मोदी को हराने की बात भूल जाइए, जब राहुल गांधी पर बोले थे प्रशांत किशोर, कहा था- 100 साल पुरानी पार्टी संभालना ज्यादा मुश्किल

तमाम सियासी अटकलबाजियों के बीच प्रशांत किशोर का एक वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है जहां वह कांग्रेस में शामिल होने और राहुल गांधी के काम करने के तरीके पर खुलकर बात करते हुए दिखाई दे रहे हैं।

Prashant Kishor Rahul Gandhi
प्रशांत किशोर ने राहुल गांधी और PM मोदी के बीच का अंतर बताया। Photo- Indian Express

चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर के कांग्रेस में शामिल होने की संभावनाओं ने जोर पकड़ना शुरू कर दिया है। पिछले दिनों राहुल गांधी के आवास पर कई दिग्गज नेताओं ने प्रशांत किशोर के पार्टी में शामिल होने के नफा नुकसान पर चर्चा की। इन सियासी अटकलबाजियों के बीच प्रशांत किशोर का एक वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है जहां वह कांग्रेस में शामिल होने और राहुल गांधी के काम करने के तरीके पर खुलकर बात करते हुए दिखाई दे रहे हैं। यहां उन्होंने राहुल गांधी और नरेंद्र मोदी की तुलना करते हुए कहा कि 100 साल पुरानी पार्टी को चलाना ज्यादा मुश्किल है।

वरिष्ठ पत्रकार बरखा दत्त के साथ इंटरव्यू में जब प्रशांत किशोर से राहुल गांधी के साथ वैचारिक मतभेद पर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि राहुल गांधी की प्राथमिकता नरेंद्र मोदी को हराने की नजर आती है। जबकि मेरा मानना है कि अगर आप 48 साल के हैं और कांग्रेस के अध्यक्ष बन जाते हैं तो मोदी को हराने की बात भूल जाइए, अगले 5 से 8 साल पार्टी की जड़ों में उतरकर उसे आगे बढ़ाने में अपना समय दीजिए।

बरखा दत्त ने प्रशांत किशोर से जब राहुल गांधी औऱ पीएम मोदी के बीच का फर्क पूछा तो उन्होंने कहा कि मोदी एक जोखिम लेने में वाले व्यक्ति हैं, उनमें बड़े फैसले लेने की इच्छा शक्ति है, वहीं राहुल के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि अगर आपके ऊपर 100 साल पुरानी पार्टी की जिम्मेदारी तो उसे संभालना ज्यादा मुश्किल होगा उस पार्टी की अपेक्षा जोकि 30 साल पहले ही बनी हो।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि राहुल गांधी ने हाल ही में पार्टी के सीनियर नेताओं के साथ प्रशांत किशोर के पार्टी में शामिल होने की संभावनाओं पर चर्चा की। सूत्रों के अनुसार ज्यादा कांग्रेस के नेताओं का मानना है कि प्रशांत किशोर के आने से पार्टी को फायदा ही होगा। बताते चलें कि पीके 13 जुलाई को राहुल गांधी और प्रियंका वाड्रा से मिले थे, जबकि सोनिया गांधी से उनकी मुलाकात पहले ही हो चुकी है।

गौर हो कि प्रशांत किशोर ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के नतीजों के बाद यह ऐलान कर दिया था कि भविष्य में वह चुनावी रणनीतिकार की भूमिका नहीं निभाएंगे। इस बयान के बाद से ही उनके किसी राजनीतिक दल में शामिल होने के कयास लगाए जा रहे हैं। हांलाकि बिहार विधानसभा चुनावों के बाद वह जेडीयू के साथ जुड़े थे लेकिन उनकी यह पारी कुछ खास लंबी नहीं चली थी।

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