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प्रशांत के भरोसे बैठे हैं उत्तर प्रदेश के कांग्रेसी

फिलहाल प्रशांत किशोर के जादू के भरोसे खुद को ढीला छोड़ चुके उत्तर प्रदेश के कांग्रेसी शांत हैं। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष से लेकर उत्तर प्रदेश प्रभारी तक सिर्फ पीके की तरफ टकटकी लगाए देख रहे हैं। इस हकीकत का अहसास टीम पीके को भी हो चला है। अब उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती कांग्रेसियों में उस आत्मविश्वास को पैदा करना है जिसके भरोसे चुनाव में फतह हासिल की जाती है।

Author लखनऊ | May 3, 2016 1:46 PM
प्रशांत किशोर (FILE PHOTO)

उत्तर प्रदेश में पहले से ही ठंडे कमरे में आराम फरमाने के आदी हो चुके कांग्रेसी अब प्रशांत किशोर के बहाने फिर आराम फरमा रहे हैं। इस बार उनके पास पीके की शक्ल में एक ऐसा बहाना हाथ लगा है जिसको आधार बनाकर उन्होंने चुप्पी साध ली है। उत्तर प्रदेश के कांग्रेसियों की सुस्ती का आलम यह है कि अगस्ता वेस्टलैंड मामले में कांग्रेस के कई नेताओं के आरोपों की जद में आने के बावजूद इसके विरोध में उत्तर प्रदेश के किसी भी जिले या कस्बे से कोई स्वर तक नहीं फूटा। आंदोलन की बात तो दीगर है। ऐसा तब है जब प्रशांत किशोर की बनाई हुई टीम प्रदेश का जिलेवार सर्वे कर रही है।

अगस्ता वेस्टलैंड मामले में कांग्रेसी नेताओं पर लग रहे आरोप भी उत्तर प्रदेश के कांग्रेसियों में आक्रोश पैदा कर पाने में नाकाम रहे हैं। ऐसा तब है जब प्रदेश में नए सिरे से कांग्रेस की जमीन तैयार करने की जिम्मेदारी इस बार उन प्रशांत किशोर को सौंपी गई है जिनके लिए कहा जाता है कि उन्होंने नरेंद्र मोदी और नीतीश कुमार को सत्ता तक पहुंचाने में पर्दे के पीछे से अहम किरदार अदा किया था। उत्तर प्रदेश में दरअसल कांग्रेस के जमीनी हालात हैं कैसे, इस बात का अंदाजा लगाने के लिए प्रशांत किशोर ने जिलेवार सर्वे के लिए टीमें गठित की हैं। इन टीमों को जिम्मेदारी दी गई है कि वे प्रत्येक जिले में जाकर इस बात की जानकारी करें कि वहां कांग्रेस के किस नेता की छवि जनता के बीच कैसी है और उन नेताओं में से कौन प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव को जिता पाने की कुव्वत रखता है।

उत्तर प्रदेश में सुस्त पड़ी कांग्रेस पर मानना है कि इस वक्त कांग्रेस के पास यहां न ही कार्यकर्ताओं की फौज है और न ही नेतृत्व करने वाले वरिष्ठ नेता। ऐसे में प्रशांत किशोर को पार्टी आलाकमान ने जब से उत्तर प्रदेश की कमान सौंपी है, इन कांग्रेसियों के पास अच्छा बहाना हाथ आ गया है। वह हर प्रतिक्रिया के लिए अब पीके के निर्देश का मुंह ताक रहे हैं।

वहीं अगस्ता वेस्टलैंड पर उत्तर प्रदेश के कांग्रेसियों के मौन पर भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता हरीश श्रीवास्तव चुटकी लेते हैं। उनका कहना है कि अब कांग्रेसियों के पास बोलने को बचा ही क्या है। प्रदेश के नेताओं से जिम्मेदारी लेकर प्रशांत किशोर को दे दी गई। पार्टी आलाकमान ने ऐसा कर के यह साफ कर दिया कि उसे प्रदेश के कांग्रेसियों पर दरअसल अब भरोसा नहीं रह गया है। प्रदेश में सिर्फ दो लोकसभा सीटों तक सिमट चुकी कांग्रेस के जनाधार का अंदाजा लगाना अब बेहद आसान है। वहीं अगस्ता वेस्टलैंड मामले पर विरोध का कहीं से कोई स्वर न निकलना इस बात की ताकीद कराने के लिए काफी है कि प्रदेश के कांग्रेसी अब अपने आलाकमान के बारे में किस तरह की सोच और भरोसा रखते हैं? यदि उनके मन में पार्टी आलाकमान के प्रति रंचमात्र भी विश्वास शेष बचा होता तो क्या वे ऐसे मौन धारण किए होते?

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फिलहाल प्रशांत किशोर के जादू के भरोसे खुद को ढीला छोड़ चुके उत्तर प्रदेश के कांग्रेसी शांत हैं। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष से लेकर उत्तर प्रदेश प्रभारी तक सिर्फ पीके की तरफ टकटकी लगाए देख रहे हैं। उधर, उत्तर प्रदेश का जिलेवार सर्वे कर रही पीके की टीम के सामने कांग्रेसी एक दूसरे से हाथापाई करने से भी गुरेज नहीं कर रहे हैं। बुधवार को टीम पीके के सामने वाराणसी में कांग्रेसियों के बीच जमकर मारपीट हुई।
ऐसे में इस बात का अंदाजा लगाना कठिन नहीं कि उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की जमीनी हकीकत दरअसल है क्या? इस हकीकत का अहसास टीम पीके को भी हो चला है। ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि इस बार२ प्रशांत किशोर उत्तर प्रदेश में अपना जादू छोड़ पाने में कामयाब हो पाते हैं अथवा नहीं।

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