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लोग गफलत में हैं कि कांग्रेस 2014 में कमजोर हुई, पतन तो 1985 में ही शुरू हो गया था- राजीव गांधी का जिक्र कर बोले PK

प्रशांत किशोर (Prashant Kishor) ने एक इंटरव्यू के दौरान बताया कि राहुल गांधी (Rahul Gandhi) और नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) में क्या अंतर है, साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि कांग्रेस के पतन के मामले में लोगों में कुछ गलतफहमियां हैं।

राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर (Express photo by Abhinav Saha)

चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर (Prashant Kishor) ने हाल ही में कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) से मुलाकात की थी, जिसके बाद से सियासी गलियारों में तमाम तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। सियासी संभावनाओं के बीच प्रशांत किशोर (Prashant Kishor) का एक इंटरव्यू इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है, जहां वह कांग्रेस और राहुल गांधी को लेकर खुलकर बात करते हुए नजर आ रहे हैं। इस इंटरव्टयू में उन्होंने कहा कि लोगों को गलतफहमी है कि कांग्रेस, 2014 के लोकसभा चुनावों में मिली हार के बाद कमजोर हुई, जबकि पार्टी का पतन तो 1985 से ही शुरू हो गया था।

‘1985 से ही कांग्रेस का पतन जारी’: वरिष्ठ पत्रकार बरखा दत्त के साथ इंटरव्यू में प्रशांत किशोर ने कहा कि राहुल गांधी का मानना का है कांग्रेस की वापसी अपने परंपरागत तरीकों से ही होगी। राहुल गांधी के साथ अपने वैचारिक मतभेदों पर चर्चा करते हुए किशोर ने कहा कि लोगों को गफलत में हैं कांग्रेस 2014 के बाद से कमजोर हुई है, जबकि सच्चाई यह है कि उसका पतन 1985 से ही शुरू हो गया था। लोग भूल रहे हैं कि 1989 के लोकसभा चुनावों में कांग्रेस ने राजीव गांधी की अगुवाई में 197 सीटें जीती थीं। इन नंबरों को देखने के बाद हर किसी ने इसे कांग्रेस की हार घोषित कर दिया था।

प्रशांत किशोर (Prashant Kishor) ने आगे कहा कि अगर 2004 के लोकसभा चुनावों की बात की जाए जिसे कांग्रेस की जीत के तौर पर याद रखा जाता है, तो उस समय कांग्रेस के खाते में 140 के आस -पास सीटें आईं थीं। इस आधार पर कहा जा सकता है कि कांग्रेस का पतन उसी समय से शुरू हो गया था। उन्होंने बताया कि यह पहला मतभेद है जो मेरे और राहुल गांधी के बीच है।

मोदी को हराना चाहते हैं राहुल गांधी: राहुल गांधी के साथ वैचारिक मतभेदों पर हो रही चर्चा को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने कहा कि राहुल गांधी का मानना है कि नरेंद्र मोदी को हाराना ही पार्टी का टारगेट होना चाहिए। जबकि मेरा मानना है कि अगर आप 48 साल के हैं और कांग्रेस के अध्यक्ष बन जाते हैं, तो भूल जाइए कि आप मोदी को हरा सकते हैं या नहीं। पहले कांग्रेस को अगले 5 या 8 साल के लिए ध्यान रखकर नीति तैयार करनी चाहिए।

नरेंद्र मोदी औऱ राहुल गांधी में अंतर: बरखा दत्त ने प्रशांत किशोर से नरेंद्र मोदी और राहुल गांधी के बीच अंतर पर सवाल किया, जिसके जवाब में उन्होंने कहा कि मोदी एक जोखिम उठाने वाले व्यक्ति हैं, उनके अंदर हिम्मत है जिसके आधार पर वह बड़े फैसले ले सकते हैं। जबकि राहुल गांधी का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि उनके ऊपर एक 100 साल पुरानी पार्टी की जिम्मेदारी है। जंहा चीजें बदलना आसान नहीं है, उस पार्टी के मुकाबले जो सिर्फ 30 साल पहले बनी हो।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि प्रशांत किशोर ने 2014 के लोकसभा चुनावों में पीएम मोदी के साथ काम किया था जहां बीजेपी को अप्रत्याशीत जीत मिली थी। इस जीत के बाद किशोर ने अलग अलग राज्यों में अलग-अलग पार्टी के लिए चुनावी रणनीति तैयार करने काम किया और उन्हें कामयाबी भी मिली, जिसमें बिहार में नीतीश कुमार, पंजाब में कैप्टन अमरिंदर सिंह और पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी शामिल हैं।

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