ऐक्टिव पॉलिटिक्स में सामने न होकर भी तगड़ी छवि और जगह बना चुके PK, कांग्रेस कराने जा रही रायशुमारी!

प्रशांत किशोर के साथ राहुल गांधी और प्रियंका गांधी कई बार बैठक कर चुके हैं लेकिन अब तक पार्टी में उनकी एंट्री का रास्ता साफ नहीं हो पाया है।

प्रशांत किशोर के कांग्रेस में जाने की अटकलें तेज। फोटो- फेसबुक टीम पीके

राजनीतिक रणनीतिकार रहे प्रशांत किशोर के कांग्रेस में शामिल होने की अटकलें लंबे समय से चल रही हैं। ऐसी ख़बरें भी आईं कि कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता इस बात से सहमत नहीं हैं कि पीके कांग्रेस पार्टी में एंट्री लें। अब बात जनमत संग्रह तक पहुंच गई है। यह फैसला अब AICC की सर्वोच्च कमिटी CWC के हाथ में है। सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस नेतृत्व पार्टी के अंदर लोगों की राय जानना चाहती है और इसके लिए सीनियर नेताओं की कमिटी बनाई गई है।

बता दें कि प्रशांत किशोर पहले जेडीयू में भी रह चुके हैं। हालांकि फिर वह पार्टी से बाहर निकल आए और फिर चुनावी रणनीतिकार के रूप में काम करने लगे। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद जिस दिन परिणाम आए उसी दिन उन्होंने ऐलान कर दिया कि अब वह प्रत्यक्ष रूप से यह काम नहीं करेंगे। हालांकि उन्होंने कहा था कि उनकी पार्टी पश्चिम बंगाल में ऐक्टिव रहेगी।

प्रशांत किशोर ऐसे शख्स हैं जिन्होंने राजनीति में अपनी जगह किसी के दम पर नहीं बनाई है बल्कि अपने बलबूते यहां तक का सफर तय किया है। इसी वजह से उनकी एंट्री भी बिल्कुल साधारण तो नहीं हो सकती है। बताया जा रहा है कि वह पार्टी में निर्णायक भूमिका में रहने की मांग कर रहे हैं।

बता दें कि 2014 में वह भाजपा के लिए काम कर रहे थे। लोकसभा चुनाव में जब भाजपा की जबरदस्त जीत हुई तो प्रशांत किशोर का नाम भी राष्ट्रीय क्षितिज पर नजर आने लगा। खास बात यह भी है कि उनके समीकरण कई दलों के साथ अच्छे हैं। लोकसभा चुनाव के बाद उन्होंने जहां भी चुनावी रणनीतिकार की भूमिका निभाई, उन्हें सफला मिली सिवाय उत्तर प्रदेश के।

अब प्रशांत किशोर साफ संकेत दे चुके हैं कि वह राजनीति में अपनी जगह बनाना चाहते हैं। उन्होंने शरद पवार से भी मुलाकात की थी। कई दल उन्हें बड़े पद देने का ऑफर दे चुके हैं लेकिन प्रशांत किशोर के मन में कुछ बड़ी योजना जन्म ले चुकी है। कांग्रेस की तरफ उनका झुकाव दिखाता है कि वह इसी दल के साथ बड़े परिवर्तन का खाका खींचना चाहते हैं। हालांकि अभी यह देखना है कि पीके की कांग्रेस में किस रूप में एंट्री होती है और इसके बाद पार्टी की रणनीति में कैसे परिवर्तन आते हैं।

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