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पीटीआई की ‘राष्‍ट्र विरोधी’ रिपोर्टिंंग सेे प्रसार भारती नाराज, मदद रोकने का हो सकता है फैसला

इंडियन एक्‍सप्रेस की रिपोर्टर लिज मैथ्‍यू ने सरकारी सूत्रों के हवाले से यह जानकारी दी है। मैथ्‍यू ने ट्वीट करके बताया है कि प्रसार भारती की ओर से प्रेस ट्रस्‍ट ऑफ इंडिया (पीटीआई) को जो पत्र भेजा जा रहा है, उसमें साफ कहा गया है कि राष्‍ट्रविरोधी रिपोर्टिंग के चलते अब संबंध जारी रखना मुश्‍किल हो रहा है।

प्रसार भारती की ओर से पीटीआई को हर साल करोड़ों रुपए की मदद दी जाती है।

बताया जा रहा है कि समाचार एजेंसी पीटीआई से सरकार खुश नहीं है। प्रसार भारती को लगता है कि पीटीआई राष्‍ट्रविरोधी रिपोर्टिंग कर रही है। इससे प्रसार भारती बेहद नाखुश है और नाखुशी का इजहार करते हुए पीटीआई को कड़ा पत्र लिख रहा है।

इंडियन एक्‍सप्रेस की रिपोर्टर लिज मैथ्‍यू ने सरकारी सूत्रों के हवाले से यह जानकारी दी है। मैथ्‍यू ने ट्वीट करके बताया है कि प्रसार भारती की ओर से प्रेस ट्रस्‍ट ऑफ इंडिया (पीटीआई) को जो पत्र भेजा जा रहा है, उसमें साफ कहा गया है कि राष्‍ट्रविरोधी रिपोर्टिंग के चलते अब संबंध जारी रखना मुश्‍किल हो रहा है। बता दें कि प्रसार भारती की ओर से पीटीआई को हर साल करोड़ों रुपए की मदद दी जाती है।

पीटीआई को सरकार की ओर से यह मदद दशकों से मिल रही है। अब प्रसार भारती इस संबंध को जारी रखने पर नए सिरे से सोच रहा है। इस संबंध में अंतिम निर्णय जल्‍द ही ले लिए जाने के आसार हैं।

लिज मैथ्‍यू के ट्वीट पर कई लोगों ने प्रतिक्रियाएं भी दी हैं। कुछ प्रतिक्रियाओं को हम यहां जस का तस रख रहे हैं:

Prakash Rao @Prakash55404771: Govt has @TimesNow @republic @ZeeNewsEnglish @aajtak and so many channels for spreading its #PointsOfViews. So @PTI_News can be wound up

@real_jitin: silencing every one

Rohit Joshi @RohitAshokJoshi: As per Govt.  Only Republic,  Zee, आजतक
Like #godimedia is sufficient to spread news.. Like chip in 2000 currancy नोट !

A.J @TweetbyErAJ: PTI is waste of noney jee media , prepublic, timeswow etc all are doing the job.

Venkatesh Krishnamoorthi @venkyuvacha: So so late @prasarbharati waking up late from slumber….. people hv been saying this in Twitter for least an year..

पीटीआई देश की बड़ी और पुरानी समाचार एजेंसी है। इसके टक्‍कर की कोई और एजेंसी अब बची नहीं है। पीटीआई का रजिस्‍ट्रेशन 1947 में हुआ था और 1949 से इसने काम करना शुरू किया था। आजकल इसका संचालन एक निदेशक मंडल के जरिए होता है। पीटीआई आत्‍मनिर्भर समाचार एजेंंसी नहीं बन सकी है। सरकारी मदद पर ही ज्‍यादा निर्भर है।

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