पेगासस लिस्ट में नाम से फिर चर्चा में प्रह्लाद पटेल, जानिए छात्र नेता से मंत्री बनने तक का सफर

पेगासस लिस्ट में विपक्ष के नेताओं के साथ मोदी कैबिनेट के दो मंत्रियों के नाम सामने आने से सियासी गहमा गहमी तेज हो गई है। जानकारी के मुताबिक इस लिस्ट में केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव और प्रह्लाद सिंह पटेल का नाम शामिल है।

पेगासस लिस्ट में प्रह्लाद पटेल का नाम सामने आया है। Photo Source- Indian Express

इरम सिद्दीकी, दिव्या ए
पेगासस लिस्ट में विपक्ष के नेताओं के साथ मोदी कैबिनेट के दो मंत्रियों के नाम सामने आने से सियासी गहमा गहमी तेज हो गई है। जानकारी के मुताबिक इस लिस्ट में केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव और प्रह्लाद सिंह पटेल का नाम शामिल है। पेगासस लिस्ट में आने से पहले प्रह्लाद पटेल का नाम एक और लिस्ट के कारण चर्चा में था। यह लिस्ट मोदी कैबिनेट विस्तार की थी। मध्य प्रदेश के दमोह से सांसद पटेल को कैबिनेट मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के अधीन जल शक्ति मंत्रालय में पर्यटन और संस्कृति मंत्रालय से भेजा गया है, जहां वे स्वतंत्र कार्यभार संभाल रहे थे। इस बदलाव को उनके डीमोशन के तौर पर देखा जा रहा है।

रिपोर्ट के अनुसार प्रह्लाद पटेल से जुड़े दर्जन भर से अधिक लोगों के नंबरों की भी जासूसी की जा रही थी। इसमें उनके परिवार के सदस्यों के अलावा उनके एडवाइजर, कुक और गार्डनर जैसे स्टाफ भी शामिल हैं। पेगासस लिस्ट में उनका नाम 2019 मध्य के बाद जोड़ा गया है जब वह मोदी कैबिनेट में शामिल किए गए थे। कुछ दिनों की चुप्पी के बाद पटेल ने इस पर हैरानी जताते हुए कहा कि मैं इतना बड़ा आदमी नहीं हूं कि मेरी जासूसी की जाए।

प्रह्लाद पटेल का राजनीतिक करियर छात्र नेता से शुरू हुआ था। उन्होंने मध्य प्रदेश के जबलपुर विश्वविद्यालय में छात्र संघ अध्यक्ष का चुनाव जीतकर सबका ध्यान अपनी तरफ खींचा था। इसके बाद वह मोदी और वाजपेयी सरकार में मंत्री रहे हैं। प्रह्लाद पटेल का राजनीतिक करियर बेहद उतार चढ़ावों से भरा रहा है।

भाजपा में प्रवेश: प्रह्लाद पटेल ने छात्र राजनीति से निकलकर पार्टी पॉलिटिक्स में कदम रखा तो उन्हें सिवनी जिले में भाजपा युवा विंग का जिला प्रभारी बना दिया गया। बाद में यहीं से उन्होंने अपना पहला लोकसभा चुनाव 1989 में निर्दलीय के रूप में लड़ा था। जीत मिलते ही उन्हें भाजपा में प्रवेश मिल गया था।

उमा भारती के साथ दिग्विजय सिंह को सत्ता से किया बेदखल: साल 2003 में जब उमा भारती की अगुवाई में दिग्विजय सिंह की एक दशक पुरानी कांग्रेस सरकार को सत्ता से बेदखल कर दिया था, तो पटेल को राज्य स्तर पर पहचाना जाने लगा। अपनी तेज-तर्रार छवि के चलते ही वह अटल बिहारी वाजपेयी की पसंदीदाओं में शुमार होने लगे और बाद उन्हें वाजपेयी सरकार में कोयला मंत्री बना दिया गया। यहां से वह राज्य से निकलकर केंद्र की तरफ बढ़ चले।

शिवराज विरोधी माने जाते हैं पटेल: प्रह्लाद पटेल को शिवराज विरोधी खेमे का नेता भी माना जाता है। साल 2005 में जब उमा भारती पर दंगों के आरोप लगे तो पार्टी ने शिवराज सिंह चौहान को मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी दे दी। जिसके बाद भारती ने साल 2005 में अपना राजनीतिक दल, भारतीय जनशक्ति पार्टी बनाया। पटेल ने बगावती तेवर दिखाते हुए उमा भारती का साथ दिया। उनके इस कदम के बाद से वह शिवराज विरोधी माने जाने लगे।

कुछ ही समय के बाद पटेल के उमा भारती के साथ पार्टी नियंत्रण को लेकर मनमुटाव होने लगे और वह 2009 में फिर से पार्टी में लौट आए। साल 2014 में नरेंद्र मोदी की गुवाई में दमोह लोकसभा सीट से चुनाव जीता और 2019 में भी अपनी सीट बरकरार रखी।

बालू खनन में शामिल है परिवार: प्रह्लाद पटेल के परिवार का नरसिंहपुर में खासा दबदबा माना जाता है। यहां इनका परिवार बालू खनन के व्यापार से जुड़ा हुआ है। पटेल के बेटे प्रबल और उनके छोटे भाई जमाल सिंह पटेल के बेटे मोनू पर बालू खनन व्यापारी से लड़ाई में अटेम्प्ट-टु-मर्डर यानी कि हत्या का प्रयास का मामला दर्ज है। इतना ही नहीं प्रह्लाद के भाई जमाल पटेल, नरसिंहपुर से ही विधायक हैं और उन पर भी हत्या के प्रयास और दंगा कराने के मामले दर्ज हैं।

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