बरखा दत्त के सवाल पर बोले PK,राहुल से अच्छे संबंध पर दो प्वाइंट्स पर उनसे मेरे विचार अलग, जानें पूरा मामला

सियासी गलियारों में चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर के कांग्रेस में शामिल होने की अटकलें तेज होती जा रही है। पिछले दिनों कांग्रेस के सीनियर नेताओं ने राहुल गांधी के साथ PK के कांग्रेस में शामिल होने के फायदों और नुकसानों पर मंथन किया था।

Prashant Kishor Rahul Gandhi
प्रशांत किशोर और राहुल गांधी की पिछले दिनों मुलाकात हुई थी। Photo Source- Indian Express and PTI

सियासी गलियारों में चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर के कांग्रेस में शामिल होने की अटकलें तेज होती जा रही है। पिछले दिनों कांग्रेस के सीनियर नेताओं ने राहुल गांधी के साथ PK के कांग्रेस में शामिल होने के फायदों और नुकसानों पर मंथन किया था। कयासबाजियों के इस दौर में बरखा दत्त द्वारा लिया गया प्रशांत किशोर का इंटरव्यू खूब देखा जा रहा है। इस इंटरव्यू में प्रशांत किशोर ने बताया था कि राहुल गांधी के साथ उनके संबंध अच्छे हैं लेकिन कुछ बिंदुओं पर उनके विचारों में अंतर है।

प्रशांत किशोर ने कहा कि मेरे और राहुल गांधी के विचारों में सबसे बड़ा अंतर यह है कि वह सोचते हैं कि कांग्रेस का उत्थान पार्टी के परंपरागत तरीकों से हो सकता है। जबकि मेरा मानना है कि अगर भारत में कांग्रेस को फिर से सत्ता में आना है तो उसे कुछ ऐसे फैसले लेने होंगे जो परपंरागत तरीकों से कहीं अलग होंगे। उन्होंने पिछले कुछ आम चुनावों का जिक्र करते हुए कहा कि अगर आप नतीजों का अध्ययन करेंगे तो पाएंगे कि कांग्रेस का पतन 1985 के बाद के चुनावों से ही हो रहा है।

प्रशांत किशोर ने कहा कि 1989 के चुनावों में राजीव गांधी की अगुवाई में कांग्रेस के खाते में 197 सीटें आई थी, जिसके बाद हर किसी ने उन्हें हारा हुआ घोषित कर दिया, वहीं 2004 के लोकसभा चुनावों में यूपीए ने कांग्रेस की अगुवाई में सरकार बनाई तो कांग्रेस 140 के करीब सीटें पर जीती थी, बता दें कि 2004 में कांग्रेस 145 सीटों पर जीती थी। उन्होंने कहा कि बतौर राजनीतिक दल कांग्रेस का पतन उस समय से ही हो रहा है और यही पहला मतभेद मेरे और राहुल गांधी के बीच है।

दूसरे वैचारिक मतभेद पर चर्चा करते हुए प्रशांत किशोर ने कहा कि राहुल गांधी का मानना है कि नरेंद्र मोदी को हराना ही पार्टी का पहला लक्ष्य होना चाहिए, मोदी को हराने के बाद ही पार्टी का फिर से उदय हो सकता है, जबकि मेरा मानना है कि अगर आप 48 साल के हैं और कांग्रेस के अध्यक्ष हैं तो भूल जाइए कि आप नरेंद्र मोदी को चुनावों में हरा पाएंगे या नहीं, पहले कांग्रेस की जड़ों में जाकर उसे फिर से राजनीतिक पार्टी के तौर पर खड़ा करने की कोशिश की जानी चाहिए।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि 13 जुलाई को प्रशांत किशोर की मुलाकात राहुल गांधी और प्रियंका गांधी से हुई थी, सोनिया गांधी से उनकी मुलाकात पहले भी हो चुकी है। हाल ही में राहुल गांधी के आवास पर एक बैठक भी हुई थी। अब देखना दिलचस्प होगा कि पीके कांग्रेस में शामिल होते हैं या नहीं।

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