विश्व परिक्रमा: तो ‘बाजार पूंजीवाद’ महामारी में नाकाम हो गया?

फ्रांसिस ने एक बार फिर से अर्थव्यवस्था के उस ‘ट्रिकल डाउन’ सिद्धांत को खारिज कर दिया, जो आर्थिक विकास के लाभ ऊपर से नीचे रिस-रिस कर जाने की बात करता है।

पोप फ्रांसिस।

अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह सवाल उठने लगे हैं कि बाजार पूंजीवाद किसी संकट से निपटने में कितना सक्षम और समर्थ है। क्या वह किसी महामारी और प्राकृतिक आपदा से सफलतापूर्वक निपट सकता है। अगर पोप फ्रांसिस की माने तो उत्तर है नहीं। पोप का कहना है कि कोरोना विषाणु महामारी ने यह साबित कर दिया है कि बाजार पूंजीवाद के ‘चमत्कारी सिद्धांत’ नाकाम हो गए हैं। विश्व को एक नई तरह की राजनीति की जरूरत है, जो वार्ता एवं एकजुटता को बढ़ावा दे तथा हर कीमत पर युद्ध को खारिज करे।

फ्रांसिस ने महामारी के बाद की दुनिया के लिए अपना दृष्टि पत्र जारी किया। इसमें उनकी सामाजिक शिक्षाओं के मूल तत्वों को समाहित किया गया है। इसे ‘सभी भाई हैं’ शीर्षक दिया गया है। इस पत्र के शीर्षक ने विवाद छेड़ दिया है, क्योंकि इसमें ‘फ्रेटेली’ (भाई) शब्द का जिक्र है, जो लैंगिक समानता के अनुरूप नहीं है। हालांकि, वेटिकन ने कहा कि यह शब्द लैंगिक समावेशिता वाला है और यह दस्तावेज महिलाओं का भी समावेशन करता है। इसमें, फ्रांसिस ने वैध रक्षा के साधन के रूप में युद्ध को सही ठहराने वाले कैथोलिक चर्च के सिद्धांत को भी खारिज कर दिया।

फ्रांसिस ने लिखा, ‘कोविड-19 संकट से निपटने के लिए विभिन्न देशों के अलग-अलग तरीकों के अलावा, साथ मिल कर काम करने की उनकी अक्षमता सुस्पष्ट रूप से दिखी है। उन्होंने इस बात का जिक्र किया कि महामारी के कारण करोड़ों लोगों की नौकरियां चले जाना इस बात की जरूरत पर जोर देता है कि नेताओं को अवश्य ही जन आंदोलनों, मजदूर संघों और हाशिये पर मौजूद समूहों के हितों का ध्यान रखना चाहिए तथा कहीं अधिक न्यायपूर्ण सामाजिक एवं आर्थिक नीतियां बनानी चाहिए।

उन्होंने लिखा, ‘महामारी के कारण विश्व व्यवस्था के कमजोर पड़ जाने ने यह प्रदर्शित किया है कि हर चीज का हल बाजार की स्वतंत्रता से नहीं किया जा सकता।’ यह जरूरी है कि एक अतिसक्रिय आर्थिक नीति हो, जो एक ऐसी अर्थव्यवस्था की ओर ले जाती हो जो सार्थक विविधता और कारोबार सृजन की ओर ले जाए तथा नौकरियों के अवसर को सृजित करना संभव बनाए, ना कि उनमें कटौती करे।

फ्रांसिस ने एक बार फिर से अर्थव्यवस्था के उस ‘ट्रिकल डाउन’ सिद्धांत को खारिज कर दिया, जो आर्थिक विकास के लाभ ऊपर से नीचे रिस-रिस कर जाने की बात करता है। इसने अपने दावे के अनुरूप वह चीज हासिल नहीं की। फ्रांसिस का मानव बंधुत्व दस्तावेज कैथोलिकों और मुसलमानों के बीच भाई-भाई का संबंध होने का जिक्र करता है।

Next Stories
1 एच-1बी वीजा : अदालती प्रतिबंध हटने से क्या बदलेगा
2 कृषि कानून और संवैधानिकता: राज्यों के अधिकारों पर बहस कितनी जरूरी
3 17 नवंबर को मोदी, जिनपिंग का आमना-सामना होने के आसार, लद्दाख में गतिरोध के बाद ब्रिक्स शिखर सम्मेलन रहेंगे मौजूद
यह पढ़ा क्या?
X