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याकूब को फांसी के खिलाफ राष्ट्रपति से फरियाद

राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को एक नई याचिका भेज कर विभिन्न दलों ने उनसे मुंबई विस्फोट मामले के दोषी याकूब मेमन की मौत की सजा माफ करने का अनुरोध किया..

भाजपा सांसद शत्रुघ्न सिन्हा और पार्टी के निष्कासित सांसद राम जेठमलानी सहित विभिन्न दलों के नेताओं, चर्चित विधिवेत्ताओं और अलग-अलग क्षेत्रों के लोगों ने रविवार को राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को एक नई याचिका भेज कर उनसे मुंबई विस्फोट मामले के दोषी याकूब मेमन की मौत की सजा माफ करने का अनुरोध किया। याकूब अब्दुल रज्जाक मेमन की फांसी की सजा के अमल पर रोक का अनुरोध करने वाली नई याचिका में हस्ताक्षर करने वालों ने दावा किया कि मूलभूत और नए आधार हैं जिन पर गुणदोष को देखते हुए विचार किया जा सकता। उधर टाडा अदालत के जारी फांसी वारंट के अनुसार मेमन को 30 जुलाई को फांसी दी जानी है।

यह याचिका ऐसे समय दायर की गई है जब मेमन की फांसी पर बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। भाजपा ने मेमन की फांसी के खिलाफ राजनीतिक दलों की टिप्पणियों की निंदा करते हुए कहा है कि तुच्छ राजनीति के कारण बचाव किया जा रहा है। एक दिन पहले भी बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मिलकर उनकी तरीफ करने वाले भाजपा सांसद सिन्हा ने मेमन मामले में एक बार पार्टी के विपरीत रुख अपनाया है। पंद्रह पेज की याचिका में हस्ताक्षरकर्ताओं ने विभिन्न कानूनी बिंदुओं और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं का हवाला देते हुए दलील दी है कि मेमन को फांसी नहीं होनी चाहिए।

हस्ताक्षरकर्ताओं ने कहा है-हम महामहिम से याकूब अब्दुल रज्जाक मेमन के मामले पर विचार करने और उसे ऐसे अपराध में मौत की सजा से बचाने का अनुरोध करते हैं जिसकी साजिश देश को सांप्रदायिक आधार पर बांटने के लिए किसी और ने रची थी। याचिका में कहा गया है कि इस मामले में दया मंजूर करने से यह संदेश जाएगा कि यह देश आतंकवाद के किसी कृत्य को बर्दाश्त नहीं करेगा। लेकिन एक देश के तौर पर हम दया की शक्ति, माफी व न्याय के मूल्यों को समान तरह से लागू करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। रक्तपात और मौतों से यह देश सुरक्षित जगह नहीं बनेगा, इससे हम सभी का अपमान होगा।

सिन्हा और जेठमलानी के अलावा इस याचिका पर हस्ताक्षर करने वालों में मणिशंकर अय्यर (कांग्रेस), मजीद मेमन (राकांपा), सीताराम येचुरी (माकपा), डी राजा (भाकपा), केटीएस तुलसी और एचके दुआ (मनोनीत) और टीशिवा (द्रमुक) जैसे सांसदों, माकपा के पूर्व महासचिव प्रकाश करात, भाकपा (एमएल) लिबरेशन के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य, बृंदा करात (माकपा), नसीरुद्दीन शाह, महेश भट्ट, एमके रैना और तुषार गांधी जैसे लोग शामिल हैं।

याचिका पर विभिन्न शिक्षाविदों, कानूनी समुदाय के सदस्यों, कार्यकर्ताओं और न्यायमूर्ति पानचंद जैन, न्यायमूर्ति एचएस बेदी, न्यायमूर्ति पीबी सावंत, न्यायमूर्ति एच सुरेश, न्यायमूर्ति केपी शिवा सुब्रमण्यम, न्यायमूर्ति एसएन भार्गव, न्यायमूर्ति के चंद्रू और न्यायमूर्ति नागमोहन दास जैसे रिटायर जजों व प्रसिद्ध वकील इंदिरा जयसिंह ने भी हस्ताक्षर किए हैं। इस सूची में इरफान हबीब, अर्जुन देव, डीएन झा और सामाजिक कार्यकर्ताओं अरुणा राय, ज्यां द्रेज और जॉन दयाल जैसे शिक्षाविद भी शामिल हैं।

उन्होंने हवाला दिया है कि भारत मौत की सजा खत्म करने के लिए एक अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धता का हस्ताक्षरकर्ता है और इसलिए मौत की सजा भारत में लागू नहीं हो सकती। उन्होंने शबनम बनाम भारत सरकार व अन्य के 2015 के मामले का हवाला देते हुए कहा है कि याकूब मेमन को मौत वारंट पर सुनवाई के लिए पहले से नोटिस नहीं दिया गया और जिसके कारण वह और उसके वकील मौत वारंट जारी होने का विरोध नहीं कर पाए। सुनवाई के अभाव में यह मौत वारंट शून्य हो जाता है। इस मामले में कुछ बहुत परेशान करने वाले पहलू हैं जो याकूब मेमन की मौत की सजा को पूरी तरह से अनुचित, एकतरफा और बहुत ज्यादा बनाते हैं।

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