे सकते हैं। एआईएडीएमके के पास 139 विधायक और 50 सांसद हैं और उसका कुल वोट प्रतिशत 5.36 है। वाईएसआरसीपी के पास 66 विधायक और 10 सांसद हैं और उसका कुल वोट प्रतिशत 1.53 है। बसपा के पास 19 विधायक और छह सांसद हैं और उसका कुल वोट प्रतिशत 0.74 है। अगर इन दलों का भी साथ बीजेपी को मिल जाता है तो उसके पास 60 प्रतिशत से ज्यादा वोट होंगे और उसका प्रत्याशी सम्मानजनक अंतर से जीतेगा।

राष्ट्रपति चुनाव 2017 बेहद करीब है। चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों में सुगबुगाहट तेज हो गई है। नए राष्ट्रपति के नाम को लेकर सभी बैठकें और विचार-विमर्श में जुटे हैं। तो आइए जानते हैं कि इस बार के चुनाव में दिख सकती है कुछ इस तरह की तस्वीर। राष्ट्रपति चुनाव की बात सुनने और देखने में जितनी आसान लगती है, असल में यह उतनी ही टेढ़ी खीर है। देश की सबसे ताकतवर कुर्सी के लिए जनता मतदान नहीं करती। जी हां, राष्ट्रपति को सीधे तौर पर लोग खुद नहीं चुन सकते। राष्ट्रपति चुनाव की प्रक्रिया में विधायक और सांसद वोट देते हैं। ऐसे गिने जाते हैं उनके मत। नए राष्ट्रपति के नाम पर विपक्षी दल एकमत बनाने के लिए लामबंद होते दिख रहे हैं। इधर, केंद्र सरकार भी अपनी पार्टी और सहयोगियों में नए राष्ट्रपति के चुनाव के लिए सलाह-मशविरा कर रही है। चुनाव के लिए कुछ ऐसा नज़र आ रहा है वोटों का गणित।

वीडियो- बिहार के राज्यपाल रामनाथ कोविंद को बनाया बीजेपी ने राष्ट्रपति उम्मीदवार

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