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RSS हेडक्‍वार्टर में प्रणब मुखर्जी: पूर्व राष्‍ट्रपति ने स्‍वयंसेवकों को पढ़ाया राष्‍ट्र, राष्‍ट्रवाद और देशभक्ति का पाठ

Pranab Mukherjee RSS Speech, RSS Event Nagpur: प्रणब अपना भाषण अंग्रेजी में दे रहे थे, मगर बीच-बीच में वह अपनी मातृभाषा बांग्ला के मुहावरों का इस्तेमाल भी कर रहे थे।

Pranab Mukherjee at RSS Event Nagpur: प्रणब मुखर्जी के संघ के कार्यक्रम में शामिल होने को लेकर बहुत विवाद हुआ है।

Pranab Mukherjee RSS Speech, RSS Event Nagpur: राष्ट्रपति बनने से पहले जिंदगी भर कांग्रेस के साथ रहे प्रणब मुखर्जी गुरुवार को नागपुर में राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ (RSS) के मुख्‍यालय पहुंचे। आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने गुलदस्‍ता भेंटकर मुखर्जी का स्‍वागत किया। दोनों नेता संघ के संस्‍थापक के.बी. हेडगेवार के जन्‍मस्‍थली पर गए, जहां पूर्व राष्‍ट्रपति ने उन्‍हें श्रद्धासुमन अर्पित किए। यहां की विजिटर्स बुक में मुखर्जी ने हेडगेवार को ‘भारत मां का एक महान सपूत’ बताया। संघ प्रमुख के उद्बोधन के बाद प्रणब मुखर्जी ने स्‍वयंसेवकों को राष्‍ट्र, राष्‍ट्रवाद और देशभक्ति के सिद्धांत के बारे में समझाया। पूर्व राष्‍ट्रपति ने ‘जय हिन्‍द, वंदेमातरम’ कहते हुए भाषण समाप्‍त किया।

सरल शब्दों में भारत की बहुलतावादी संस्कृति का बखान किया। उन्होंने आरएसएस काडर को बताया कि राष्ट्र की आत्मा बहुलवाद और पंथनिरपेक्षवाद में बसती है। पूर्वराष्ट्रपति ने प्रतिस्पर्धी हितों में संतुलन बनाने के लिए बातचीत का मार्ग अपनाने की जरूरत बताई। उन्होंने साफतौर पर कहा कि घृणा से राष्ट्रवाद कमजोर होता है और असहिष्णुता से राष्ट्र की पहचान क्षीण पड़ जाएगी। उन्होंने कहा, “सार्वजनिक संवाद में भिन्न मतों को स्वीकार किया जाना चाहिए।”

सांसद व प्रशासक के रूप में 50 साल के अपने राजनीतिक जीवन की कुछ सच्चाइयों को साझा करते हुए प्रणब ने कहा, “मैंने महसूस किया है कि भारत बहुलतावाद और सहिष्णुता में बसता है।” उन्होंने कहा, “हमारे समाज की यह बहुलता सदियों से पैदा हुए विचारों से घुलमिल बनी है। पंथनिरपेक्षता और समावेशन हमारे लिए विश्वास का विषय है। यह हमारी मिश्रित संस्कृति है जिससे हमारा एक राष्ट्र बना है।”

कार्यक्रम को लेकर हुए विवाद पर भागवत ने कहा, “सभी कोई इस देश में प्रणब मुखर्जी के व्यक्तित्व को जानते हैं। हम आभारी हैं कि हमें उनसे कुछ सीखने को मिला। कैसे प्रणबजी को बुलाया गया और कैसे वह यहां आए, यह बहस का मुद्दा नहीं है। संघ, संघ है, प्रणब, प्रणब हैं। प्रणब मुखर्जी के इस समारोह में शामिल होने पर कई तरह की बहस चल रही है, लेकिन हम किसी को भी अपने से अलग नहीं समझते हैं।”

देखें संघ का यह कार्यक्रम:

Live Blog

यहां पढ़ें Pranab Mukherjee at RSS Event Nagpur:

20:30 (IST) 07 Jun 2018
राष्‍ट्रीय महत्‍व के मुद्दों पर चर्चा बेहद जरूरी : प्रणब दा

मुझे समझ नहीं आता कि 1.3 बिलियन लोग 22 से ज्‍यादा भाषाएं और 1,600 से ज्‍यादा बोलियां बोलते हैं। 3 मुख्‍य एथनिक ग्रुप्‍स से आते हैं मगर एक सिस्‍टम, एक राष्‍ट्रध्‍वज, एक संविधान और एक पहचान, भारतीय के साथ रहते हैं। एक लोकतंत्र में, मेरा विश्‍वास है कि राष्‍ट्रीय महत्‍व के मुद्दों पर चर्चा बेहद जरूरी है। : प्रणब मुखर्जी, पूर्व राष्‍ट्रपति

20:24 (IST) 07 Jun 2018
राष्‍ट्रवाद किसी धर्म तक सीमित नहीं : मुखर्जी

जब बाल गंगाधर तिलक ने कहा, ''स्‍वराज्‍य मेरा जन्‍मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूंगा'' तो वह सिर्फ अपने लिए नहीं, भारत के हर व्‍यक्ति की बात कर रहे थे। ऐसा राष्‍ट्रवाद किसी धर्म, भाषा, समाज तक सीमित नहीं रहता। : प्रणब मुखर्जी, पूर्व राष्‍ट्रपति

20:18 (IST) 07 Jun 2018
इतिहास की क्‍लास दे रहे पूर्व राष्‍ट्रपति

पूर्व राष्‍ट्रपति विभिन्‍न साम्राज्‍यों का जिक्र करते हुए स्‍वयंसेवकों को समझा रहे हैं कि कैसे विभिन्‍न संस्‍कृतियों, शासकों ने हमारी आज की सभ्‍यता को प्रभावित किया है। दिल्‍ली सल्‍तनत पर मुगलों के हमले से लेकर अंग्रेजों के भारत पर कब्‍जे तक का जिक्र मुखर्जी ने किया है।

20:14 (IST) 07 Jun 2018
पूरी दुनिया हमारा परिवार : मुखर्जी

भारत एक राज्‍य था, जो कि यूरोप के राज्‍य के सिद्धांत से कहीं पहले था। भारत का मॉडल यूरोप के कई देशों के लिए प्रेरणा बना। हम पूरी दुनिया को एक परिवार की तरह देखते हैं और उनके अच्‍छे स्‍वास्‍थ्‍य की कामना करते हैं। संस्‍कृति और भाषा में भिन्‍नता भारत को विशिष्‍ट बनाती है। हम हमारे बहुलतावाद पर गर्व करते हैं, विविधता पर इतराते हैं। : प्रणब मुखर्जी, पूर्व राष्‍ट्रपति

20:11 (IST) 07 Jun 2018
प्रणब मुखर्जी ने बोलना शुरू किया

पूर्व राष्‍ट्रपति ने भाषण शुरू किया।

आज मैं यहां राष्‍ट्र, राष्‍ट्रवाद, देशभक्ति के कांसेप्‍ट को भारत के संबंध में स्‍पष्‍ट करना चाहूंगा। हमारी सभ्‍यता बेहद पुरानी है। बहुत सारे यात्री हमारे देश में ईसा पूर्व ही आ चुके थे। सभी ने भारत को बेहतरीन इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर वाला देश बताया है। शिक्षा के क्षेत्र में तक्षशिला, नालंदा जैसे विश्‍वविद्यालयों ने प्रकाश फैलाया। : प्रणब मुखर्जी, पूर्व राष्‍ट्रपति

20:05 (IST) 07 Jun 2018
यहां अनेक महापुरुष आते हैं : भागवत

संघ का काम केवल संघ का काम नहीं है, यह सबके लिए है। इसको देखने के लिए अनेक विचारों के महापुरुष आते रहते हैं। उनकी सूचनाओं पर हम विचार करते हैं। हमने जो पथ तय किया है, उसमें उसकी जो मदद होती है, स्‍वीकार करते हैं। प्रमाणिक लोगों में कुछ बात आड़े नहीं आती। जो सही है, उसका सब सही है। उनके मतों के आपस की चर्चा एक सुंदर संवाद बनता है। : मोहन भागवत, संघ प्रमुख

19:51 (IST) 07 Jun 2018
''माहौल बनाने वाले लोग चाहिए''

संघ सबको जोड़ने वाला संगठन है। क्‍योंकि संगठित समाज ही भाग्‍य परिवर्तन की पूंजी है। संगठन से एक विशिष्‍ठ व्‍यवहार अपेक्षित है। अंग्रेजी में कहते हैं 'डेमोक्रेटिक माइंड', उसके बिना संभव नहीं होता। आदतों को बनाए बिना स्‍वभाव नहीं बनता। समाज तो जो वातावरण बनेगा, उसके हिसाब से चलता है। वातावरण बनाने वाले लोग चाहिए। : मोहन भागवत, संघ प्रमुख

19:47 (IST) 07 Jun 2018
सब भारत माता के पुत्र : भागवत

राजनीतिक मतप्रवाह प्रणालियां पहले से रही है. लेकिन इस विविधता में हम भारत माता के पुत्र हैं। अपनी अपनी विविधता रखते हुए दूसरे की विविधता का सम्मान करना औऱ मिलकर रहना हमारी संस्कृति है। मत मतान्तर कुछ भी हो, सब भारत माता के पुत्र हैं। : मोहन भागवत

19:43 (IST) 07 Jun 2018
मुखर्जी के आने पर विवाद ठीक नहीं

संघ में प्रमुख व्यक्तियों को बुलाने की पुरानी परंपरा है। संघ सिर्फ हिन्दू नहीं पूरे समाज को संगठित करता है। भारत में जन्मा हर व्यक्ति भारत पुत्र है। प्रणब मुखर्जी के आने पर विवाद ठीक नहीं है। : मोहन भागवत 

19:40 (IST) 07 Jun 2018
संघ पूरे समाज को संगठित करना चाहता है: भागवत

हम निमंत्रण इसलिए देते हैं कि संघ वाले नाम से कोई प्रभावशाली समूह खड़ा करे, इस आशंका को लेकर संघ का काम नहीं चला है। संघ तो सम्‍पूर्ण समाज को संगठित करना चाहता है। वास्‍तव में किसी भारतवासी के लिए दूसरा कोई भारतवासी पराया नहीं। विविधता में एकता हजारों वर्षों से भारत की परंपरा रही है। : मोहन भागवत

19:37 (IST) 07 Jun 2018
इस कार्यक्रम पर इतना विवाद ठीक नहीं

आदरणीय प्रणब मुखर्जी इस वर्ग को देखने, संघ को समझने अपना समय व्‍यय करते हुए हमारे ऊपर स्‍नेह रखकर उपस्थित हुए। हम विभिन्‍न क्षेत्रों के लोगों को यहां आमंत्रित करते हैं। वे संघ का स्‍वरूप देखते हैं और फिर हम उनकी बातों को लेकर आगे बढ़ जाते हैं। इस बार इस कार्यक्रम की कुछ विशेष चर्चा चली। वास्‍तव में यह एक नित्‍य कर्म में होने वाला प्रसंग है। यह प्रति वर्ष जैसे होता है, वैसे ही हुआ है। : मोहन भागवत, संघ प्रमुख

19:23 (IST) 07 Jun 2018
पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी नागपुर स्थित स्मृति चिन्ह पर संघ के द्वितीय सरसंघचालक एम.एस. गोलवलकर को श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए

19:14 (IST) 07 Jun 2018
स्‍वयंसेवकों का उद्घोष
19:02 (IST) 07 Jun 2018
संघ के मंच पर प्रणब मुखर्जी

18:58 (IST) 07 Jun 2018
मुखर्जी की मौजूदगी में फहराया गया RSS का झंडा
18:48 (IST) 07 Jun 2018
केबी हेडगेवार को श्रद्धांजलि अर्पित करते मुखर्जी

Image tweeted by : RSS

18:34 (IST) 07 Jun 2018
मंच पर प्रणब मुखर्जी और मोहन भागवत मौजूद

RSS का कार्यक्रम शुरू हो गया है। मंच पर पूर्व राष्‍ट्रपति प्रणब मुखर्जी, संघ प्रमुख मोहन भागवत मौजूद हैं।

 

18:24 (IST) 07 Jun 2018
क्‍या है आरएसएस का ये कार्यक्रम

नागपुर में संघ के तृतीय वर्ष वर्ग में व्यवस्थित प्रशिक्षण हेतु 96 शिक्षक, 39 प्रांत प्रमुख एवं 120 प्रबंधक दिनरात कार्यरत रहे। संघ का तृतीय वर्ष 14 मई 2018 को नागपुर में आरंभ हुआ और उसमें 707 शिक्षार्थियों ने अपना प्रशिक्षण कार्यक्रम पूरा किया। पूरे देश से भाग लेने वालों में आए स्वयंसेवकों में 191 प्रोस्टग्रेजुएट और 375 स्नातक श्रेणी के स्वयंसेवक है।

18:20 (IST) 07 Jun 2018
प्रणब की बेटी ने क्‍या कहा

शर्मिष्ठा मुखर्जी ने बुधवार को ट्वीट कर कहा था, "उम्मीद है 'मुखर्जी' आज की घटना से समझ जाएंगे कि कैसे भाजपा की गंदी चालबाजी विभाग काम करती है।" उन्होंने सिलसिलेवार ट्वीट में कहा था, "यहां तक कि आरएसएस को भी उम्मीद नहीं होगी कि आप उनके विचारों का बखान करेंगे। लेकिन भाषणों को भुला दिया जागा, दृश्य बने रहेंगे और उसे फर्जी बयानों के साथ फैलाया जाएगा। नागपुर जाकर आप (मुखर्जी) भाजपा/आरएसएस को फर्जी कहानियां गढ़ने, फर्जी अफवाह फैलाने के लिए पूरी छूट दे रहे हैं और यह केवल शुरुआत है!"

18:12 (IST) 07 Jun 2018
कांग्रेसी नेताओं पर भड़के केंद्रीय मंत्री

केंद्रीय मंत्री किरण रिजीजू ने कांग्रेस द्वारा मुखर्जी के संघ के कार्यक्रम में जाने की आलोचना पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। रिजीजू ने ट्वीट में कहा, ''कांग्रेस पार्टी की 'सहनशीलता का प्रचार और व्‍यवहार में असहनशील' नीति की पोल खुल गई है। भारत में दो अलग-अलग विचारधाराएं क्‍यों नहीं रह सकतीं? निश्चित तौर पर कांग्रेस विचाराधारा-मुक्‍त (परिवार) पार्टी है।"

18:03 (IST) 07 Jun 2018
तो इसलिए मुखर्जी पर हमलावर हैं कांग्रेसी?

कांग्रेसी नेताओं के अचानक से प्रणब दा पर आक्रामक होने के पीछे की कहानी का खुलासा हुआ है। मुखर्जी की बॉस रह चुकीं सोनिया गांधी के निर्देश पर कांग्रेस ने प्रणब दा की आलोचना शुरू की। पार्टी सूत्रों का कहना है कि सोनिया के निर्देश पर ही कांग्रेस के रणनीतिकार अहमद पटेल ने 6 जून की रात को ट्वीट कर पूर्व राष्ट्रपति के कदम की आलोचना की थी। उन्होंने शर्मिष्ठा मुखर्जी के ट्वीट को रिट्वीट करते हुए लिखा था, ‘मुझे प्रणब दा से ऐसी अपेक्षा नहीं थी!’ सोनिया गांधी अपने पूर्व सहयोगी के कदम से खुश नहीं हैं।

पूरी खबर पढ़ें

सोन‍िया गांधी ने क‍िया इशारा तो प्रणब मुखर्जी पर हमलावर हुए कांग्रेसी नेता

17:44 (IST) 07 Jun 2018
मुखर्जी को आमंत्रण पर उठे विवाद पर संघ ने क्‍या कहा

"जो भी संघ को जानते हैं या समझते हैं, यह उनके लिए आश्चर्यजनक या नया नहीं है। यह उनके लिए सामान्य है, क्योंकि आरएसएस प्रसिद्ध लोगों और सामाजिक सेवा से जुड़े लोगों को बुलाता रहता है। इस बार, आरएसएस ने डॉ. प्रणब मुखर्जी को निमंत्रण दिया है और यह उनकी महानता है कि उन्होंने यह निमंत्रण स्वीकार किया है।" : आरएसएस नेता नरेंद्र कुमार

17:37 (IST) 07 Jun 2018
विज‍िटर्स बुक में पूर्व राष्‍ट्रपति ने क्‍या लिखा

केबी हेडगेवार के जन्‍मस्‍थल पर विजिटर्स बुक में प्रणब ने लिखा, ''आज मैं भारत मां के एक महान सपूत को सम्‍मान और श्रद्धांजलि देने यहां आया हूं।''

17:28 (IST) 07 Jun 2018
संघ संस्‍थापक केबी हेडगेवार के जन्‍मस्‍थल पहुंचे प्रणब और भागवत
17:10 (IST) 07 Jun 2018
प्रणब ने आखिरी भाषण में क्‍या कहा था

देश यह जानने के लिए उत्सुक है कि मुखर्जी आरएसएस मुख्यालय में गुरुवार को आखिर क्या कहेंगे। अगर उनके आखिरी बार दिए गए भाषण पर गौर करें तो राष्ट्रपति के तौर पर 2017 में दिया गया उनका अंतिम भाषण उनके पांच दशकों के राजनीतिक कार्यकाल के दौरान के उनके विचारों और चिंताओं को दर्शाता है। प्रणव ने अपने 2017 के इस संबोधन में कहा था, "मैं आपके साथ कुछ सच्चाई साझा करना चाहता हूं जिसका मैंने इस दौरान अनुभव किया है। भारत की आत्मा बहुलवाद और सहिष्णुता में बसती है। भारत केवल एक भौगोलिक जगह नहीं है। यह अपने में इतिहास के विचार, दर्शनशास्त्र, बुद्धि, औद्योगिक बुद्धिमत्ता, शिल्प, नवाचार और अनुभवों को समेटे हुए है। हमारे समाज की बहुलता दशकों से विचारों का आकलन करने के बाद उत्पन्न हुई है।"

17:02 (IST) 07 Jun 2018
RSS मुख्‍यालय पहुंचे मुखर्जी, मोहन भागवन ने की अगवानी
16:58 (IST) 07 Jun 2018
प्रणब के संघ के कार्यक्रम में शिरकत करने के खिलाफ बोली बेटी

प्रणब मुखर्जी की बेटी शर्मिष्‍ठा ने पिता के इस फैसले पर हैरानी जताई है। उन्‍होंने ट्विटर पर लिखा, ''‘उम्मीद करती हूं कि आज की घटना से प्रणब मुखर्जी को इस बात का एहसास होगा कि बीजेपी का डर्टी ट्रिक्स डिपार्टमेंट किस तरह काम करता है। यहां तक कि आरएसएस को भी नहीं पता होगा कि आप अपने भाषण में उसके विचारों को बढ़ावा देने वाले हैं। हालांकि, लोग भाषण को भूल जाएंगे और तस्वीरें याद रह जाएंगी जिन्हें फर्जी बयानों के साथ सर्कुलेट किया जाएगा।’

बेटी ने प्रणब मुखर्जी से कहा- नागपुर जाकर आपने बीजेपी, आरएसएस को दिया प्रोपेगंडा का मौका