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पेट्रोल सौ पार, तीन डिजिट के दाम मशीनों में डिस्प्ले नहीं होने से बिक्री रुकी

अगर सादा पेट्रोल के दाम भी 100 रुपए लीटर तक पहुंच गए तो कई पेट्रोल पंपों को बिक्री रोकनी पड़ेगी।

national news india newsतस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीकात्मक रूप से किया गया है। (Express Photograph by Tashi Tobgyal)

देश में आसमान छूती पेट्रोल-डीजल की कीमतों के बीच मध्य प्रदेश में तेल के दाम 100 रुपए के पार पहुंच गए। शनिवार को राजधानी भोपाल में पावर पेट्रोल 100 रुपए चार पैसे प्रति लीटर की दर पर से बेचा गया। यहां पुराने पेट्रोल पंपों को बिक्री रोकनी पड़ी क्योंकि दाम तीन डिजिट में पहुंचे तो मशीनों में डिस्प्ले होने बंद हो गए। स्थानीय खबरों के अनुसार अगर सादा पेट्रोल के दाम भी 100 रुपए लीटर तक पहुंच गए तो कई पेट्रोल पंपों को बिक्री रोकनी पड़ेगी। शनिवार को भोपाल में सादा पेट्रोल की कीमत 96.37 रुपए रही।

मालूम हो कि नए साल के बाद से राजधानी में तेल की कीमतों में करीब पांच रुपए की बढ़ोतरी हुई है। एक जनवरी को भोपाल में नॉर्मल तेल 91.46 रुपए प्रति लीटर था। आंकड़ों पर गौर कर करें तो एक साल से भी कम वक्त में पेट्रोल की कीमत करीब 19 रुपए प्रति लीटर बढ़ गई है। एक जून, 2020 को भोपाल में पेट्रोल 77.56 रुपए प्रति लीटर था जो 13 फरवरी तक 18.81 रुपए बढ़कर 96.37 के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। इसी तरह डीजल के दाम एक जून, 2020 को 68.27 रुपए थे जो 13 फरवरी तक 18.54 रुपए बढ़कर 86.84 प्रति लीटर पर पहुंच गए।

बता दें कि देश में तेल कीमतों में बढ़ोतरी का सिलसिला जारी है। रविवार को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में एक बार फिर तेल के दाम बढ़ गए। यहां पेट्रोल और डीजल के दाम में करीब तीस पैसे की बढ़ोतरी हुई है। रविवार को दिल्ली में पेट्रोल के दाम 29 पैसे बढ़कर 88.73 रुपए हो गए। इसी तरह 32 पैसे की बढ़ोतरी के साथ डीजल के दाम 79.06 प्रति लीटर पर पहुंच गए।

इधर तेल मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने तेल उत्पादक देशों को कीमतों में बढ़ोतरी का दोषी ठहराया। उन्होंने कहा कि कच्चा तेल महंगा होने के साथ ही ‘हम कीमतों को लेकर चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।’ उन्होंने कहा कि कोविड-19 लॉकडाउन के कारण दुनिया भर में पेट्रोलियम उत्पादों की मांग में कमी आई और पेट्रोलियम उत्पादकों को उत्पादन में कमी करनी पड़ी।

उन्होंने आगे कहा, ‘अब अर्थव्यवस्था फिर से उठ खड़ी हुई है और भारत लगभग कोविड-19 से पहले की स्थिति में लौट आया है। हालांकि तेल उत्पादकों ने उत्पादन नहीं बढ़ाया है।’ उन्होंने पत्रकारों से कहा, ‘मुझे यह कहते हुए खेद है कि तेल उत्पादक देश उपभोक्ता देशों के हितों के बारे में नहीं सोच रहे हैं। उन्होंने कृत्रिम मूल्य तंत्र का निर्माण किया है। इससे उपभोक्ता देशों को परेशानी हो रही है।’

मंत्री ने कहा कि हालांकि तेल उत्पादक देशों ने उत्पादन बढ़ाने के बारे में कुछ सकारात्मक बातें कही हैं। गौरतलब पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतें अब तक के सर्वकालिक उच्च स्तर पर हैं और ईंधन की बढ़ती कीमतों पर विपक्षी दल सरकार पर हमलावर हैं। (इनपुट सहित)

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