जम्मू-कश्मीर में बिजली उपभोक्ताओं को बड़ा झटका लगा है। उमर अब्दुल्ला सरकार ने ज्वाइंट इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन (JERC) ने बिजली की दरों में औसतन 6.83 फीसदी बढ़ोतरी को मंजूरी दी है। नई दरें 1 सितंबर 2026 से लागू होंगी और 31 मार्च 2027 तक प्रभावी रहेंगी।
बिजली की दरों में बढ़ोत्तरी का असर जम्मू-कश्मीर पावर डिस्ट्रीब्यूशन कॉरपोरेशन लिमिटेड (JPDCL) और कश्मीर पावर डिस्ट्रीब्यूशन कॉरपोरेशन लिमिटेड (KPDCL) के उपभोक्ताओं पर पड़ेगा।
घरेलू उपभोक्ताओं के लिए क्या बदलेगा?
नई दरों के तहत 200 यूनिट प्रतिमाह तक बिजली खपत करने वाले घरेलू उपभोक्ताओं के लिए बिजली की दर 2.30 रुपये से बढ़कर 2.45 रुपये प्रति यूनिट हो जाएगी। 201 से 400 यूनिट तक की खपत पर दर 4 रुपये से बढ़कर 4.20 रुपये प्रति यूनिट और 400 यूनिट से ज्यादा खपत पर 4.35 रुपये से बढ़कर 4.60 रुपये प्रति यूनिट हो जाएगी।
उमर अब्दुल्ला सरकार ने फिक्स्ड चार्ज भी 8 रुपये से बढ़कर 10 रुपये प्रति किलोवाट प्रति माह कर दिया गया है। हालांकि, गरीबी रेखा से नीचे (BPL) आने वाले उपभोक्ताओं की दर में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है। उनके लिए दर 1.40 रुपये प्रति यूनिट ही रहेगी।
करीब चार साल बाद बढ़े दाम
JERC के मुताबिक, जम्मू-कश्मीर में करीब चार वर्षों से बिजली दरों में वास्तविक बढ़ोतरी नहीं हुई थी। इससे पहले अक्टूबर 2022 में ऐसी बढ़ोतरी हुई थी जिसका उपभोक्ताओं के बिल पर सीधा असर पड़ा था।
नवंबर 2023 में 15 फीसदी की बढ़ोतरी की गई थी लेकिन बाद में उतनी ही राशि की बिजली ड्यूटी वापस ले ली गई थी जिससे बिल पर इसका असर खत्म हो गया। वित्त वर्ष 2024-25 और 2025-26 में भी सामान्य टैरिफ बढ़ोतरी नहीं की गई और सरकार ने अतिरिक्त सब्सिडी के जरिए लागत के अंतर को पूरा किया।
बिजली खरीद की लागत बढ़ने का हवाला
JPDCL और KPDCL की संयुक्त राजस्व जरूरत करीब 29 फीसदी बढ़कर लगभग 7959 करोड़ रुपये से 10276 करोड़ रुपये हो गई है। इसकी प्रमुख वजह NTPC, NHPC और अन्य बिजली उत्पादकों से केंद्रीय स्तर पर खरीदी जाने वाली बिजली की बढ़ी लागत बताई गई है।
JERC ने उपभोक्ता श्रेणियों को भी 13 से घटाकर 10 और सब-कैटेगिरी को 47 से घटाकर 25 कर दिया है। समान स्लैब को मिलाकर यह बदलाव किया गया है।
सरकार अब भी बिजली लागत का बड़ा हिस्सा उठा रही
टैरिफ बढ़ोतरी के बाद भी उपभोक्ताओं से बिजली की वास्तविक आपूर्ति लागत का पूरा भुगतान नहीं लिया जा रहा है। JERC के मुताबिक बिजली की औसत आपूर्ति लागत करीब 6.87 रुपये प्रति यूनिट है जबकि उपभोक्ताओं से औसतन करीब 5.25 रुपये प्रति यूनिट ही वसूले जा रहे हैं।
केंद्र शासित प्रदेश की सरकार इस साल करीब 2,420.78 करोड़ रुपये की सब्सिडी देगी जो कुल लागत का लगभग 24 फीसदी है। इसके अलावा JPDCL और KPDCL पर केंद्रीय बिजली उत्पादकों का करीब 4751 करोड़ रुपये का बकाया भी है।
पंजाब, हिमाचल और दिल्ली से तुलना
बढ़ोतरी के बाद भी जम्मू-कश्मीर में शुरुआती घरेलू बिजली दर 2.45 रुपये प्रति यूनिट है जो हिमाचल प्रदेश के 4.71 रुपये, पंजाब के 3.85 रुपये और चंडीगढ़ के 2.80 रुपये प्रति यूनिट से कम है। दिल्ली में यह दर 3 रुपये प्रति यूनिट है। हालांकि वहां वैरिएबल सरचार्ज भी लागू होता है।
JERC के अनुसार, जम्मू-कश्मीर में बिजली दरें कम रहने की एक बड़ी वजह सरकार की ओर से दी जाने वाली सब्सिडी है।
PDP सड़क पर उतरने की तैयारी में
बिजली टैरिफ में बढ़ोतरी को लेकर पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) जल्द ही विरोध प्रदर्शन करने की तैयारी में है। पार्टी श्रीनगर में इस फैसले के खिलाफ सड़कों पर उतरने की बात कह चुकी है।
वहीं नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) ने चुनाव के दौरान गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले परिवारों को 200 यूनिट मुफ्त बिजली देने का वादा किया था। ऐसे में बिजली दरों में यह बढ़ोतरी सरकार के लिए राजनीतिक तौर पर भी चुनौती बन सकती है।
