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प्रणब मुखर्जी ने डॉ. हेडगेवार को बताया भारत का महान सपूत, देखी उनकी जन्‍मस्‍थली

प्रणब मुखर्जी ने केबी हेडगेवार के जन्मस्थल पर विजिटर्स बुक में लिखा कि ' 'आज मैं भारत मां के एक महान सूपत को सम्मान और श्रद्धांजलि देने यहां आया हूं'। इससे पहले प्रणब दा गुरुवार (7 जून) को नागपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी आरएसएस के मुख्यालय पहुंचे।

प्रणब मुखर्जी ने हेडगेवार को श्रद्धांजलि दी।

देश के पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने केबी हेडगेवार के जन्मस्थल पर विजिटर्स बुक में लिखा कि ‘आज मैं भारत मां के एक महान सूपत को सम्मान और श्रद्धांजलि देने यहां आया हूं’। इससे पहले प्रणब दा गुरुवार (7 जून) को नागपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी आरएसएस के मुख्यालय पहुंचे। प्रणब मुखर्जी के यहां आने पर आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने गुलदस्ता भेंट कर उनका स्वागत किया। प्रणब मुखर्जी सबसे पहले हेडगेवार के जन्मस्थली पर गए, जहां उन्होंने हेडगेवार को श्रद्धांजलि सुमन अर्पित की। इस मौके पर वहां संघ के कई कार्यकर्ता वहां मौजूद थे। पूर्व राष्ट्रपति ने यहां विजिटर्स बुक में अपना संदेश भी लिखा।

कौन हैं हेडगेवार? आरएसएस के संस्थापक डॉक्टर केशव राव बलीराम हेडगेवार का जन्म 8 अप्रैल 1889 को नागपुर में हुआ था। बचपन से ही क्रांतिकारी स्वभाव के हेडगेवार ने 1925 में विजयादशमी के दिन आरएसएस की स्थापना की थी। हालांकि इसका नाम इसकी स्थापना के एक साल बाद पड़ा था। इस संगठन के बारे में पहली बार घोषणा करते हुए हेडगेवार ने कहा था कि- मैं आज संघ (संगठन) की स्थापना की घोषणा करता हूं। इससे पहले वे कांग्रेस के सक्रिय सदस्य और कांग्रेस के प्रसिद्ध नागपुर अधिवेशन के आयोजन के सह-प्रभारी रह चुके थे। उन्होंने असहयोग आंदोलन में भाग लिया था और आजादी के लिए जोशीले भाषण देने के कारण उन्हें एक साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई गई थी।

पूर्व राष्ट्रपति के संघ के कार्यक्रम में जाने पर विवाद: हालांकि पूर्व राष्ट्रपति के संघ के कार्यक्रम में जाने को लेकर कई कांग्रेसी नेताओं ने आपत्ति दर्ज कराई थी। प्रणब दा की बेटी शर्मिष्ठा मुखर्जी ने भी ट्वीट कर अपने पिता के फैसले को गलत ठहराया था। कहा यह भी जा रहा है कि कांग्रेसी नेताओं के अचानक से प्रणब दा पर आक्रमक होने के पीछे सोनिया गांधी हैं। सोनिया गांधी के आदेश पर ही कांग्रेस के रणनीतिकार अहमद पटेल ने 6 जून की रात को ट्वीट कर लिखा था कि मुझे प्रणब दा से ऐसी अपेक्षा नहीं थी। हालांकि इस विवाद पर संघ की तरफ से कहा गया है कि आरएसएस प्रसिद्ध लोगों को सामाजिक सेवा से जुड़े लोगों को बुलाता रहा है। इस बार डॉक्टर प्रणब मुखर्जी को निमंत्रण दिया गया है और यह उनकी महानता है कि उन्होंने यह निमंत्रण स्वीकार किया है।

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