Pranab Mukherjee at RSS headquarter Narhari Narayan Bhide wrote RSS prayer Namaste Sada Vatsale Maatrbhoome - प्रार्थना के बिना खत्म नहीं होती है संघ की शाखा, संस्कृत के प्रोफेसर ने की थी 'नमस्ते सदावत्सले मातृभूमे' की रचना - Jansatta
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प्रार्थना के बिना खत्म नहीं होती है संघ की शाखा, संस्कृत के प्रोफेसर ने की थी ‘नमस्ते सदावत्सले मातृभूमे’ की रचना

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यक्रम में प्रार्थना का बहुत महत्व है। संघ की शाखा का समापन 'नमस्ते सदावत्सले मातृभूमे' प्रार्थना से ही होती है। इसकी रचना संस्कृत के प्रोफेसर नरहरि नारायण भिड़े ने की थी।

डॉक्टर केशव बलिराम हेडगेवार ने 1925 में आरएसएस की स्थापना की थी।

देश के पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के कार्यक्रम में शरीक होने से कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व असहज है। इसे संघ की विचारधारा की बढ़ती स्वीकार्यता के तौर पर भी देखा जा रहा है। संघ के नागपुर स्थित मुख्यालय में गुरुवार (7 जून) को प्रणब दा की मौजूदगी में आरएसएस की प्रार्थना ‘नमस्ते सदावत्सले मातृभूमे’ का पाठ किया गया। इस मौके पर पूर्व राष्ट्रपति के साथ संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत भी मौजूद थे। आरएसएस के लिए इस प्रार्थना की रचना आज से तकरीबन 79 साल पहले संस्कृत के प्रोफेसर नरहरि नारायण भिड़े ने की थी। प्रोफेसर भिड़े ने इसकी रचना डॉ. केवी. हेडगेवार और माधव सदाशिव गोलवलकर के निर्देशन में किया था। हालांकि, इसे सार्वजनिक तौर पर 18 मई, 1940 को नागपुर के संघ शिक्षा वर्ग में पहली बार गाया गया था। प्रार्थना को सबसे पहले संघ प्रचारक यादव राव जोशी ने गाया था। बता दें कि प्रणब दा संघ शिक्षा वर्ग के समापान समारोह में शिरकत करने ही नागपुर गए हुए हैं। पूरी प्रार्थना संस्कृत में है। सिर्फ आखिरी पंक्ति में हिंदी में ‘भारत माता की जय’ लिखा है। आरएसएस की गतिविधि दैनिक शाखा के जरिये संपन्न होती है। शाखा का समापन इसी प्रार्थना के माध्यम से होता है। प्रार्थना के बिना किसी भी शाखा का समापन नहीं होता है।

प्रणब मुखर्जी के आरएसएस के कार्यक्रम में शामिल होने से कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व असहज है। कई नेताओं ने पूर्व राष्ट्रपति के इस कदम की आलोचना की है। कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं ने प्रणब दा से आरएसएस के कार्यक्रम में न शामिल होने का अनुरोध किया था। उनकी बेटी शर्मिष्ठा मुखर्जी ने भी इसको लेकर सार्वजनिक तौर पर अपना ऐतराज व्यक्त किया था। असम के कांग्रेस प्रमुख रिपुन बोरा ने बकायदा दो पृष्ठों का पत्र लिखकर प्रणब मुखर्जी से आरएसएस के कार्यक्रम में न जाने का अनुरोध किया था। उन्होंने इसके तीन कारण भी बताए थे। हालांकि, पूर्व राष्ट्रपति ने इससे पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि वह जो बोलेंगे नागपुर में ही बोलेंगे। इसके बावजूद कांग्रेस नेताओं की ओर से प्रतिक्रियाओं के आने का सिलसिला समाप्त नहीं हुआ।

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