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पॉलीथीन पर रोक की राह में रोड़ा बना केंद्र का फरमान

उत्तरप्रदेश में पॉलीथीन पर रोक लगाने के आदेश और 18 मार्च को केंद्रीय वन और पर्यावरण मंत्रालय के 50 माइक्रोन से ज्यादा मोटाई वाली पॉलीथीन के इस्तेमाल को मंजूरी देने से असमंजस की स्थिति पैदा हुई है। इसका जवाब देने में फिलहाल कोई सक्षम नहीं है।

Author नोएडा | Published on: March 26, 2016 5:12 AM
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव। (पीटीआई फाइल फोटो)

आशीष दुबे

प्रदेश में पॉलीथीन के इस्तेमाल पर रोक लगाने के शासनादेश पर केंद्र सरकार की हाल में जारी हुई नई नीति ने सवालिया निशान लगा दिया है जिसका खमियाजा पॉलीथीन पर रोक लगाने के लिए प्राधिकृत विभागों को भुगतना पड़ रहा है। चूंकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि केंद्र सरकार की तरफ से पांच दिनों पहले लागू की गई नई नीति प्रभावी होगी या दो महीने पुराना प्रदेश सरकार का गजट नोटिफिकेशन माना जाएगा? आलम यह है कि इस उलझे मामले पर प्रदेश सरकार का कोई भी अधिकारी अभी कुछ बोलने को तैयार नहीं है।

22 दिसंबर, 2015 को उप्र सरकार ने किसी भी तरह के पॉलीथीन के इस्तेमाल पर रोक लगाने संबंधी गजट नोटिफिकेशन जारी किया था। प्रदेश के प्रमुख सचिव पर्यावरण संजीव सरन की तरफ से जारी हुए इस नोटिफिकेशन को 21 जनवरी, 2016 से प्रदेश भर में लागू किया गया था। नोटिफिकेशन के अनुसार प्रदेश में किसी भी तरह के पॉलीथीन के निर्माण, भंडारण, विक्रय पर पूरी तरह से रोक लगाई गई थी। रोक का दायरा ना केवल पॉलीथीन तक सीमित रखा गया था बल्कि पॉलीथीन जैसे पदार्थ पॉली प्रॉपलीन से बनी थैलियों को भी इसमें शामिल किया गया था।
18 मार्च, 2016 को केंद्र सरकार की तरफ से प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स 2016 जारी किए गए थे। केंद्रीय वन और पर्यावरण मंत्रालय की तरफ से जारी इस नीति में 50 माइक्रोन से कम मोटाई वाली पॉलीथीन पर रोक लगाई है। प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स 2011 में 40 माइक्रोन से कम मोटाई वाली पॉलीथीन की थैलियों पर रोक लगाने का आदेश था। यानी 50 माइक्रोन से ज्यादा मोटाई वाली पॉलीथीन की थैलियां बनाई जा सकती हैं। अलबत्ता नई नीति को शहरी सीमा से आगे बढ़ाकर गांवों तक शामिल करने का प्रावधान रखा गया है।

उप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अफसरों से मिली जानकारी के अनुसार, केंद्र सरकार की नई नीति का दायरा शहरी सीमा से बढ़ाकर गांवों तक फैलाया गया है। यानी देश के हर हिस्से में इन्हें लागू किया गया माना गया है। बहरहाल,प्रदेश में पॉलीथीन पर रोक लगाने के 21 जनवरी के आदेश और 18 मार्च को केंद्रीय वन और पर्यावरण मंत्रालय के 50 माइक्रोन से ज्यादा मोटाई वाली पॉलीथीन के इस्तेमाल को मंजूरी देने से असमंजस की जो स्थिति पैदा हुई है, इसका जवाब देने में फिलहाल कोई सक्षम नहीं है। सेक्टर- 1 स्थित उप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी डॉ बीबी अवस्थी ने इस मामले पर कुछ भी बोलने से इनकार किया है।

जानकारों के अनुसार केंद्र सरकार की नीति में पॉलीथीन को कलेक्ट टू बैक और सड़क निर्माण में इसके इस्तेमाल के प्रावधान को भी शामिल किया गया है। 50 माइक्रोन से ज्यादा मोटाई वाली पॉलीथीन बनाने वालों को इस्तेमाल के बाद इक्टठा करने का भी प्रबंध करना होगा, ताकि नाले-नालियों में ये पॉलीथीन जमा होकर पर्यावरणीय संकट पैदा ना कर सकें। साथ ही पॉलीथीन बनाने वालों को पंजीकरण करना होगा। इसका सालाना शुल्क करीब 48 हजार रुपए निर्धारित किया गया है। पंजीकरण शुल्क नगर निकाय या अथॉरिटी में जमा कराना होगा।

पॉलीथीन के मामले पर केंद्र की नई नीति को मानें या उप्र सरकार की तरफ से लगाई गई रोक को सख्ती से लागू करें, इसको लेकर उप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी कुछ बोलने के तैयार नहीं हैं। बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी डॉ बीबी अवस्थी ने बताया कि मुख्यालय से केंद्र सरकार की नई नीति को लेकर कोई निर्देश नहीं मिले हैं। वहीं जिलाधिकारी एनपी सिंह ने बताया कि केंद्र सरकार की नई नीति के मद्देनजर प्रदेश सरकार से पॉलीथीन पर स्पष्ट दिशा निर्देश मांगे जाएंगे।

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