प्रशांत किशोर ने कांग्रेस को सुनाई ‘खरी-खरी’, टल गई पार्टी में एंट्री

चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर (Prashant Kishor) का कांग्रेस में शामिल होना फिलहाल कुछ समय के लिए टल गया है।

Prashant kishor
फिर टल गई Prashant Kishor की कांग्रेस में एंट्री । Photo – File/ Indian Express

चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर (Prashant Kishor) का कांग्रेस में शामिल होना फिलहाल कुछ समय के लिए टल गया है। लेखक और राजनीतिक विश्लेषक रशीद किदवई द्वारा इंडिया टुडे पर लिखे गए एक लेख के अनुसार सोनिया गांधी, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और प्रशांत किशोर (Prashant Kishor) के बीच सहमति बनी है कि आगामी कुछ महीनों में होने वाले पांच राज्यों के चुनाव खत्म होने के बाद उन्हें कांग्रेस में शामिल कराया जाए। बताते चलें कि उत्तर प्रदेश में हुए ‘लखीमपुर प्रकरण’ पर प्रियंका गांधी की अगुवाई में कांग्रेस के बढ़ते ग्राफ पर चर्चा के बीच प्रशांत किशोर (Prashant Kishor) ने इसे ‘गलतफहमी’ करार दिया था। साथ ही कांग्रेस को ग्रैंड ओल्ड पार्टी भी कहा था।

मजेदार बात ये है कि इस बहुचर्चित एंट्री को टालने के लिए प्रशांत किशोर की कोई जिद नहीं रही है, वहीं सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी का मानना है कि पीके की एंट्री को पंजाब, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, गोवा और मणिपुर के चुनावों के नतीजों से नहीं आंका जाना चाहिए। हालांकि कांग्रेस के नजरिए से देखा जाए तो इस फैसले को सर्वसम्मित भी कहना उचित नहीं होगा, क्योंकि राहुल गांधी का मानना है कि यदि आप किसी को ताकत मानकर पार्टी में शामिल कराना चाहते हैं, तो फिर आगामी पांच राज्यों के नतीजों के बारे में ज्यादा नहीं सोचना चाहिए।

लेख में यह भी साफ किया गया है कि पंजाब में चरणजीत सिंह चन्नी को मुख्यमंत्री बनाने में प्रशांत किशोर की कोई भूमिका नहीं थी, यह सुझाव कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा सुझाया गया था, जिस पर राहुल गांधी ने फैसला लिया था। लेख के अनुसार, कांग्रेस में प्रशांत किशोर की एंट्री सिर्फ 2024 चुनावों को लेकर नहीं हो रही है बल्कि पिछले दिनों सोनिया गांधी के साथ हुई मुलाकात में उनके बीच चर्चा पार्टी में सुधार, संगठनात्मक बदलाव, टिकट बांटने की प्रणाली, गठबंधन का पैमाना और चंदे संबंधित मुद्दों पर केंद्रित रही थी।

लेख में कहा गया है कि पीके की कांग्रेस में एंट्री की अटकलों ने पार्टी में बैठे कुछ पुराने नेताओं की बेचैनी को बढ़ा दिया है। संगठन के पदाधिकारी से लेकर वरिष्ठ नेताओं और कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्री तक प्रशांत किशोर पर अनाप शनाप आरोप लगाते रहे हैं।

कांग्रेसी नेताओं की नाराजगी है कि प्रशांत किशोर के कहने पर ही TMC सुष्मिता देव, गोवा के पूर्व CM लुइज़िन्हो फलेरियो और मेघालय, त्रिपुरा जैसे इलाकों के कई नेताओं को अपनी तरफ खींच लिया। इस नाराजगी की एक बानगी पिछले दिनों ट्विटर वार के दौरान भी देखने को मिली थी जब छत्तीसगढ़ के सीएम भूपेश बघेल और TMC नेता के बीच जमकर टीका टिप्पणी हुई थी।

वहीं पीके से जुड़े सूत्रों का कहना है कि TMC का इतिहास कांग्रेस से जुड़ा हुआ रहा है। साथ ही तृणमूल उन राज्यों में अपनी पैठ बनाना चाहती है, जहां कांग्रेस कमजोर हो रही है, जैसे कि त्रिपुरा और गोवा। इन राज्यों में आम आदमी पार्टी अपनी पकड़ बना रही है। ऐसे में TMC पार्टी विस्तार के तहत अन्य राज्यों में कैडर को मजबूती देने के लिए कांग्रेस के पुराने नेताओं को अपने साथ मिला रही है।

जानकारी के मुताबिक पार्टी के युवा और मध्यम उम्र के नेता किशोर के कांग्रेस में शामिल होने का स्वागत कर रहे हैं वहीं दूसरी तरफ कुछ नेता दबे सुरों में पार्टी को सुझाव दे रहे हैं कि किसी नए नेता की एंट्री का राजनीतिक गतिविधियों पर असर नहीं दिखाई देना चाहिए।

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