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सर्वे: पीएम मोदी के मंत्रियों की लोकप्रियता घटी, नितिन गडकरी की बढ़ी, अरुण जेटली से सबसे ज्‍यादा पॉपुलर

सर्वे में 34 फीसदी लोगों ने बेरोजगारी, 24 फीसदी लोगों ने महंगाई, 18 फीसदी लोगों ने करप्शन, 5 फीसदी लोगों ने महिला सुरक्षा, 5 फीसदी लोगों ने नोटबंदी की वजह से व्यापार घाटा को बड़ा मुद्दा बताया है।

साल 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंत्रिमंडल का विस्‍तार किया था और 21 नए चेहरे शामिल किए थे।

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार की लोकप्रियता में कमी आ रही है। हाल में किए गए एक सर्वे में यह बात सामने आई है। वैसे नरेंद्र मोदी अब भी प्रधानमंत्री पद के लिए नंबर वन चेहरे बने हुए हैं। 49 फीसदी लोगों ने अभी भी उन्हें नंबर वन बताया है जबकि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को मात्र 27 फीसदी लोगों ने पसंद किया है। इंडिया टुडे और कार्वी इनसाइट्स के “मूड ऑफ द नेशन” नाम के सर्वे में मोदी सरकार के पांच टॉप मंत्रियों का भी आंकलन किया गया है। सर्वे के मुताबिक पांच में से चार मंत्रियों की लोकप्रियता में गिरावट आई है जबकि सिर्फ एक मंत्री की लोकप्रियता में उछाल आया है।

सर्वे के मुताबिक केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली अभी भी लोकप्रियता के मामले में नंबर वन बने हुए हैं। हालांकि, जनवरी 2018 के सर्वे के मुताबिक उनकी लोकप्रियता में 2 अंक की गिरावट आई है। जुलाई 2018 के मूड ऑफ द नेशन सर्वे में उन्हें 24 अंक मिले हैं। 23 अंक के साथ गृह मंत्री राजनाथ सिंह लोकप्रियता के मामले में मोदी सरकार के दूसरे मंत्री हैं। जनवरी से जुलाई के बीच सिंह की लोकप्रियता में एक अंक की गिरावट आई है। तीसरे नंबर पर विदेश मंत्री सुषमा स्वराज हैं। उन्हें 21 अंक मिले हैं। जनवरी के मुकाबले उनकी लोकप्रियता भी दो अंक गिरी है। चौथे नंबर पर सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी हैं जिनकी लोकप्रियता एक अंक बढ़कर 19 पर पहुंच गई है। रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण पांचवें नंबर हैं। उनकी लोकप्रियता भी एक अंक की गिरावट के साथ 9 पर पहुंची है।

सर्वे में 34 फीसदी लोगों ने बेरोजगारी, 24 फीसदी लोगों ने महंगाई, 18 फीसदी लोगों ने करप्शन, 5 फीसदी लोगों ने महिला सुरक्षा, 5 फीसदी लोगों ने नोटबंदी की वजह से व्यापार घाटा को बड़ा मुद्दा बताया है। बता दें कि सर्वे में कहा गया है कि अगर आज की तारीख में देश में लोकसभा चुनाव हुए और कांग्रेस ने सपा, बसपा और तृणमूल कांग्रेस से चुनाव पूर्व गठबंधन कर लिया तो भाजपा की अगुवाई वाली एनडीए गठबंधन को बहुमत नहीं मिल पाएगा। एनडीए को 228 सीटें जबकि यूपीए को 224 सीटें और अन्य के खाते में 92 सीटें जा सकती हैं। यहां गौर करने वाली बात है कि एनडीए और यूपीए की बीच मात्र चार सीटों का अंतर रह सकता है। इस सूरत में त्रिशंकु लोकसभा के आसार जताए गए हैं।

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