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जामिया वीडियो: दरवाजा ब्लॉक कर अंधाधुंध लाठियां बरसाने लगे थे पुलिसवाले- आंख की रोशनी गंवाने वाले लड़के ने याद की खौफनाक आपबीती

घटना वाले दिन लॉ के पोस्ट ग्रेजुएट छात्र मोहम्मद मिनहाजुद्दीन भी जामिया के इब्न-ए-सिना (जामिया की पुरानी लाइब्रेरी) में थे। तब शाम के करीब छह बजे थे।

मिनहाजुद्दीन ने कहा कि वो पुलिस की कार्रवाई से पहले लाइब्रेरी में थे।

जामिया समन्वयन समिति (जेसीसी) ने रविवार (16 फरवरी, 2020) को पिछले साल 15 दिसंबर को जामिया यूनिवर्सिटी की लाइब्रेरी में छात्रों पर लाठीचार्ज कर रहे अर्द्धसैनिक बल और पुलिसकर्मियों का सीसीटीवी फुटेज जारी किया। जेसीसी में जामिया के छात्र और पूर्व छात्र शामिल हैं। 48 सेकेंड के वीडियो में अर्द्धसैनिक बल और पुलिस के कुछ कर्मचारी ओल्ड रीडिंग हॉल में दाखिल होते और छात्रों को लाठी से पीटते हुए दिख रहे हैं।

घटना वाले दिन लॉ के पोस्ट ग्रेजुएट छात्र मोहम्मद मिनहाजुद्दीन भी जामिया के इब्न-ए-सिना (जामिया की पुरानी लाइब्रेरी) में थे। तब शाम के करीब छह बजे थे। इस घटना में मिनहाजुद्दीन की बाईं आंख की रोशनी चली गई। उन्होंने इंडियन एक्सप्रेस की संवाददाता अरण्य शंकर को बताया, ‘वीडियो की शुरुआत में आप देखते हैं, जहां कुछ लोग पीछे की तरफ जाकर छिपने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि पुलिस ने दरवाजा पीटना शुरू कर दिया था और हर कोई बहुत डर गया था। आखिरकार उन्होंने दरवाजा खोल लिया और अंदर घुस गए। इसके बाद वो हम पर लाठियां बरसाने लगे। मैं भागने की कोशिश कर रहा था। मेरे एक हाथ पर मारा गया और फिर दरवाजे पर मेरी एक आंख पर लाठी मारी गई।’

मिनहाजुद्दीन ने बताया कि जान बचाने के लिए वो बाथरूम की तरफ दौड़े। तब एक तस्वीर भी वायरल हुई थी जिसमें खून से सने रूमाल से उनका चेहरा ढंका हुआ था। पुलिस में शिकायत दर्ज कराने के बावजूद मामले में अभी कोई एफआईआर नहीं हुई है। उन्होंने बताया कि जामिया प्रशासन इस मुद्दे को सिर्फ दबाना चाहता है। अगर छात्रों ने पहल नहीं की होती, तो मामला दब जाता। पुलिस ने मुझे एक बार भी नहीं बुलाया और शिकायत को एफआईआर में तब्दील नहीं किया गया।

यहां देखें वीडियो-

जामिया के छात्र से अंग्रेजी अखबार द टेलीग्राफ ने भी बातचीत की। उन्होंने बताया कि उस दिन कमरे से बाहर निकलते वक्त शीशे की रॉड से उन्हें पीटा गया। उन्होंने बताया, ‘बीस से ज्यादा अर्द्धसैनिक बल और पुलिस कर्मी अंदर दाखिल हुए। उन्होंने बिना किसी चेतावनी और कोई सवाल पूछे बिना हमें लाठियों से पीटना शुरू कर दिया। हमने वहां से निकलने की कोशिश की, मगर पुलिस ने बाहर जाने का रास्ता बंद कर दिया। दरवाजे पर हरे छद्मावरण (सीआरपीएफ की वर्दी) में एक पुलिसकर्मी ने मेरी आंख पर शीशे की रॉड मारी। मुझे चक्कर आने लगे मगर मैं बाहर नहीं निकल सका, क्योंकि पुलिस ने बाहर जाने के सभी रास्ते बंद कर दिए थे।’

बता दें कि वीडियो सामने आने के बाद विशेष पुलिस आयुक्त (खुफिया विभाग) प्रवीर रंजन ने कहा कि यह वीडियो पुलिस के संज्ञान में आया है और वह वर्तमान जांच प्रक्रिया के तहत उसकी भी जांच करेगी। सूत्रों ने बताया कि जेसीसी ने बस 48 सेंकेंड का वीडिया जारी किया किया है जिसमें इस प्रकरण का बस एक ही पक्ष दिखाया गया था। उसने (जेसीसी) दूसरे वीडियो नहीं दिखाये जिनमें दंगाई परिसर में दाखिल होते हुए नजर आ रहे हैं और कुछ अन्य उन्हें पुलिस से बचा रहे हैं।

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