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ट्रैक्टर के साथ महिलाएं संभालेंगी किसान आंदोलन की बागडोर

कृषि कानूनों के विरोध में ट्रैक्टर के साथ-साथ आंदोलन की बागडोर भी महिलाएं संभालेंगी। दरअसल 26 जनवरी की प्रस्तावित ‘किसान गणतंत्र परेड’ में महिलाएं भी शिरकत करेंगी। रिंग रोड पर उतरने वाले किसानों के हुजूम में हर चौथा किसान महिला होगी।

Author नई दिल्‍ली | Updated: January 21, 2021 9:22 AM
farmersअपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन करते किसान। फाइल फोटो।

दस लाख से ज्यादा की भीड़ जुट जाने का दावा करने वाले किसान संगठनों का कहना है कि कम से कम एक चौथाई महिलाएं परेड में हिस्सा लेंगी। एक हजार से ज्यादा महलिाएं ट्रैक्टर की स्टेरिंग संभाले विभिन्न मार्गों पर किसान गणतंत्र परेड में शामिल होने को तैयार हैं।

शाहजहां और सिंघू बॉर्डर पर चल रही तैयारियां यह बता रही हैं कि परेड में शामिल महिलाएं ट्रैक्टर के साथ अपने राज्यों के कृषि हालात की जानकारी को भी सड़क पर उतारेंगी। परेड में महाराष्ट्र, राजस्थान, पंजाब, हरयिाणा, उत्तर प्रदेश से आने वाली महिला किसानों का अलग-अलग दस्ता कूच करता नजर आएगा। कमोवेश वैसे ही जैसा राजपथ पर झाकियां निलकती हैं।

महाराष्ट्र की महिलाएं महाराष्ट्र की खेती-बाड़ी संस्कृति की तो राजस्थान की महिलाएं राजस्थान की खेती-बाड़ी की मौजूदा स्थिति का प्रदर्शन करेंगी। हरियाणा-पंजाब का महिला किसान जत्था बताएगा कि वहां की आधी आबादी किस तरह घर के कामों के साथ-साथ खलिहानों में भी बराबर की हिस्सेदारी निभाता है।

आदिवासी खेतीहर महिलाओं की टोली यह बताएगी कि खेती केवल प्रचलित अनाजों की ही नहीं होती, बल्कि जड़ी-बूटी व कई दुर्लभ चीजों की भी होती है। इतना ही नहीं, देश प्रदेश के लिए मेडल जीतने वाली किसानों की बेटियां भी इस परेड का हिस्सा बनेंगी। ट्रैक्टर चलाती अपनी माताओं के संग मेडल जोड़ चुकी हरियाणा-पंजाब की बेटियां यह बताएंगी कि खेती है तो उनका परिवार है और परिवार है तो वो हंै।

परेड से बाहरी रिंग रोड की परिक्रमा की जाएगी। परेड शांति पूर्ण रहेगी। गणतंत्र दिवस की परेड में कोई विघ्न नहीं डाला जाएगा। हर वाहन पर राष्ट्रीय झंडा व किसान संगठन का झंडा होगा। राजनैतिक झंडे पर पूर्ण मनाही होगी। किसान संगठनों ने कहा कि हम दिल्ली की जनता को भी किसान परेड देखने के लिए आमंत्रित करते हैं। परेड में शहीद किसान परिवार की झांकी और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी होंगे।

शाहजहांपुर बॉर्डर पर जमी महाराष्ट्र की किसान नेता प्रतिभा शिंदे ने ‘जनसत्ता’ को बताया कि हम नई तस्वीर उकेरने को तैयार हैं। महिलाओं का जुड़ने का सिलसिला शुरू हो चुका है। यूथ फॉर स्वराज की नेता अमनप्रीत कौर ने कहा-हरियाणा की महिलाएं सौ साल पहले से खलिहान में पुरुषों के साथ बराबरी की हिस्सेदारी निभाती आई हंै। उनका तो ट्रैक्टर चलाना आम बात है।

यहां खास ये है कि वो ट्रैक्टर के साथ आंदोलन की बागडोर भी संभालेंगी। प्रत्येक जिले से इसके लिए हजारों ट्रैक्टरों को लाने की तैयारी की जा रही है और यह किसी भी देश की चुनी हुई सरकार के विरुद्ध उसके किसानों और खासकर महिला किसानों का यह अब तक का सबसे बड़ा विरोध प्रदर्शन होगा।

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