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‘भारत में गरीबी टैक्‍स-फ्री फिल्म है’- मजदूरों के पलायन पर क्‍या कहती है जनता, पढ़ें…

Coronavirus in India Latest News: भूखे-प्‍यासे मजदूरों की मजबूरी की पैदल यात्रा का जिम्‍मेदार कौन? पैदल सैकड़ों किलोमीटर की यात्रा पर चल पड़े हजारों मजदूर: मजबूरी या लापरवाही

कोरोना वायरस के चलते मजदूरों का पलायन जारी। (PTI Photo)

Coronavirus in India Today: मजबूरी या लापरवाही देश में कोरोना का कहर अभी बढ़ता ही जा रहा है। इससे लड़ने के लिए 25 मार्च से पूरे देश में लॉकडाउन है। इस दौरान 130 करोड़ की आबादी को यथासंभव घरों में ही रहने के लिए ही कहा गया है। लेकिन, देश के तामम बड़े शहरों से मजदूरों का कारवां अपने-अपने गांवों के लिए निकल पड़ा है। भूखे-प्‍यासे, पैदल, औरतों-बच्‍चों को लेकर…बस किसी तरह घर पहुंच जाने का जुनून लेकर। उनका यह कदम लॉकडाउन के मकसद को कमजोर कर रहा है।

मजदूरों के इस हाल की खबर मीडिया में आने के बाद कई नेता भी आगे आए और कई लोग और संस्‍थाएं भी जगह-जगह उनकी मदद करने लगे। लेकिन मजबूरी और इंसानियत भरे इन कदमों से कोरोना के खिलाफ लड़ाई में चुनौती बढ़ रही है। इस बीच, सवाल यह भी उठने लगे कि इस हालत का जिम्‍मेदार कौन है? मजदूरों का धैर्य खो देना या सरकार की लापरवाही व अनदेखी?

कई लोग मानते हैं कि मजदूरों को वे जहां थे, वहीं रहना चाहिए था। लेकिन, समस्‍या यह है कि वे जहां थे वहां उनका काम बंद हो गया, राशन वाले ने राशन देना बंद कर दिया, मकान मालिकों ने कमरे खाली करने का फरमान सुना दिया। सरकार ने कहा कि उनके लिए व्‍यवस्‍था की जाएगी, लेकिन यह सुनिश्‍च‍ित कैसे होगा, इसे लेकर कोई स्‍पष्‍टता या भरोसा नहीं था।

कुछ लोग कहते हैं कि जब कोराना के संकट से जूझ रहे अन्‍य देशों में फंसे भारतीयों को सरकार देश ले आई तो देश के बड़े शहरों में फंसे मजदूरों को भी घर पहुंचाने का इंतजाम होना चाहिए था। इस मुद्दे और इससे जुड़े सवालों पर जनसत्‍ता.कॉम के पाठकों की राय हमने जाननी चाही। फेसबुक के जरिए। कुछ पाठकों की राय हम यहां जस का तस रख रहे हैं:

Pradeep Kumar लिखते हैं- No plan. Government is not in position to do something. It’s too late. But be positive and try to help. God is great he will take care of these people
Satchida Nanda Mohanty: If this people registered in local authorities then govt will able to send their respective place. If not registered how can govt send , it is not possible to search every people on road side

Devendra Singh Chauhan: यह फिर से जल्दबाजी में लिया गया निर्णय है लोकडाउन करना ही था पहले लोगों को उनके घर में सुरक्षित तो पहुचने देना चाहिए था आज यह लोग अपने घर जाने को 100 //200 किलोमीटर पैदल यात्रा करने को मजबूर हैं क्या इन के लिए वाहन की व्यवस्था करना सरकार की जिम्मेदारी नहीं है यह भी इन्सान हैं इनके सीनों के अन्दर भी तुम्हारी ही तरह दिल धड़क रहा है

Abbas Naqvi: Modi goverment made lockdown same pattern of demonetization Never thought about poor and daily wages workers

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Sanjay Mishra: थोडा सब्र लोगो को भी करना चाहिए, जो जिन्हें विदेश से लाया गया उनको पूछो , कोई अनान फानन में नहीं लाए गए। पैदल जाने वालो का भी ख्याल किया जाएगा , समय लगेगा, घर पर शादी हो तो घर वाले कितने परेशान हो जाते है। और अभी तो इतनी बड़ी आफत आई है थोड़ी बहुत परेशानी तो होगी।

Jitender Saroha: In India poorness is tax-free film. Every Govt play a game like Congress to defeat poorness but love rich people who brings problems for India

आप भी लिख सकते हैं अपना कमेंट, ये रहा लिंक:

Deepa Tyagi: Sabko pahunchane ki vyavastha ki Jaye .lockdown se 4-5 days pahale announce karna that .Garibo ki liye free trains and buses chalana that 4-5 days me liye jisase bheed na ho .
Vikas Mogha: वो #मजदूर है, लॉक डाउन में केवल #मजबूर है। उसकी और उसके छोटे बच्चों की इच्छा शक्ति एवं क्षमता हगने के लिए भी मोटर साइकिल का इस्तेमाल करने वाले आत्मकेंद्रित मीडिल क्लास से बहुत बड़ी है। जब वह सैकड़ों किलोमीटर पैदल चल सकते है तो अवसर मिलने पर 02 टाइम के खाने और ठिकाने के लिए बदन तोड़ मेहनत कर सकते।
Bhupinder Singh Dhaliwal: केंद्रीय सत्ता ने निर्णय लेने की क्षमता नहीं छोड़ी और ने ही ऐसे प्रबंधक अपने पास रख छोड़े हैं जो इस प्रकार की स्थितियों में सभी बिंदुओं को समझकर उन पर विचार विमर्श लंबा करने की अपेक्षा तुरंत समाधान लागू करें
Prakash Gusain: बीमारी अमीर ला रहे है लाठी गरीब खा रहे है यही जोश एयरपोर्ट पर दिखाते तो आज आम आदमी सड़क पर लाठी ना खाते।
Om Prakash Sharma: Sarkar ney jab note bandi ki thi tab bhi Unorganised labour key barey mey nahi socha tha. Lock down karney per bhi nahi socha. Ye sarkar garibo key liy nahi sirf punjipatiyo aur dhannasetho ki bhalie key liye sochti hai. Garib ko marna hai ghar mey bhuk sey ya bahar karona sey.
Jitendra Manawat: International. Level par apni tdbaa bda rhe hai jab ghar k logo ko bhi dekha jaruri hai jo corana pidit nhi hai Jo other country se aae unhe corona ho skta inhe nhi Sarkar k duwara bda kadm utha kar inhe apni tak phuchane ka rasta. Dhundha jaae
Amit Yadav: गरीब की कोई सुनने वाला नहीं है साहब। ये ‘अल्ट्रा रिच क्लास’ लोगों की लायी हुई बीमारी है हिन्दुस्तान में, उन पर तुम्हारा कोई जोर नहीं चला और गरीब भूखा पैदल चल रहा है हजारों किलोमीटर।
Sugan Prajapat: Garibo ki koi nahi sunta h sirf bhagwan bharose hote jo hoga dekha jayega garib to yahi soch ke jeevan bitate phir tension to amiro ko hogi unke crore o rupya kya hoga par garib ke pas kya hota h ek yeh jism h jo bhi es corona ke dar se ja skta h dekhte ab to last hare ka sahara baba shyam hi h
Brijesh Aanand: Aaye din sadko par badhal aur bhookhe pyase majdooro ke tasvir dekhne par man vichlit ho raha hai, sarkar jald se jald inlogo ko unke ghar tak chhode.

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