PMGKY के तहत नवंबर के बाद मुफ्त में नहीं मिलेगा राशन? केंद्रीय खाद्य सचिव ने कही यह बात

खाद्य सचिव सुधांशु पांडे का कहना है कि हमारी इकोनॉमी में सुधार हो रहा है, ऐसे में इस अन्न योजना के विस्तार की कोई योजना नहीं है।

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केंद्र सरकार बीते साल से ही प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत गरीबों को मुफ्त राशन उपलब्ध करवा रही है। (Photo- Indian Express File)

प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत नवंबर के बाद मुफ्त में राशन मिलने को लेकर स्थिति साफ नहीं हो पा रही है। ऐसे में ये आशंका जताई जा रही है कि शायद गरीबों को नवंबर के बाद मुफ्त राशन नहीं मिल पाएगा।

दरअसल इस बारे में शुक्रवार को खाद्य सचिव सुधांशु पांडे ने कहा है कि इस स्कीम के तहत नवंबर के बाद गरीबों को राशन दिए जाने का फिलहाल कोई प्रस्ताव नहीं है।

गौरतलब है कि केंद्र सरकार बीते साल से ही प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत गरीबों को मुफ्त राशन उपलब्ध करवा रही है, ऐसे में अगर नवंबर के बाद गरीबों को राशन नहीं मिला तो उनके सामने पेट भरने का संकट खड़ा हो जाएगा।

जून 2021 में ही पीएम ने ये कहा था कि इस स्कीम को नवंबर तक के लिए बढ़ाया जाएगा। उन्होंने 30 जून को दिए अपने भाषण में कहा था कि 8 महीने में मुफ्त राशन को बांटने में सरकार को कुल 1.5 लाख करोड़ रुपए खर्च करने पड़े हैं।

वहीं इस मामले में खाद्य सचिव सुधांशु पांडे का कहना है कि हमारी इकोनॉमी में सुधार हो रहा है, ऐसे में इस अन्न योजना के विस्तार की कोई योजना नहीं है।

खाद्य सचिव से जब बढ़ती हुई महंगाई और खाद्य तेल के दामों में बढ़ोतरी पर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि दाम कम हो रहे हैं, कई राज्यों में 7 से 20 रुपए तक दामों में कमी आई है।

बता दें कि सरकार तेल के दामों में कटौती की कोशिश कर रही है, लेकिन अभी भी इसकी कीमत 200 रुपए प्रति लीटर से ज्यादा है।

खाद्य सचिव ने ये भी बताया कि प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत कितना लाभ लोगों तक पहुंचा है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार लगभग 793.9 मिलियन लाभार्थियों को प्रति व्यक्ति प्रति माह 5 किलो मुफ्त खाद्यान्न दे रही है। कोरोना काल में लोगों को इसका काफी फायदा मिला है।

बता दें कि पीएमजीकेएवाई के तहत सरकार 80 करोड़ राशन कार्डधारकों को मुफ्त राशन देती है। राशन की दुकानों के माध्यम से उन्हें सब्सिडी वाले अनाज के अतिरिक्त मुफ्त राशन दिया जाता है।

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