ताज़ा खबर
 

प्रणव मुखर्जी के विदाई भाषण में लिखा नहीं था, फिर भी लिया सोनिया का नाम, भाजपाई हैरान

प्रणब मुखर्जी ने जहां देश के कई पूर्व नेताओं को याद किया उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी का अपने संदेश में जिक्र नहीं किया।

Author , Updated: July 25, 2017 12:35 PM
अपने विदाई समारोह में बोलते राष्‍ट्रपति प्रणब मुखर्जी। (PTI Photo)

सोमवार (24 जुलाई) को अपने कार्यकाल के आखिरी दिन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने राष्ट्र के नाम अपने विदाई संदेश में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी का नाम लेकर भाजपाई को चौंका दिया क्योंकि सोनिया का नाम राष्ट्रपति के लिखित भाषण में नहीं था। हालांकि कि हैरानी की दूसरी बात ये रही कि मुखर्जी ने जहां देश के कई पूर्व नेताओं को याद किया उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी का अपने संदेश में जिक्र नहीं किया। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने कहा कि भारत की आत्मा बहुलवाद व सहिष्णुता में बसती है और हमें अपने जन संवाद को शारीरिक और मौखिक सभी तरह की हिंसा से मुक्त करना होगा। राष्ट्र को संबोधित अपने विदाई संदेश में उन्होंने कहा कि समावेशी समाज का निर्माण विश्वास का एक विषय होना चाहिए। उन्होंने अहिंसा की शक्ति को पुनर्जीवित करने का आह्वान किया।

राष्ट्रपति ने कहा, “मैं आपके साथ कुछ सच्चाइयों को साझा करना चाहूंगा, जिन्हें मैंने इस अवधि के दौरान आत्मसात किया है। भारत की आत्मा, बहुलवाद और सहिष्णुता में बसती है। भारत केवल एक भौगोलिक सत्ता नहीं है। इसमें विचारों, दर्शन, बौद्धिकता, औद्योगिक प्रतिभा, शिल्प, नवान्वेषण और अनुभव का इतिहास शामिल है। सदियों के दौरान, विचारों को आत्मसात करके हमारे समाज का बहुलवाद निर्मित हुआ है। हमें सहिष्णुता से शक्ति प्राप्त होती है। यह शताब्दियों से हमारी सामूहिक चेतना का अंग रही है।” उन्होंने कहा कि संस्कृति, पंथ और भाषा की विविधता ही भारत को विशेष बनाती है।

उन्होंने कहा, “हमें सहिष्णुता से ताकत मिलती है। जन संवाद के विभिन्न पहलू हैं। हम तर्क-वितर्क कर सकते हैं, हम सहमत हो सकते हैं या हम सहमत नहीं हो सकते हैं। परंतु हम विविध विचारों की आवश्यक मौजूदगी को नहीं नकार सकते। अन्यथा हमारी विचार प्रक्रिया का मूल स्वरूप नष्ट हो जाएगा।”

मंगलवार को राष्ट्रपति पद से मुक्त होने वाले प्रणब मुखर्जी ने कहा कि सहृदयता और सहानुभूति की क्षमता हमारी सभ्यता की सच्ची नींव है। परंतु प्रतिदिन हम अपने आसपास बढ़ती हुई हिंसा देखते हैं। उन्होंने कहा, “इस हिंसा की जड़ में अज्ञानता, भय और अविश्वास है। हमें अपने जन संवाद को शारीरिक और मौखिक सभी तरह की हिंसा से मुक्त करना होगा। एक अहिंसक समाज ही लोकतांत्रिक प्रक्रिया में लोगों के सभी वर्गों, विशेषकर पिछड़ों और वंचितों की भागीदारी सुनिश्चित कर सकता है। हमें एक सहानुभूतिपूर्ण और जिम्मेदार समाज के निर्माण के लिए अहिंसा की शक्ति को पुनर्जाग्रत करना होगा।”

राष्ट्रपति ने कहा कि गांधीजी भारत को एक ऐसे समावेशी राष्ट्र के रूप में देखते थे, जहां आबादी का प्रत्येक वर्ग समानता के साथ रहता हो और समान अवसर प्राप्त करता हो। वह चाहते थे कि हमारे लोग एकजुट होकर निरंतर व्यापक हो रहे विचारों और कार्यो की दिशा में आगे बढ़ें। उन्होंने कहा कि वित्तीय समावेशन समतामूलक समाज का प्रमुख आधार है। हमें गरीब से गरीब व्यक्ति को सशक्त बनाना होगा और यह सुनिश्चित करना होगा कि हमारी नीतियों के फायदे पंक्ति में खड़े अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ लिंक्डइन पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

Next Stories
1 लोकसभा में ‘वीडियो रिकॉर्डिंग’ कर रहे थे अनुराग ठाकुर, अब कांग्रेस कर रही कार्रवाई की मांग
2 वन विभाग की जमीन खरीदकर रिसॉर्ट बनवाने लगीं भाजपाई मंत्री की पत्नी, पति के मंत्रालय ने लिखा- हम कुछ नहीं कर सकते
3 बलात्कार पीड़िता के गर्भपात की अनुमति याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से मांगा जवाब
जस्‍ट नाउ
X