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प्रशांत भूषण ने सुप्रीम कोर्ट में मानी गलती, फिर अटॉर्नी जनरल ने वापस ले ली याचिका

अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने बृहस्पतिवार को उच्चतम न्यायालय में स्वीकार किया कि उन्होंने एम नागेश्वर राव की सीबीआई के अंतरिम निदेशक के रूप में नियुक्ति के बारे में उच्चाधिकार चयन समिति की बैठक की कार्यवाही के विवरण को गढ़ा हुआ बताने संबंधी अपना ट्विट करके ‘सही में गलती’ की थी।

Author Updated: March 7, 2019 5:08 PM
प्रशांत भूषण ने न्यायालय में अपनी गलती स्वीकार की (फोटो-इंडियन एक्सप्रेस)

अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने बृहस्पतिवार को उच्चतम न्यायालय में स्वीकार किया कि उन्होंने एम नागेश्वर राव की सीबीआई के अंतरिम निदेशक के रूप में नियुक्ति के बारे में उच्चाधिकार चयन समिति की बैठक की कार्यवाही के विवरण को गढ़ा हुआ बताने संबंधी अपना ट्विट करके ‘सही में गलती’ की थी। भूषण ने अपने ट्विट में कहा था कि सरकार ने शायद गढ़ा हुआ कार्यवाही विवरण न्यायालय में पेश किया है। न्यायमूर्ति अरूण मिश्रा और न्यायमूर्ति नवीन सिन्हा की पीठ से अटार्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने कहा कि भूषण के बयान को देखते हुये वह उनके खिलाफ दायर अपनी अवमानना याचिका वापस लेना चाहेंगे।
हालांकि, भूषण ने न्यायालय में एक अर्जी दायर कर न्यायमूर्ति अरूण मिश्रा से अनुरोध किया कि वह वेणुगोपाल की अवमानना याचिका पर सुनवाई से खुद को अलग करें।

न्यायमूर्ति मिश्रा को अवमानना याचिका की सुनवाई से अलग होने का अनुरोध करने के लिये भूषण ने पीठ से बिना शर्त क्षमा याचना करने से भी इंकार कर दिया। वेणुगोपाल ने पीठ से कहा कि वह अपने पहले के बयान पर कायम हैं कि वह इस मामले में प्रशांत भूषण के लिये कोई सजा नहीं चाहते हैं।
पीठ ने हालांकि कहा कि इस व्यापक मुद्दे पर विचार किया जायेगा कि क्या कोई व्यक्ति अदालत के विचाराधीन किसी मामले में जनता की राय को प्रभावित करने के लिये न्यायालय की आलोचना कर सकता है। पीठ इस मामले में अब तीन अप्रैल को आगे सुनवाई करेगी।

शीर्ष अदालत ने इससे पहले कहा था कि वह इस तथ्य पर विचार करेगी कि क्या कोई व्यक्ति अदालत के विचाराधीन मामले में जनता की राय को प्रभावित करने के लिये न्यायालय की आलोचना कर सकता है जो न्याय की प्रक्रिया में हस्तक्षेप हो सकता है। न्यायालय ने यह भी कहा था कि आज कल न्यायाधीन मामलों में पेश होने वाले वकीलों के लिये मीडिया में बयान देना और टीवी पर चर्चा में हिस्सा लेना एक ट्रेन्ड बन गया है। न्यायालय ने कहा कि वह मीडिया द्वारा मामलों की रिपोर्टिंग के विरूद्ध नहीं है परंतु न्यायाधीन मामलों में पेश होने वाले वकीलों को सार्वजनिक बयान देने से बचना चाहिए।

 

भूषण ने अपने ट्विट में कहा था कि ऐसा लगता है कि सरकार ने शीर्ष अदालत को गुमराह किया और शायद उसने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता वाली उच्चाधिकार प्राप्त चयन समिति की बैठक की कार्यवाही का गढ़ा हुआ विवरण पेश है। न्यायालय ने अवमानना याचिका पर भूषण को नोटिस जारी कर उनसे तीन सप्ताह के भीतर मांगा था। केन्द्र सरकार ने भी प्रशांत भूषण के खिलाफ उनके एक फरवरी के ट्विट को लेकर अलग से अवमानना याचिका दायर कर रखी है।

वेणुगोपाल ने इससे पहले न्यायालय में कहा था कि जब नागेश्वर राव की नियुक्ति को चुनौती देने वाला मामला लंबित है तो भूषण ने सार्वजनिक रूप से बयान दिया है कि सरकार ने गढ़ा हुआ दस्तावेज पेश करके कथित रूप से शीर्ष अदालत को गुमराह किया है। भूषण के समर्थन में अरूणा राय, अरूधंती राय और शैलेश गांधी सहित दस सामाजिक कार्यकर्ता भी शीर्ष अदालत पहुंच गये थे। इनके अलावा पूर्व केन्द्रीय मंत्री अरूण शौरी सहित पांच वरिष्ठ पत्रकारों ने भी इस मामले में हस्तक्षेप के लिये अलग से आवेदन दायर किया था।

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