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लोकसभा चुनाव की अभी से तैयारी, लखनऊ के बजाय पांच दिन जनता के बीच रहेंगे मंत्री

डेढ़ साल बाद होने वाले लोकसभा चुनाव में अपने गढ़ उत्तर प्रदेश को बचाए रखने के लिए ये रणनीति अपनाई गई है।

Yogi Adityanath
यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ (सोर्स- पीटीआई)

अपनी सरकार के दूसरे कार्यकाल में योगी आदित्यनाथ ने सरकार से जुड़े हर एक नुमाइंदे को जनता से सीधे जोड़ने की कवायद शुरू कर दी है। योगी ने अपने सभी मंत्रियों को निर्देश दिए हैं कि वे पांच दिन अपने क्षेत्र में रहें और जनता की हर एक समस्या का समाधान करें। योगी ने अपने मंत्रियों को सिर्फ दो दिन लखनऊ में रहने को कहा है।

डेढ़ साल बाद होने वाले लोकसभा चुनाव में अपने गढ़ उत्तर प्रदेश को बचाए रखने के लिए ये रणनीति अपनाई गई है। यही वजह है कि स्वास्थ्य मंत्री बृजेश पाठक, परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह समेत लगभग सभी मंत्री जगह-जगह औचक निरीक्षण कर अपने विभागों को पटरी पर लाने में जुट गए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य को आगरा, ब्रजेश पाठक को वारणसी, सूर्य प्रताप शाही को मेरठ, स्वतंत्र देव सिंह मुरादाबाद, बेबीरानी मौर्य को झांसी, धर्मपाल सिंह को गोरखपुर, नंदगोपाल गुप्ता नंदी को बरेली, भूपेंद्र चौधरी को मिजार्पुर, अनिल राजभर को प्रयागराज, जितिन प्रसाद को कानपुर, अरविंद शर्मा को अयोध्या, योगेश उपाध्याय को सहारनपुर, संजय निषाद को आजमगढ़, आशीष पटेल को बस्ती, जयवीर सिंह को चित्रकूट, सुरेश खन्ना को लखनऊ, लक्ष्मी नारायण चौधरी को अलीगढ़ और राकेश सचान को देवीपाटन मंडल की जिम्मेदारी सौंपी है।

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए हैं कि मंत्री सोमवार और मंगलवार को लखनऊ में और शुक्रवार से रविवार तक अपने निर्वाचन क्षेत्र या प्रभार वाले मंडल में रहें। इतना ही नहीं, उन्होंने अपने मंत्रिमंडल के सभी सहयोगियों को निर्देश दिए हैं कि वे तीन महीने में अपनी संपत्ति का ब्योरा सार्वजनिक करें। अधिकारियों को भी मुख्यमंत्री ने ऐसा करने को कहा है।

अफसर पोर्टल पर अपनी संपत्ति का ब्योरा दें। मंत्री सोम और मंगल लखनऊ में, शुक्र से रविवार अपने निर्वाचन क्षेत्र या प्रभार वाले मंडल में रहें। मंत्रियों को मंडल आवंटित किए गए। हाल ही में मंत्री संजय निषाद के पुत्र प्रवीण निषाद के सरकारी कामों में दखलंदाजी के मामले के सामने आने के बाद योगी ने अपने मंत्रियों को सख्ती से कहा है कि सरकारी काम में उनके पारिवारिक सदस्यों का कोई हस्तक्षेप नहीं हो।

दूसरे कार्यकाल में सक्रियता क्यों?

आखिर अपने दूसरे कार्यकाल में शुरू से ही योगी आदित्यनाथ ने अपनी सरकार को इतना सक्रिय क्यों कर रखा है? इसकी वजह है…मार्च में हुए उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी और उसके सहयोगियों का मिली 273 सीटों के आने की विस्तृत रिपोर्ट पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा को भेजी है। रिपोर्ट में दावा किया गया कि पश्चिमी यूपी में सपा और रालोद गठबंधन ज्यादा सफल साबित नहीं हुआ।

सपा ने रालोद के भरोसे जिस जाट समीकरणों पर दांव लगाया था, वह फेल हो गया। पश्चिमी यूपी में किसान आंदोलन के असर वाले जिन 30 सीटों पर रालोद चुनाव लड़ी थी, वह केवल आठ सीटों पर ही सिमट गई। वहीं, बहुजन समाज पार्टी की उम्मीदवारी से भी भाजपा को सहारा मिला और उसे कई सीटों पर सफलता बसपा के प्रत्याशियों के खड़े होने से ही मिल गई।

122 सीटों पर बसपा ने सपा का खेल बिगाड़ा। बेहद गोपनीय इस रिपोर्ट में कहा गया है कि 122 सीटों पर बसपा ने ऐसे उम्मीदवार खड़े किए थे, जो सपा के उम्मीदवार की ही जाति के थे। इससे इन 122 सीटों पर भाजपा के उम्मीदवारों को मदद मिली। इनमें जिन 91 सीटों पर सपा ने मुस्लिम उम्मीदवार उतारे थे, उसी सीट पर बसपा ने भी मुस्लिम प्रत्याशी उतार दिए।

वहीं 15 सीटों पर सपा के यादव उम्मीदवारों के सामने बसपा ने भी यादव प्रत्याशी उतारे। इसका सीधा फायदा भाजपा को मिला और 122 सीटों में भाजपा गठबंधन को 68 सीटों पर जीत हासिल हुई। पश्चिम यूपी में पहले चरण के चुनाव उन जिलों में हुए जहां किसान आंदोलन का असर सबसे ज्यादा था, वहां अपेक्षाकृत परिणाम बेहतर रहा।

भाजपा को 2017 में जीते 214 विधायकों पर भरोसा जताने का भी फायदा मिला। पहले जहां पार्टी ने विधायकों के प्रति सत्ता विरोधी रूझान की रिपोर्ट मिलने के बाद उनके ज्यादा से ज्यादा टिकट काटने की योजना बनाई थी, वहीं उसे खारिज करते हुए 214 मौजूदा विधायकों पर ही दांव लगाने की रणनीति का फायदा भी पार्टी को मिला। 2017 में चुनाव जीतकर आए 214 विधायकों को भाजपा ने 2022 में भी चुनाव मैदान में उतारा, उनमें से 170 जीते। यानी करीब 79 फीसदी सीटें भाजपा की झोली में आईं।

वहीं जिन सीटों 104 सीटों पर प्रत्याशी बदले गए, उनमें भी 80 पर भाजपा को जीत हासिल हुई। यानी 77 फीसदी सीटें भाजपा गठबंधन को मिल गईं। यूपी वुनाव में सबसे खास बात यह रही कि भाजपा केवल चार सीटों पर ही 500 से कम वोटों से हारी। नजदीकी मुकाबलों में भाजपा उम्मीदवारों को जीत मिली। सात ऐसी सीटें रहीं, जहां भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवारों ने 500 से कम वोटों के अंतर से जीत दर्ज करने में सफलता हासिल की।

विधानसभा चुनाव के परिणाम आने के बाद उसकी समीक्षा में भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने यह रणनीति बनाई है कि मंत्री अधिकांश समय अपने प्रभार वाले क्षेत्र और अपने विधानसभा चुनाव में बिताएं, ताकि जनता क शिकायतों को उन्हीं के शहर में निपटाया जा सके। इससे लोकसभा चुनाव में पार्टी इसका लाभ उठा सके। भाजपा के विधान परिषद सदस्य विजय बहादुर पाठक कहते हैं, हम अब खुद को और मजबूत करने में जुटे हैं। ऐसा तब ही संभव है जब प्रदेश की जनता के भरोसे पर योगी आदित्यनाथ की सरकार पूरी तरह खरी उतरे। विधानसभा चुनाव में मिले पूर्ण बहुमत को लोकसभा चुनाव में भी करिश्माई बनाने के लिए योगी सरकार जुटी है।

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