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कांग्रेस के ‘चिंतन शिविर’ से लेकर गुजरात-हिमाचल चुनाव में प्रदर्शन पर क्या सोचते हैं प्रशांत किशोर? ट्वीट कर बताया

कांग्रेस के उदयपुर चिंतन शिविर में एक परिवार एक टिकट का प्रस्ताव पास किया गया है। हालांकि इसमें शर्तें भी लगीं हुईं हैं।

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चिंतन शिविर में सोनिया गांधी समेत बाकी कांग्रेस नेता (फोटो- @INCIndia)

प्रशांत किशोर भले ही कांग्रेस में शामिल नहीं हुए हों, अपनी पार्टी बनाने की तैयारी कर रहे हों, लेकिन कांग्रेस से उनका मोह भंग नहीं होता दिख रहा है। प्रशांत किशोर ने अंदाजा लगाया है कि कांग्रेस, गुजरात और हिमाचल में हार सकती है। इसके साथ ही चुनावी रणनीतिकार ने कांग्रेस के उदयपुर चिंतन शिविर पर भी बड़ी टिप्पणी की है।

चुनावी रणनीतिकार ने ट्वीट करके कहा है कि उदयपुर चिंतन शिविर से कुछ भी हासिल नहीं हुआ है। उन्होंने ट्वीट कर कहा- “मुझे बार-बार उदयपुर चिंतन शिविर के परिणाम के बारे में पूछा जा रहा था। मेरे विचार से, यह यथास्थिति को लम्बा खींचने और कांग्रेस नेतृत्व को कुछ समय देने के अलावा कुछ भी सार्थक हासिल करने में विफल रहा, कम से कम गुजरात और हिमाचल में चुनावी हार तक!”

बता दें कि उदयपुर चिंतन शिविर में कांग्रेस तीन दिन तक मंथन करती रही थी। कुछ सुधारों पर मुहर भी लगाई गई है, लेकिन नेतृत्व परिवर्तन के सवालों से दूर ही रही। प्रशांत किशोर का इशारा इसी ओर रहा है।

इस चिंतन शिविर से कुछ दिनों पहले तक प्रशांत किशोर ने कांग्रेस को लेकर काफी सुर्खियां बटोरी थीं। प्रशांत किशोर कांग्रेस को फिर से खड़ा करने के लिए अपना प्रपोजल लेकर शीर्ष नेतृत्व के पास गए थे। सोनिया गांधी के साथ कई बार मुलाकात भी हुई थी। तब ऐसा लगने लगा था कि प्रशांत किशोर का कांग्रेस में शामिल होना महज औपचारिकता रह गई है।

कुछ दिनों बाद कांग्रेस ने प्रशांत किशोर को एक नई नवेली टीम का हिस्सा बनने का ऑफर दिया, लेकिन तब अचानक प्रशांत किशोर ने कांग्रेस में शामिल होने से मना कर दिया। कहा जाता है कि प्रशांत किशोर कुछ और बड़ा चाहते थे, जो कांग्रेस नहीं दे रही थी, इसलिए वो कांग्रेस को ना कह दिए।

इसके बाद प्रशांत किशोर ने बिहार से बड़ी घोषणी की कि वो राज्य में 3000 किमी तक की यात्रा निकालेंगे, जहां वो लोगों से मिलेंगे और मुद्दों को समझेंगे। इसके बाद से ये कहा जा रहा है कि वो अब राजनीति के मैदान में खुद की पार्टी लॉन्च करने की तैयारी कर रहे हैं।

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