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प्रशांत किशोर ने बताया कि क्यों ठुकराया बीजेपी का ऑफर और जदयू में आते ही मिला बड़ा पद

प्रशांत किशोर ने कहा कि कहा कि 'जेडीयू ज्वाइन करने का दूसरा कारण ये है कि जेडीयू एक छोटी पार्टी है और विचारधारा का इस पर बहुत ज्यादा बोझ नहीं है और यह पार्टी एक क्लीन स्लेट की तरह है।'

prashant kishoreसीएम नीतीश कुमार के साथ प्रशांत किशोर (PTI Photo)

साल 2014 के लोकसभा चुनावों में नरेंद्र मोदी की शानदार जीत के पीछे मशहूर राजनैतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर का बहुत बड़ा हाथ था। प्रशांत किशोर पीएम मोदी के करीबी भी माने जाते थे। हालांकि जब प्रशांत किशोर ने राजनीति की मुख्यधारा में प्रवेश करने का फैसला किया तो उन्होंने भाजपा के बजाए जेडीयू को चुना। इंडियन एक्सप्रेस के ‘आइडिया एक्सचेंज’ कार्यक्रम के दौरान बातचीत में प्रशांत किशोर ने इस बात का खुलासा किया कि क्यों उन्होंने भाजपा पर जेडीयू को तरजीह क्यों दी? बता दें कि प्रशांत किशोर के जब राजनीति में आने की चर्चा हुई थी, तब माना जा रहा था कि वह भाजपा के साथ अपनी राजनैतिक पारी शुरु कर सकते हैं। पत्रकार मनोज सी.जी के इस सवाल के जवाब में प्रशांत किशोर ने बताया कि ‘वह बिहार में काम करना चाहते थे और साथ ही वह नीतीश कुमार के प्रशंसक हैं।’

जेडीयू उपाध्यक्ष ने कहा कि ‘नीतीश कुमार ने पिछले 10-15 सालों में बिहार में बहुत काम किया और वह देश सबसे अच्छे मुख्यमंत्रियों में से एक हैं।’ इसके साथ ही उन्होंने कहा कि ‘जेडीयू ज्वाइन करने का दूसरा कारण ये है कि जेडीयू एक छोटी पार्टी है और विचारधारा का इस पर बहुत ज्यादा बोझ नहीं है और यह पार्टी एक क्लीन स्लेट की तरह है। यही वजह है कि वह जेडीयू के साथ ज्यादा कनेक्ट महसूस करते हैं।’ जब प्रशांत किशोर से सवाल किया गया कि पार्टी ज्वाइन करने के सिर्फ एक महीने में ही आपको पार्टी का उपाध्यक्ष बना दिया गया! इसकी क्या वजह है? इसके जवाब में जेडीयू उपाध्यक्ष ने कहा कि ‘इसका जवाब तो नीतीश कुमार ही दे सकते हैं। लेकिन मैं विभिन्न कारणों से पार्टी के साथ पिछले 3-4 सालों से जुड़ा हुआ हूं। तो यह नहीं कहा जा सकता कि मैंने अचानक पार्टी ज्वाइन की है। यह कोई नया जुड़ाव नहीं है।’

प्रशांत किशोर ने बताया कि ‘उनके लिए पद महत्वपूर्ण नहीं है। उनके लिए महत्वपूर्ण ये है कि इस पद पर रहते हुए मैं वह कर सकता हूं, जो मैं करना चाहता हूं। मैं राजनीति में युवाओं को लाना चाहता हूं। युवा नहीं जानते कि वह राजनीति में कैसे आएं? नीतीश जी ने मुझे इस मामले में खुली छूट दे रखी है। हम अगले 2-3 सालों में जेडीयू उम्मीदवारों की औसत आयु 45 वर्ष करना चाहते हैं। साथ ही अगले चुनाव तक हम चाहते हैं कि 30-50 उम्मीदवार युवा और नए हों। हम स्थानीय चुनावों में पार्टी के निशान पर चुनाव लड़ने की योजना बना रहे हैं। जरा सोचिए, यदि हमारे साथ 10,000 नए सरपंच, जिला परिषद अध्यक्ष…होंगे। ये ही मैं चाहता हूं और अपने अगले 2-3 साल इसी काम में समर्पित करना चाहता हूं। इसलिए मैने जेडीयू में शामिल होने का फैसला किया था।’

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