बिहार में बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था, नहीं मिला स्ट्रेचर तो बोरे पर मरीज को सुला हॉस्पिटल पहुंचे परिजन

लोगों का कहना है कि सदर अस्पताल में सुविधाओं की कमी लगातार देखने को मिलती है। आम लोगों की तरफ से इसके विरोध में कई बार आवाज भी उठाया गया है।

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बोरे पर मरीज को लेकर जाते परिजन (फोटो- वीडियो स्क्रीनशॉट्स)

राज्य सरकार की तरफ से हजार दावों के बाद भी बिहार में स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर लगातार सवाल खड़े हो रहे हैं। आरा सदर अस्पताल का एक वीडियो सामने आया है जिसमें मरीज के परिजन मरीज को बोरे पर उठा कर सीटी स्कैन सेंटर से इमरजेंसी वार्ड में लेकर जा रहे हैं।

खबरों के अनुसार ब्रेन हैमरेज के शिकार एक महिला के परिजनों को स्ट्रेचर के लिए अस्पताल में इधर-उधर भटकना पड़ा। काफी प्रयासों के बाद भी जब स्ट्रेचर उपलब्ध नहीं हो पाया तो परिजनों ने महिला को बोरे पर लादकर वार्ड तक पहुंचाया। पूरे घटनाक्रम पर अस्पतालकर्मियों का कहना है कि स्ट्रेचर कहीं और व्यस्त है। परिजन इंतजार करने के लिए तैयार नहीं थे। इस कारण ऐसी घटना हुई। अस्पताल में स्ट्रेचर की कोई कमी नहीं है।

हालांकि लोगों का कहना है कि सदर अस्पताल में सुविधाओं की कमी लगातार देखने को मिलती है। आम लोगों की तरफ से इसके विरोध में कई बार आवाज भी उठाया गया है। इसके बाद भी अस्पताल प्रशासन की तरफ परेशानी को दूर करने के लिए कदम नहीं उठाया गया है। बताते चलें कि कोरोना संकट के दौरान भी लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा था।समस्तीपुर सदर अस्पताल की एक तस्वीर सामने आयी थी। जिसमें एक मासूम बच्ची के परिजन अस्पताल में ऑक्सीजन सिंलेंडर लेकर इधर-उधर भटकते हुए नजर आ रहे थे।

2019 में चमकी बुखार से 200 बच्चों की हुई थी मौत: बिहार में साल 2019 में चमकी बुखार का कहर देखने को मिला था। एक ही अस्पताल में 120 से अधिक बच्चों की मौत चमकी बुखार से हो गयी थी।

बजट में हेल्थ के लिए 6 हजार करोड़ रुपये: बिहार सरकार की तरफ से जारी बजट में इस साल स्वास्थय के क्षेत्र में 6 हजार करोड़ रुपये खर्च करने की बात कही गयी है। इससे पहले साल 2020-2021 में 5610 करोड़ रुपये का बजट था।

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