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पंजाब में कांग्रेसियों को ठगने में लगे प्रशांत किशोर के बहरूपिए, टीवी से सीख ली पीके की स्टाइल

पंजाब कांग्रेस में इन दिनों रार देखने को मिल रही है। इसी बीच कुछ ठग भी फायदा उठाने के फ़िराक़ में हैं। प्रशांत किशोर बनकर फोन करते हैं और कांग्रेस नेताओं से मोटी रक़म वसूल लेते हैं।

Translated By अंकित ओझा चंडीगढ़ | Updated: June 17, 2021 8:15 AM
चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर। एक्सप्रेस फोटो

पंजाब कांग्रेस में इन दिनों खींचतान देखने को मिल रही है। इसी का फ़ायदा उठाकर कुछ लोग प्रशांत किशोर के बहरूपिया बन कांग्रेस नेताओं को ठगने की भी कोशिश कर रहे हैं। कई नेताओं को तो इन ठगों ने चूना भी लगा दिया। वे नेताओं को फोन करके पीके की आवाज़ और अंदाज़ में बात करते हैं। फिर मनचाहे सर्वे से लेकर चुनावी टिकट दिलाने तक की बात करते हैं और इसके बदले मोटी रक़म मांगते हैं।

मंगलवार को लुधियाना पुलिस ने एक अज्ञात शख्स के ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया है। आरोप है कि वह पार्टी के नेता को फोन करके खुलेआम मुख्यमंत्री की आलोचना करने की सलाह दे रहा था। पिछले महीने भी प्रशांत किशोर की नाटक करने वाले एक गैंग का पर्दाफाश हुआ था। कई लोगों को गिरफ्तार भी किया गया थी। वे लुधियाना, बठिंडा, जलंधर, अमृतसर और संगरूर के कई नेताओं के संपर्क में थे।

पुलिस का कहना है कि इस गैंग ने कांग्रेस नेताओं से क़रीब 5 करोड़ रुपये ठग लिए। पुलिस के सूत्रों ने बताया, ‘विधायक कुलदीप सिंह वैद को ठगने की कोशिश की जा रही थी। उनके पास संदिग्ध का फोन आया और उसने कहा कि अगर चाहते हैं कि सर्वे की रिपोर्ट उनके पक्ष में हो तो गिफ्ट दें।इसके बाद 11 और 13 मई को पुलिस ने जलंधर से दो आरोपियों की गिरफ्तारी की।’

पुलिस ने आरोपियों की पहचान राकेश कुमार भसिन और रजत कुमार राजा के रूप में की है। बाद में मुख्य आरोपी गौरव शर्मा को भी गिरफ्तार किया गया। ये सभी अमृतसर के ही रहने वाले हैं। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया, ‘शर्मा एक बड़ा जुआरी है जो कि हर रोज लाखों का दांव लगाता है।’

उन्होंने कहा, ‘वह बिल्कुल प्रशांत किशोर की तरह बोलता है। टीवी पर देखकर आरोपी ने नकल करनी सीख ली। उसने केवल पंजाब ही नहीं बल्कि बिहार, राजस्थान, हरियाणा और पश्चिम बंगाल के नेताओं को भी ठगा है। उनके खिलाफ कई मामले दर्ज किए गए हैं।’ पुलिस ने कहा कि जो लोग ठगे गए उनमें से ज्यादातर लोग केस दर्ज नहीं करवा रहे थे।

विधायक वैद ने कहा कि आरोपी की बातें बहुत सच लग रही थीं। उसने अपना पूरा होमवर्क किया था। हर बात का सटीक जवाब देता था। 4-5 दिनों के अंदर कई बार उसका फोन आया। बाद में जब वह मेरे पक्ष में सर्वे की रिपोर्ट देने के लिए 10 लाख की मांग करने लगा तो मुझे शक हुआ कि वह पीके नहीं हो सकता है।

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