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फायरब्रांड इमेज ने दिलाया था पहला चुनावी टिकट, ममता दीवारों पर खुद लिखती थीं स्लोगन, रात में लेफ्ट के ऊपर चिपका देती थीं अपना पोस्टर

ममता बनर्जी की लगन के बारे में जिक्र करते हुए प्रणब मुखर्जी ने कहा था कि 'मैंने देखा कि वो दूसरे उम्मीदवारों से ज्यादा कड़ी मेहनत करती थी।

ममता बनर्जी के जुझारूपन को देख सभी नेता दंग थे।

बात 1984 की है। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या हो चुकी थी। उनकी जगह उनके बेटे राजीव गांधी देश के नए पीएम थे। आगामी लोकसभा चुनाव को देखते हुए राजीव गांधी करीबन सभी राज्यों में युवा चेहरे की तलाश कर रहे थे। पश्चिम बंगाल में जाधवपुर लोकसभा क्षेत्र के लिए किसी युवा चेहरे की तलाश कांग्रेस कर रही थी। कई क्षत्रपों के इनकार के बाद पश्चिम बंगाल के नेता सुब्रत मुखर्जी ने युवा नेता ममता बनर्जी का नाम एक लड़ाका के तौर पर पेश करते हुए प्रणब मुखर्जी को सुझाया था।

Shutapa Paul ने अपनी किताब ‘DIDI THE UNTOLD MAMTA BANERJEE’ में लिखा है कि प्रणब मुखर्जी से ममता बनर्जी की मुलाकात साल 1983 में कोलकाता में आयोजित ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी की मीटिंग में हुई। इस बैठक को सफल बनाने और कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं का ध्यान रखने की जिम्मेदारी ममता बनर्जी को दी गई थी। ममता बनर्जी ने दिन-रात एक कर काम किया और उनकी लगन देखकर उस वक्त प्रणब मुखर्जी ने भी माना था कि वो एक फाइटर हैं। प्रणब मुखर्जी की सिफारिश पर ही ममता बनर्जी को जाधवपुर सीट से प्रत्याशी बनाया गया था।

ममता बनर्जी के जुझारूपन की प्रशंसा सभी करते हैं। निडर ममता उन दिनों अक्सर रात के वक्त कोलकाता में दीवारों पर एंटी-लेफ्ट पोस्टर्स चिपकाती रहती थीं। हालांकि सुबह कम्यूनिस्ट कार्यकर्ता इन पोस्टरों को फाड़ देते थे…लेकिन अगली ही सुबह कम्यूनिस्ट कार्यकर्ताओं को यह पोस्टर फिर से वहां चस्पा मिलता था..क्योंकि रात को ममता खुद यह पोस्टर्स चिपका जाती थीं। ममता बनर्जी के इसी जुझारूपन ने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को आकर्षित किया और प्रणब मुखर्जी ने जाधवपुर से चुनाव लड़ने के लिए उनके नाम पर मुहर लगा दी।

उस चुनाव में प्रणब मुखर्जी ने ममता बनर्जी के लिए कैंपेन भी किया था। ममता बनर्जी की लगन के बारे में जिक्र करते हुए प्रणब मुखर्जी ने कहा था कि ‘मैंने देखा कि वो दूसरे उम्मीदवारों से ज्यादा कड़ी मेहनत करती थी। वो खुद अपने पोस्टर्स लिखती थी….वो दीवारों पर भी खुद से लिखती थी…वो काफी मेहनती थी और लोगों से आसानी से घुल-मिल जाती थी…वो लोगों का नब्ज पढ़ लेती थी और वो लोगों के बीच फायरब्रांड बन गई थीं।’

जाधवपुर संसदीय सीट से लेफ्ट के दिग्गज नेता सोमनाथ चटर्जी के खिलाफ चुनाव लड़ने के लिए ममता बनर्जी का नाम तय होने के बाद नॉमिनेशन की स्क्रूटनी के वक्त जब सोमनाथ चटर्जी की मुलाकात ममता बनर्जी से हुई तब दीदी ने अपने प्रतिद्वंदी के पैर छुए थे हालांकि सोमनाथ चटर्जी ने उस वक्त हाथ बढ़ाकर उन्हें आशीर्वाद नहीं दिया था।

प्रचार के दिनों में ममता बनर्जी खुद डोर-टू-डोर जाकर मतदाताओं से वोट मागा करती थी…वो रोज कैंपेन करती थीं और हर रोज मीटिंग लिया करती थीं। इस चुनाव में ममता बनर्जी जाधवपुर से 19,660 वोटों से जीती थीं। जीत के बात वो देश के लोकतांत्रिक इतिहास की पहली सबसे कम उम्र की महिला सांसद बनी थीं।

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